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इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ी, पहला चुनाव हारे, हेमंत सोरेन के झारखंड टाइगर बनने की कहानी
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Hemant Soren Life: 28 नवंबर को चौथी बार झारखंड के सीएम पद की शपथ लेने वाले 49 वर्षीय हेमंत सोरेन सियासत में भले विरासत की उपज हों, लेकिन 21 सालों में अपनी समझ-बूझ, तेवर, संघर्ष और सियासी कौशल की बदौलत उन्होंने अपनी शख्सियत और राजनीतिक करियर को लगातार विस्तार दिया है. उनके पिता शिबू सोरेन के नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने जो राजनीतिक जमीन बनाई, उसे हेमंत सोरेन ने न सिर्फ बखूबी संभाला, बल्कि चुनावी स्कोर बोर्ड पर कई शानदार रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. हेमंत सोरेन का जन्म 10 अगस्त, 1975 को झारखंड के तत्कालीन हजारीबाग जिले के गोला प्रखंड के अंतर्गत नेमरा गांव में शिबू सोरेन-रूपी सोरेन की तीसरी संतान के रूप में हुआ. उन दिनों शिबू सोरेन अलग झारखंड राज्य की मांग और लड़ाई को धार देने के लिए नवगठित झारखंड मुक्ति मोर्चा को एक पार्टी के तौर पर स्थापित करने की जद्दोजहद में जुटे थे.
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हेमंत सोरेन ने स्कूल की शुरुआती पढ़ाई बोकारो सेक्टर फोर स्थित सेंट्रल स्कूल से की. बाद में उनके पिता बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए तो उनका दाखिला पटना के एमजी हाई स्कूल में करा दिया गया. वहीं से उन्होंने 1990 में मैट्रिक की परीक्षा पास की. 1994 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई भी उन्होंने पटना में ही की. इसके बाद रांची के बीआईटी (मेसरा) में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, लेकिन उन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी.

राजनीति में उन्होंने 2003 में कदम रखा. इसी साल झामुमो की छात्र इकाई झारखंड छात्र मोर्चा के अध्यक्ष बने. 2005 में उन्होंने दुमका विधानसभा सीट से झामुमो उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन स्टीफन मरांडी ने उन्हें पराजित कर दिया. मई, 2009 में शिबू सोरेन के बड़े पुत्र और हेमंत सोरेन के बड़े भाई दुर्गा सोरेन का आकस्मिक निधन हो गया. दुर्गा सोरेन को शिबू सोरेन का स्वाभाविक राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जा रहा था. उनके निधन के बाद हेमंत सोरेन शोक संतप्त पिता के संबल बने.

जून, 2009 में उन्हें झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से राज्यसभा भेजा गया. इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में वह दुमका सीट से विधायक चुने गए और इसके बाद राज्यसभा से त्यागपत्र दे दिया. बड़े पुत्र के निधन से मानसिक तौर पर आहत शिबू सोरेन ने 2009-10 में हेमंत सोरेन को झामुमो में अपने उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित करने की कोशिश शुरू कर दी थी. शिबू सोरेन के लिए हेमंत सोरेन को विरासत हस्तांतरित करना बड़ी चुनौती थी, क्योंकि पार्टी में उनके समकालीन स्टीफन मरांडी, साइमन मरांडी और चंपई सोरेन जैसे कई बड़े नेता मौजूद थे. इन नेताओं के बजाय हेमंत सोरेन को नेतृत्व की कमान सौंपने का थोड़ा-बहुत आंतरिक विरोध हुआ, लेकिन अंततः शिबू सोरेन अपनी कोशिश में सफल रहे.

2010 के सितंबर में भारतीय जनता पार्टी और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मिलकर झारखंड में सरकार बनाई. भाजपा के अर्जुन मुंडा सीएम बने और झामुमो के हेमंत सोरेन को डिप्टी सीएम की कुर्सी मिली. वह जनवरी 2013 तक इस पद पर बने रहे. हेमंत सोरेन ने पहला बड़ा सियासी दांव जनवरी, 2013 में खेला. उन्होंने सीएम अर्जुन मुंडा पर स्थानीय नीति और कई अन्य मुद्दों पर निर्णय न लेने का आरोप लगाते हुए उनकी सरकार से झामुमो का समर्थन वापस ले लिया. अर्जुन मुंडा की सरकार गिर गई. राज्य में करीब छह महीने तक राष्ट्रपति शासन रहा. इसके बाद कांग्रेस, राजद और झामुमो ने राज्य में सरकार बनाई.

हेमंत सोरेन ने पहली बार जुलाई 2013 में झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. सीएम के तौर पर हेमंत का पहला कार्यकाल करीब 17 महीने का रहा. 2014 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी की हार हुई और उन्हें सीएम की कुर्सी गंवानी पड़ी. झारखंड मुक्ति मोर्चा को इस चुनाव में 19 सीटें मिलीं, जो 2009 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले मात्र एक ज्यादा थी. इसके बाद नेता प्रतिपक्ष के तौर पर हेमंत सोरेन ने अपने सियासी व्यक्तित्व को नई धार दी. राज्य की तत्कालीन रघुवर दास सरकार के खिलाफ उन्होंने कई मुद्दे खड़े गए. खास तौर पर झारखंड में जमीन से जुड़े सीएनटी-एसपीटी कानून कानून में रघुबर सरकार की ओर से संशोधन को वह आदिवासियों की अस्मिता के सवाल से जोड़ने में कामयाब रहे.

उन्हें इस मुद्दे पर आदिवासी समाज का व्यापक समर्थन मिला. उन्होंने सोशल मीडिया का भी बेहतर इस्तेमाल किया. 2019 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और राजद के साथ अपनी पार्टी का गठबंधन किया. इस गठबंधन ने कुल 47 सीटों पर जीत दर्ज कर रघुबर दास के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया. फिर, 29 दिसंबर, 2019 को हेमंत सोरेन ने दूसरी बार सीएम पद की शपथ ली. सीएम के तौर पर 2019 से 2024 के कार्यकाल के दौरान हेमंत सोरेन खनन लीज, खनन घोटाला, जमीन घोटाला जैसे आरोपों से घिरे.

तीखे राजनीतिक हमलों और कानूनी मोर्चों पर कठिन लड़ाई के बावजूद वह सरकार चलाने के रास्ते में आए तमाम अवरोधों को लांघने में सफल रहे. 31 जनवरी, 2024 को ईडी ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल भेजा, तो पांच महीनों के लिए सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी, लेकिन जेल में रहते हुए उनकी छवि संघर्षशील नेता के रूप में और निखरी. जेल जाने के बाद उनकी पत्नी कल्पना सोरेन का सियासी तौर पर उभार हुआ और दोनों की जोड़ी ने इस बार चुनावी लड़ाई में अब तक का शानदार स्कोर खड़ा कर दिया.
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न्यायाधीशों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि न्यायाधीशों को एक संन्यासी की तरह जीवन जीना चाहिए और घोड़े की तरह काम करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और निर्णयों के बारे में कोई राय व्यक्त नहीं करनी चाहिए. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह मौखिक टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट की यह पीठ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दो महिला न्यायिक अधिकारियों की बर्खास्तगी से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी.
कोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका में दिखावटीपन के लिए कोई जगह नहीं है. पीठ ने कहा, ‘‘न्यायिक अधिकारियों को फेसबुक का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. उन्हें निर्णयों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कल यदि निर्णय का हवाला दिया जाएगा, तो न्यायाधीश पहले ही किसी न किसी रूप में अपनी बात कह चुके होंगे.”
पीठ ने कहा, ‘‘यह एक खुला मंच है…आपको एक संत की तरह जीवन जीना होगा, पूरी मेहनत से काम करना होगा. न्यायिक अधिकारियों को बहुत सारे त्याग करने पड़ते हैं. उन्हें फेसबुक का बिल्कुल प्रयोग नहीं करना चाहिए.”
बर्खास्त महिला न्यायाधीशों में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने पीठ के विचारों को दोहराते हुए कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी या न्यायाधीश को न्यायिक कार्य से संबंधित कोई भी पोस्ट फेसबुक पर नहीं डालनी चाहिए.
यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, जो न्यायमित्र हैं, द्वारा बर्खास्त महिला न्यायाधीश के खिलाफ विभिन्न शिकायतों के बारे में पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद आई. अग्रवाल ने पीठ को बताया कि महिला न्यायाधीश ने फेसबुक पर भी एक पोस्ट डाली थी.
ग्यारह नवंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने कथित असंतोषजनक प्रदर्शन के कारण राज्य सरकार द्वारा छह महिला सिविल न्यायाधीशों की बर्खास्तगी का स्वत: संज्ञान लिया था. हालांकि, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्ण अदालत ने एक अगस्त को अपने पहले के प्रस्तावों पर पुनर्विचार किया और चार अधिकारियों ज्योति वरकड़े, सुश्री सोनाक्षी जोशी, सुश्री प्रिया शर्मा और रचना अतुलकर जोशी को कुछ शर्तों के साथ बहाल करने का फैसला किया, जबकि अन्य दो अदिति कुमार शर्मा और सरिता चौधरी को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया.
शीर्ष अदालत उन न्यायाधीशों के मामलों पर विचार कर रही थी, जो क्रमशः 2018 और 2017 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे.
(इनपुट एजेंसियों से भी)
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अनुकूल नीतियों, कारोबारी सुगमता से बिहार अब निवेश का आकर्षक स्थल
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पटना:
विकास के लिहाज से पिछड़े राज्यों में आने वाले बिहार की तस्वीर अब बदल रही है. राज्य अब अनूकूल नीतियों तथा कारोबारी सुगमता की वजह से निवेश का आकर्षक स्थल बन रहा है. अदाणी समूह से लेकर कोका-कोला तक ने यहां अरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएं की हैं. निवेश के लिए और भी कंपनियां यहां आने वाली हैं.
राज्य के उद्योग और पर्यटन मंत्री नीतीश मिश्रा बिहार को एक ऐसे राज्य में बदल रहे हैं, जो पूर्वी भारत में निवेशकों के लिए प्रवेश द्वार बन सकता है. उनका कहना है, बिहार की औद्योगिक क्षमता असीमित है. बिहार धारणा का शिकार रहा है. लेकिन अब यह बदल रहा है.
मिश्रा ने कहा कि राज्य निवेशकों को ब्याज छूट से लेकर राज्य जीएसटी की वापसी, स्टाम्प शुल्क छूट, निर्यात सब्सिडी और परिवहन, बिजली तथा भूमि शुल्क के लिए रियायतें प्रदान कर रहा है.
साथ ही न केवल अनुमोदन के समय बल्कि प्रोत्साहनों के वितरण में भी एकल खिड़की व्यवस्था के तहत मंजूरी दी जा रही है. उन्होंने कहा, ‘‘किसी को सचिवालय आने की जरूरत नहीं है. किसी को सरकारी कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। हम जो भी वादा कर रहे हैं, उसे पूरा कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि बिहार राज्य भर के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित पूरी तरह से तैयार लगभग 24 लाख वर्ग फुट औद्योगिक ‘शेड’ की पेशकश कर रहा है. उसमें सभी प्रकार का बुनियादी ढांचा उपलब्ध है. यह जगह किसी भी उद्योग के लिए निर्धारित दर पर उपलब्ध है. राज्य ने उद्योग स्थापित करने के लिए 3,000 एकड़ का भूमि बैंक भी बनाया है.
उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था की समस्या का समाधान किया गया है. साथ ही कोलकाता और हल्दिया में बंदरगाहों के साथ-साथ झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों में कच्चे माल के स्रोतों और खनिज भंडार तक पहुंचने के लिए बुनियादी ढांचे के साथ लगभग चौबीसों घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है.
बिहार सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण, आईटी और आईटी-संबद्ध सेवाओं (आईटीईएस), कपड़ा और चमड़ा क्षेत्रों को उच्च प्राथमिकता के रूप में रखा है. उनमें से प्रत्येक में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग नीतियां हैं. इसके अलावा, सरकार एथनॉल और बायोगैस जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर भी बड़ा काम कर रही है.
मिश्रा ने कहा कि बिहार में बदलाव का श्रेय केंद्र और राज्य के मिलकर काम करने को जाता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली प्रगतिशील विचारधारा वाली केंद्र सरकार के साथ, क्षेत्रीय असंतुलन अब बीते दिनों की बात है. अब हर राज्य के पास मौका है.
मिश्रा ने कहा कि बिहार ने पिछले दो दशक में इस अवसर का लाभ उठाया है. एक राज्य जो लगातार कम वृद्धि दर के लिए जाना जाता था, अब राष्ट्रीय औसत से बेहतर वृद्धि दर हासिल कर रहा है.
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी नीति अच्छी है और सौभाग्य से बिहार में हमारा नेतृत्व इतना अच्छा रहा है कि इन 19 साल में हमने बहुत अच्छा बुनियादी ढांचा बनाया है. सही मायने में बिहार निवेशकों के लिए तैयार है.”
बिहार की स्थिति विशिष्ट है. पूर्वी और उत्तरी भारत और नेपाल के विशाल बाजारों से निकटता के कारण बिहार को स्थान-विशेष का लाभ प्राप्त है. मूल रूप से कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले राज्य के पास एक बड़ा कृषि और पशु उत्पादन आधार है. यह कृषि आधारित यानी खाद्य प्रसंस्करण, रेशम और चाय से लेकर चमड़े और गैर-धातु खनिजों तक कई उद्योगों के लिए कच्चे माल की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति करता है.
इसके अलावा, पानी की कोई समस्या नहीं है और पर्याप्त संख्या में सस्ता श्रम उपलब्ध है. मिश्रा ने कहा, ‘‘ये हमारी मुख्य ताकत है और आने वाले दिनों में, बिहार में भारत के पूरे पूर्वी हिस्से के लिए वृद्धि का प्रमुख इंजन बनने की क्षमता है. यह बिहार का समय है.”
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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काल बना स्पीड ब्रेकर, हवा में उछली स्कूटर, सड़क पर घिसट गया शख्स… देखिए हैरान करने वाला VIDEO
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नई दिल्ली:
देहरादून में घंटाघर के सामने बिना चिन्ह वाले स्पीड ब्रेकर से टकराने के बाद एक स्कूटर सवार हवा में उछला और इसके बाद वह सड़क पर गिरा. वह और उसकी स्कूटर कई मीटर तक सड़क पर सरकती हुई आगे गई. गनीमत रही कि स्कूटर सवार को कोई गंभीर चोट नहीं लगी. स्पीड ब्रेकर पर ड्राइवरों को सचेत करने के लिए उनकी मार्किंग नहीं की गई है जिसके कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
NDTV को मिले घटनास्थल के फुटेज में स्कूटर मध्यम गति से स्पीड ब्रेकर की ओर बढ़ती हुई दिख रही है. जैसे ही स्कूटर सवार स्पीड ब्रेकर से टकराता है, स्कूटर अप्रत्याशित रूप से हवा में उछल जाता है. वाहन चालक उछलकर नीचे गिर जाता है. वह कुछ देर रुकने के बाद उठता है और वहां से चला जाता है.
स्पीड ब्रेकर वाहनों की गति को नियंत्रित रखने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन इनकी डिजाइन में दोषों के कारण यही स्पीड ब्रेकर कई दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं. देहरादून के इस स्पीड ब्रेकर की स्पष्ट मार्किंग नहीं की गई है. इसके अलावा यह अत्यधिक ऊंचा भी है. इससे चार पहियों वाले वाहनों के लिए इसे पार करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
उचित संकेतक और मार्किंग की कमी के कारण ड्राइवरों के लिए स्पीड ब्रेकर का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है. इससे यहां हादसे हो रहे हैं.
इस स्पीड ब्रेकर के कारण कथित तौर पर सात दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें तीन साल के एक बच्चे सहित दो लोग घायल हुए हैं.
स्पीड ब्रेकर के कारण हादसे का यह पहला मामला नहीं है. अक्टूबर में गुरुग्राम में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी. तब गोल्फ कोर्स रोड पर एक तेज रफ़्तार BMW कार नए बनाए गए स्पीड ब्रेकर पर से उछल गई थी.
कैमरे में कैद हुई इस घटना में कार जमीन से काफी ऊपर उछलती हुई दिखी थी. कार उस स्थान से करीब 15 फीट दूर जाकर गिरी थी. उसी वीडियो में दो ट्रक भी बिना किसी निशान वाले स्पीड ब्रेकर से टकराकर हवा में उछलते हुए देखे गए थे.
इस घटना को लेकर कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर हुई तीखी प्रतिक्रिया पर अधिकारियों ने कार्रवाई की थी. गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) ने ड्राइवरों को चेतावनी देने के लिए “आगे स्पीड ब्रेकर है” लिखा हुआ एक साइनबोर्ड लगवाया. उन्होंने स्पीड ब्रेकर की थर्मोप्लास्टिक व्हाइट पेंट से मार्किंग भी कराई थी. इस तरह पेंट करने से विशेष रूप से रात में स्पीड ब्रेकर साफ दिखाई देता है.
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