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LIVE Updates: रुझानों में महाराष्ट्र और झारखंड में बीजेपी गठबंधन को मिला बहुमत, क्या किया काम
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नई दिल्ली:
महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव के परिणाम के साथ ही 15 राज्यों की 46 विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों के के लिए वोटों की गिनती जारी है. रुझान आना शुरू हो गए हैं जिसमें एनडीए ने झारखंड में और महायुति ने महाराष्ट्र में बढ़त बना ली है. दोनों ही राज्य में भगवा का जोर दिख रहा है. महाराष्ट्र में महायुति पहले एक घंटे में एमवीए से दो दोगुनी सीट पर आगे है और ऐसा ही झारखंड में भी देखने को मिल रहा है. गिनती आरंभ होने के डेढ़ घंटे में महायुति ने रुझानों में बहुमत हासिल कर लिया है. झारखंड में मुकाबला कड़ा है लेकिन यहां पर भी बीजेपी नीत एनडीए ने रुझानों बहुमत पा लिया है.
कहा जा रहा है कि बीजेपी ने झारखंड में इस बार आदिवासी इलाके में काफी मेहनत की. इसके साथ ही पार्टी ने अपने ओबीसी वोट बैंक पर भी काम किया और पार्टी को इसका लाभ मिलता दिख रहा है. महाराष्ट्र में भी कांग्रेस को अंदरुनी कलह का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. महाराष्ट्र में जहां जहां बीजेपी और कांग्रेस में सीधी टक्कर हैं ऐसी 41 सीटें हैं. इनमें बीजेपी काफी आगे हैं. ऐसा ही कुछ शिवसेना और शिवसेना यूबीटी में जिन 53 सीटों पर सीधी टक्कर है वहां शिंद गुट हावी है. बता दें कि बतौर सीएम एकनाथ शिंदे के काम को महिलाओं ने काफी सराहा है. बात एनसीपी और एनसीपी शरद पवार में 41 सीटों पर सीधे मुकाबला है और इन दोनों में मुकाबला शुरुआती रुझानों में बराबर की टक्कर है.
महाराष्ट्र में तीन फैक्टर अहम माने जा रहे हैं. इसमें महिला का वोट, मराठा का वोट और योजनाओं का लाभ हैं. रुझान बताते हैं कि राज्य में एंटी इनकंबेंसी फैक्टर बिल्कुल ही काम का नहीं था. वहीं झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार की महिलाओं को लेकर स्कीम का पार्टी को ज्यादा फायदा होता नहीं दिख रहा है. यह एंटी इनकंबेंसी फैक्टर दिखाई दे रहा है.
झारखंड चुनाव में जयराम महतो भी इस बार एक अहम फैक्टर साबित हो रहे हैं. जयराम महतो खुद दो जगह से अपनी पार्टी जेएलकेएम से चुनाव लड़ रहे हैं.
कुछ घंटों में ही साफ हो जाएगा कि किसकी सरकार कहां बन रही है. महाराष्ट्र में मुकाबला महायुति (भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना-शिंदे गुट, और एनसीपी-अजित पवार गुट) और महाविकास अघाड़ी शिवसेना-उद्धव गुट, एनसीपी-शरद पवार गुट, और कांग्रेस) के बीच है. वहीं, झारखंड में सीधी टक्कर बीजेपी गठबंधन और जेएमएम व कांग्रेस के गठबंधन के बीच है. चुनाव परिणामों से पूर्व दोनों ही गठबंधनों ने दोनों ही राज्यों में अपनी अपनी जीत के दावे किए हैं.
यूपी के उपचुनाव में करहल, कुंदरकी और सीसामऊ सीटों पर शुरुआती रुझानों में समाजवादी पार्टी आगे है. इन दोनों सीटों पर सपा पहले से ही मजबूत बताई जा रही थी. 9 सीटों में से 6 में बीजेपी या सहयोगी आगे हैं. वहीं केरल के वायनाड लोकसभा सीट से प्रियंका गांधी चुनाव में आगे चल रही हैं. कांग्रेस इस सीट पर मजबूत रही है.
उपचुनाव में सबकी निगाहें उत्तर प्रदेश पर टिकी हुई हैं, जहां 9 सीटों पर चुनाव हुआ था. इसके साथ ही महाराष्ट्र की नांदेड़ और केरल की वायनाड सीट पर भी लोकसभा के उपचुनाव हुए हैं. वायनाड से प्रियंका गांधी चुनाव मैदान में उतरी हैं. बता दें कि 46 विधानसभा सीटों के साथ ही सिक्किम की दो सीटों पर भी उपचुनाव का ऐलान हुआ था. हालांकि, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (SKM) के दोनों प्रत्याशियों को निर्विरोध विजयी घोषित कर दिया गया था.
LIVE UPDATES…
शुरुआती रुझानों में NDA को बढ़त
महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव परिणाम के रुझान आने शुरू हो गए हैं. शुरुआती रुझानों में दोनों ही राज्यों में एनडीए बढ़त बनाती हुई नजर आ रही है. महाराष्ट्र में एनडीए 43 सीटों पर और एमवीए 7 सीटों पर आगे है. वहीं झारखंड में एनडीए 13 और I.N.D.I.A 6 सीटों पर बढ़त बनाते हुए नजर रहा है. उधर, वायनाड से पहली बार चुनाव लड़ रहीं प्रियंका गांधी लगभग 700 वोटों से आगे चल रही हैं.
महाराष्ट्र में महायुति और महाविकास अघाड़ी में टक्कर
महाराष्ट्र चुनाव के परिणाम काफी चौंकानेवाले हो सकते हैं, क्योंकि यहां शिवसेना और एनसीपी में टूट के बाद ये पहला चुनाव है. यहां एनडीए और इंडी गठबंधन के बीच मुकाबला है. महाराष्ट्र में 20 नवंबर को सभी 288 सीटों परमतदान हुआ था. सत्तारूढ़ महायुति में शामिल BJP ने 149 सीट, एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 81 सीट और अजित पवार के नेतृत्व वाली NCP ने 59 सीटों पर चुनाव लड़ा. एमवीए में शामिल कांग्रेस ने 101, शिवसेना (UBT) ने 95 और एनसीपी (शरद पवार) ने 86 सीटों पर चुनाव लड़ा है. अब देखना है कि किस पार्टी को कितनी सीटों पर जीत मिलती है.
झारखंड में बीजेपी के सामने जेएनएम और कांग्रेस
झारखंड में बीजेपी के सामने जेएनएम और कांग्रेस नजर आई. बीजेपी ने दावा किया है कि इस बार झारखंड में वो बहुमत से सरकार बनाने जा रही है. झारखंड की 81 विधानसभा सीटों पर 2 चरणों में वोटिंग हुई. पहले चरण में 13 नवंबर को 43 सीटों पर 66.65% तो दूसरे चरण में 20 नवंबर को 38 सीटों पर 68.45% मतदान हुआ. राज्य में एनडीए (भाजपा-एजेएसयू) और इंडिया ब्लॉक (झामुमो-कांग्रेस) के बीच मुकाबला है.
वायनाड में प्रियंका की पहली चुनावी परीक्षा
केरल के वायनाड में प्रियंका गांधी की अग्निपरीक्षा केरल की वायनाड सीट पर हुए उपचुनाव की बात की जाए तो यहां कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का सीधा मुकाबला वाम मोर्चा (CPI) के सत्यन मोकेरी और BJP की नव्या हरिदास से है. नव्या हरिदास, कोझिकोड की निगम पार्षद हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यहां की लोकसभा सीट छोड़ी थी, जिसके बाद इस सीट पर उपचुनाव हुए.
यूपी में प्रतिष्ठा की लड़ाई
उत्तर प्रदेश के मीरापुर, कुंदरकी, सीसामऊ, कटेहरी, फूलपुर, मझवां, गाजियाबाद, करहल और खैर सीट पर 20 नवंबर को उपचुनाव हुए। हालांकि इन नतीजों का 403 सदस्यीय राज्य विधानसभा की संरचना पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इस मुकाबले को लोकसभा चुनाव के बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच पहली बड़ी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है.
| विधानसभा सीट | रुझान/नतीजे |
| सीसामऊ | |
| कुंदरकी | |
| करहल | |
| गाजियाबाद सदर | |
| मझवां | |
| फूलपुर | |
| खैर | |
| मारीपुर | |
| कटेहरी |
भाजपा और विपक्षी दलों ने एक-दूसरे पर चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया है. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में गाजियाबाद सदर, खैर और फूलपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता था, जबकि मझवां क्षेत्र में भाजपा की सहयोगी निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद) ने जीत हासिल की थी. दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने करहल, कुंदरकी, कटेहरी और सीसामऊ सीटें जीती थीं। इसके अलावा एक सीट मीरापुर तब सपा के सहयोगी रहे राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने जीती। रालोद अब भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का घटक दल है. कांग्रेस ने उपचुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उसने सपा को समर्थन दिया. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने सभी नौ सीट पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने गाजियाबाद, कुंदरकी और मीरापुर में उम्मीदवार उतारे। चन्द्रशेखर आज़ाद के नेतृत्व वाली आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने भी सीसामऊ को छोड़कर सभी सीट पर चुनाव लड़ा है.
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न्यायाधीशों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि न्यायाधीशों को एक संन्यासी की तरह जीवन जीना चाहिए और घोड़े की तरह काम करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और निर्णयों के बारे में कोई राय व्यक्त नहीं करनी चाहिए. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह मौखिक टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट की यह पीठ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दो महिला न्यायिक अधिकारियों की बर्खास्तगी से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी.
कोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका में दिखावटीपन के लिए कोई जगह नहीं है. पीठ ने कहा, ‘‘न्यायिक अधिकारियों को फेसबुक का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. उन्हें निर्णयों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कल यदि निर्णय का हवाला दिया जाएगा, तो न्यायाधीश पहले ही किसी न किसी रूप में अपनी बात कह चुके होंगे.”
पीठ ने कहा, ‘‘यह एक खुला मंच है…आपको एक संत की तरह जीवन जीना होगा, पूरी मेहनत से काम करना होगा. न्यायिक अधिकारियों को बहुत सारे त्याग करने पड़ते हैं. उन्हें फेसबुक का बिल्कुल प्रयोग नहीं करना चाहिए.”
बर्खास्त महिला न्यायाधीशों में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने पीठ के विचारों को दोहराते हुए कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी या न्यायाधीश को न्यायिक कार्य से संबंधित कोई भी पोस्ट फेसबुक पर नहीं डालनी चाहिए.
यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, जो न्यायमित्र हैं, द्वारा बर्खास्त महिला न्यायाधीश के खिलाफ विभिन्न शिकायतों के बारे में पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद आई. अग्रवाल ने पीठ को बताया कि महिला न्यायाधीश ने फेसबुक पर भी एक पोस्ट डाली थी.
ग्यारह नवंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने कथित असंतोषजनक प्रदर्शन के कारण राज्य सरकार द्वारा छह महिला सिविल न्यायाधीशों की बर्खास्तगी का स्वत: संज्ञान लिया था. हालांकि, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्ण अदालत ने एक अगस्त को अपने पहले के प्रस्तावों पर पुनर्विचार किया और चार अधिकारियों ज्योति वरकड़े, सुश्री सोनाक्षी जोशी, सुश्री प्रिया शर्मा और रचना अतुलकर जोशी को कुछ शर्तों के साथ बहाल करने का फैसला किया, जबकि अन्य दो अदिति कुमार शर्मा और सरिता चौधरी को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया.
शीर्ष अदालत उन न्यायाधीशों के मामलों पर विचार कर रही थी, जो क्रमशः 2018 और 2017 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे.
(इनपुट एजेंसियों से भी)
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अनुकूल नीतियों, कारोबारी सुगमता से बिहार अब निवेश का आकर्षक स्थल
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पटना:
विकास के लिहाज से पिछड़े राज्यों में आने वाले बिहार की तस्वीर अब बदल रही है. राज्य अब अनूकूल नीतियों तथा कारोबारी सुगमता की वजह से निवेश का आकर्षक स्थल बन रहा है. अदाणी समूह से लेकर कोका-कोला तक ने यहां अरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएं की हैं. निवेश के लिए और भी कंपनियां यहां आने वाली हैं.
राज्य के उद्योग और पर्यटन मंत्री नीतीश मिश्रा बिहार को एक ऐसे राज्य में बदल रहे हैं, जो पूर्वी भारत में निवेशकों के लिए प्रवेश द्वार बन सकता है. उनका कहना है, बिहार की औद्योगिक क्षमता असीमित है. बिहार धारणा का शिकार रहा है. लेकिन अब यह बदल रहा है.
मिश्रा ने कहा कि राज्य निवेशकों को ब्याज छूट से लेकर राज्य जीएसटी की वापसी, स्टाम्प शुल्क छूट, निर्यात सब्सिडी और परिवहन, बिजली तथा भूमि शुल्क के लिए रियायतें प्रदान कर रहा है.
साथ ही न केवल अनुमोदन के समय बल्कि प्रोत्साहनों के वितरण में भी एकल खिड़की व्यवस्था के तहत मंजूरी दी जा रही है. उन्होंने कहा, ‘‘किसी को सचिवालय आने की जरूरत नहीं है. किसी को सरकारी कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। हम जो भी वादा कर रहे हैं, उसे पूरा कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि बिहार राज्य भर के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित पूरी तरह से तैयार लगभग 24 लाख वर्ग फुट औद्योगिक ‘शेड’ की पेशकश कर रहा है. उसमें सभी प्रकार का बुनियादी ढांचा उपलब्ध है. यह जगह किसी भी उद्योग के लिए निर्धारित दर पर उपलब्ध है. राज्य ने उद्योग स्थापित करने के लिए 3,000 एकड़ का भूमि बैंक भी बनाया है.
उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था की समस्या का समाधान किया गया है. साथ ही कोलकाता और हल्दिया में बंदरगाहों के साथ-साथ झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों में कच्चे माल के स्रोतों और खनिज भंडार तक पहुंचने के लिए बुनियादी ढांचे के साथ लगभग चौबीसों घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है.
बिहार सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण, आईटी और आईटी-संबद्ध सेवाओं (आईटीईएस), कपड़ा और चमड़ा क्षेत्रों को उच्च प्राथमिकता के रूप में रखा है. उनमें से प्रत्येक में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग नीतियां हैं. इसके अलावा, सरकार एथनॉल और बायोगैस जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर भी बड़ा काम कर रही है.
मिश्रा ने कहा कि बिहार में बदलाव का श्रेय केंद्र और राज्य के मिलकर काम करने को जाता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली प्रगतिशील विचारधारा वाली केंद्र सरकार के साथ, क्षेत्रीय असंतुलन अब बीते दिनों की बात है. अब हर राज्य के पास मौका है.
मिश्रा ने कहा कि बिहार ने पिछले दो दशक में इस अवसर का लाभ उठाया है. एक राज्य जो लगातार कम वृद्धि दर के लिए जाना जाता था, अब राष्ट्रीय औसत से बेहतर वृद्धि दर हासिल कर रहा है.
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी नीति अच्छी है और सौभाग्य से बिहार में हमारा नेतृत्व इतना अच्छा रहा है कि इन 19 साल में हमने बहुत अच्छा बुनियादी ढांचा बनाया है. सही मायने में बिहार निवेशकों के लिए तैयार है.”
बिहार की स्थिति विशिष्ट है. पूर्वी और उत्तरी भारत और नेपाल के विशाल बाजारों से निकटता के कारण बिहार को स्थान-विशेष का लाभ प्राप्त है. मूल रूप से कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले राज्य के पास एक बड़ा कृषि और पशु उत्पादन आधार है. यह कृषि आधारित यानी खाद्य प्रसंस्करण, रेशम और चाय से लेकर चमड़े और गैर-धातु खनिजों तक कई उद्योगों के लिए कच्चे माल की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति करता है.
इसके अलावा, पानी की कोई समस्या नहीं है और पर्याप्त संख्या में सस्ता श्रम उपलब्ध है. मिश्रा ने कहा, ‘‘ये हमारी मुख्य ताकत है और आने वाले दिनों में, बिहार में भारत के पूरे पूर्वी हिस्से के लिए वृद्धि का प्रमुख इंजन बनने की क्षमता है. यह बिहार का समय है.”
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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काल बना स्पीड ब्रेकर, हवा में उछली स्कूटर, सड़क पर घिसट गया शख्स… देखिए हैरान करने वाला VIDEO
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नई दिल्ली:
देहरादून में घंटाघर के सामने बिना चिन्ह वाले स्पीड ब्रेकर से टकराने के बाद एक स्कूटर सवार हवा में उछला और इसके बाद वह सड़क पर गिरा. वह और उसकी स्कूटर कई मीटर तक सड़क पर सरकती हुई आगे गई. गनीमत रही कि स्कूटर सवार को कोई गंभीर चोट नहीं लगी. स्पीड ब्रेकर पर ड्राइवरों को सचेत करने के लिए उनकी मार्किंग नहीं की गई है जिसके कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
NDTV को मिले घटनास्थल के फुटेज में स्कूटर मध्यम गति से स्पीड ब्रेकर की ओर बढ़ती हुई दिख रही है. जैसे ही स्कूटर सवार स्पीड ब्रेकर से टकराता है, स्कूटर अप्रत्याशित रूप से हवा में उछल जाता है. वाहन चालक उछलकर नीचे गिर जाता है. वह कुछ देर रुकने के बाद उठता है और वहां से चला जाता है.
स्पीड ब्रेकर वाहनों की गति को नियंत्रित रखने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन इनकी डिजाइन में दोषों के कारण यही स्पीड ब्रेकर कई दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं. देहरादून के इस स्पीड ब्रेकर की स्पष्ट मार्किंग नहीं की गई है. इसके अलावा यह अत्यधिक ऊंचा भी है. इससे चार पहियों वाले वाहनों के लिए इसे पार करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
उचित संकेतक और मार्किंग की कमी के कारण ड्राइवरों के लिए स्पीड ब्रेकर का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है. इससे यहां हादसे हो रहे हैं.
इस स्पीड ब्रेकर के कारण कथित तौर पर सात दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें तीन साल के एक बच्चे सहित दो लोग घायल हुए हैं.
स्पीड ब्रेकर के कारण हादसे का यह पहला मामला नहीं है. अक्टूबर में गुरुग्राम में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी. तब गोल्फ कोर्स रोड पर एक तेज रफ़्तार BMW कार नए बनाए गए स्पीड ब्रेकर पर से उछल गई थी.
कैमरे में कैद हुई इस घटना में कार जमीन से काफी ऊपर उछलती हुई दिखी थी. कार उस स्थान से करीब 15 फीट दूर जाकर गिरी थी. उसी वीडियो में दो ट्रक भी बिना किसी निशान वाले स्पीड ब्रेकर से टकराकर हवा में उछलते हुए देखे गए थे.
इस घटना को लेकर कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर हुई तीखी प्रतिक्रिया पर अधिकारियों ने कार्रवाई की थी. गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) ने ड्राइवरों को चेतावनी देने के लिए “आगे स्पीड ब्रेकर है” लिखा हुआ एक साइनबोर्ड लगवाया. उन्होंने स्पीड ब्रेकर की थर्मोप्लास्टिक व्हाइट पेंट से मार्किंग भी कराई थी. इस तरह पेंट करने से विशेष रूप से रात में स्पीड ब्रेकर साफ दिखाई देता है.
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