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रूस-यूक्रेन युद्ध : रूस ने परमाणु हमला तो क्या और कितनी होगी तबाही, सारी डिटेल समझें
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नई दिल्ली:
Nuclear bomb Threat in world and Impact: दुनिया में परमाणु बम के विस्फोट का खतरा बढ़ गया है. रूस जिस तरह से यूक्रेन के साथ युद्ध (Russia Ukraine War) में उलझ गया है और यूक्रेन ने अब जिस प्रकार से लंबी दूरी की मिसाइलों (long range missile attack) को दागना शुरू कर दिया है उससे यह खतरा होता जा रहा है कि जल्द ही रूस कहीं कोई परमाणु हमला न कर दे. रूस ने कई दिनों पहले अपनी परमाणु नीति (Change in Russian Nuclear Policy) में बदलाव की घोषणा की थी. नीति में जो बदलाव हुआ है उसके हिसाब से रूस के पास अब परमाणु हमला करने के सारे रास्ते खुल गए हैं. यह केवल यूक्रेन के लंबी दूरी की मिसाइलों के प्रयोग के बाद हुआ है. यूक्रेन ने अभी तक रूस के खिलाफ युद्ध में अमेरिका द्वारा दी गई लंबी दूरी की मिसाइल का इस्तेमाल किया था और अब ब्रिटेन की दी हुई लंबी दूरी की मिसाइल का प्रयोग भी रूस पर कर दिया है. इधर, रूस इससे काफी नाराज़ हो गया है. यह अलग बात है कि रूस ने इन हमलों को नाकाम करने की बात भी कही है. रूस के पास अपना मिसाइल हमले को विफल करने का सिस्टम है.
रूस ने दे दी है परमाणु हमले की धमकी
लेकिन, रूस की नाराज़गी यूक्रेन सहित यूरोप के कई देशों पर परमाणु हमले का खतरा मंडराने लगा है. इसके चलते कुछ यूरोपीय देशों ने यूक्रेन से दूरी बना ली है. अमेरिका ने यूक्रेन की राजधानी कीव से अपना दूतावास भी बंद कर दिया है. साथ ही कुछ अन्य देशों ने अपने नागरिकों को ऐसा होने की स्थिति में क्या करना है इसके बारे में जानकारी देना भी आरंभ कर दिया है.
ईरान-इजरायल में तनाव
दूसरी तरफ इजरायल की भी ईरान के साथ तनातनी जारी है. ऐसे में ईरान भी अपने को परमाणु शक्ति संपन्न देश मानता है और साफ कहता है कि जरूरत पर वह हर प्रकार के हथियार का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र है.
सवाल उठता है कि यदि रूस ने परमाणु हथियार का प्रयोग किया तब क्या होगा. रूस ने परमाणु हमला तो क्या और कितनी होगी तबाही.
परमाणु बम विस्फोट के परिणाम अत्यंत विनाशकारी और व्यापक होते हैं. इसे पूरी दुनिया ने अमेरिका के जापान पर किए गए हमलों के असर से देखा है. उसके बाद इस पर काफी अध्ययन भी हुआ और समझने का प्रयास हुआ कि यह कितना खतरनाक बम है. परमाणु बम के हमले के प्रभाव को कुछ इस प्रकार समझा जा सकता है.
परमाणु बम के हमले का क्या होता है असर
सबसे पहले यह जान लें कि जहां पर परमाणु बम गिरता है वहां कैसी स्थिति होती है. जिस स्थान पर परमाणु बम का हमला होता है उसके आस-पास की इमारतों और लगभग सभी निर्माण, जीव जन्तू, पेड़-पौधे सब नष्ट हो जाता है. एक विशाल शॉकवेव उत्पन्न होती है और यह आस-पास के करीब 2 किलोमीटर की परिधि तक असर डालती है. यह भी बम की क्षमता और प्रयोग में लाए गए मैटिरियल पर निर्भर करता है. साथ ही उस स्थान पर तापमान हजारों डिग्री तक पहुंच जाता है, आस-पास की सभी चीज जलकर राख हो जाती है. भीषण गर्मी पैदा होती है. इसके साथ ही आस-पास के कई किलोमीटर दूर तक के इलाके में गंभीर रेडिएशन से तमाम तरह की बीमारी हो जाती है.
रेडिएशन सबसे खतरनाक
रेडिएशन से कैंसर, डीएनए में बदलाव और गंभीर चोटें, अंगभंग और विकलांगता की बीमारियों हो जाती है. कई प्रकार के चर्म रोग और जलन की समस्या त्वरित प्रभाव में देखने को मिलते हैं.
सालों तक असर भुगतती है मानवता और पर्यावरण
ऐसा नहीं है कि परमाणु बम के हमले के बाद केवल कुछ समय के लिए समस्या होती है. बल्कि, दीर्घकालिक समस्याएं भी होती हैं. जो रेडिएशन निकलती हैं वह कई वर्षों तक और कुछ पीढ़ियों तक अपना कुप्रभाव डालती हैं. जिस क्षेत्र में हमला होता है वहां के पर्यावरण पर गंभीर असर होता है. सालों तक उस इलाके की भूमि बंजर हो जाती है. पर्यावरण को गंभीर नुकसान होता है. मिट्टी, पानी और हवा प्रदूषित हो जाती है. इन सबका असर खेती, पीने के पानी तक पर पड़ता है.
तापमान में कमी
हवा में बड़े पैमाने पर धूल और धुआँ लंबे समय तक असर डालता है. इसकी मोटी परत वायुमंडल में हो जाने के चलते सूर्य का प्रकाश उस इलाके में धरती में पहुंच नहीं पाता है या कम पहुंच पाता है. इससे तापमान में गिरावट देखने को मिलती है.
एक देश पर इस प्रकार की घटना का असर देखा जाए तो आर्थिक से लेकर लोगों की अलग-अलग प्रकार की समस्याओं से उसका सामना होता है. इससे यह समझा जा सकता है कि किस प्रकार परमाणु बम का हमला किसी एक स्थान ही नहीं बल्कि आस-पास के कई किलोमीटर और देश छोटा हुआ तो पड़ोसी देशों तक पर इसका असर देखने को मिल सकता है.
जापान पर हुए असर को समझें
आपको बात कुछ कम समझ में आई होगी और आप इसके असर को किताबी ज्यादा समझ रहे हैं. इससे आगे इसकी भयावहता को समझाने के लिए हमें अभी तक प्रयोग किए गए दो परमाणु बमों से हुए नुकसान को समझना होगा.
अमेरिका का बम कितना बड़ा और असरदार था
आपको बता दें कि 6 अगस्त, 1945 को जापान के हिरोशिमा पर अमेरिका ने परमाणु बम गिराया गया था. इसका नाम अमेरिका ने “लिटिल बॉय” रखा था. इसका वजन लगभग 9,000 पाउंड (4,400 किलोग्राम) था. इसकी लंबाई करीब 10 फीट (3.0 मीटर) थी. इसका व्यास 28 इंच (71 सेमी) का था. इसके भीतर अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भरा गया था. यह बम अमेरिकी एयरफोर्स के बी-29 बमवर्षक, एनोला गे द्वारा गिराया गया था. बताया जाता है कि इस विस्फोट में 15,000 टन से अधिक टीएनटी की ताकत थी, जिससे तुरंत अनुमानित 70,000 लोग मारे गए. उस वर्ष के अंत तक, मरने वालों की संख्या 140,000 से अधिक हो गई थी. इस बम इलाके की 70 प्रतिशत इमारतें ध्वस्त हो गई थीं. पूरे क्षेत्र में कैंसर केस बढ़ते चले गए.

नागासाकी पर असर
अमेरिका ने तीन दिन बाद नागासाकी में थोड़ा बड़ा प्लूटोनियम बम गिराया. इससे जो विस्फोट हुआ था उससे 6.7 वर्ग किमी का एरिया प्रभावित हुआ. जब विस्फोट हुआ तब ज़मीन का तापमान 4,000 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया और रेडियोधर्मी वर्षा होने लगी थी. इस असर यह था कि वर्ष 1945 के अंत तक शहर में 74,000 लोग मारे गए.
इससे आप यह समझ सकते हैं कि इन दोनों बमों के विस्फोट की वजह से 2 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

चिकित्सा सहायता क्यों नहीं पहुंची
सबसे बड़े आश्चर्य की बात तो यह है कि इन हमलों में बचे और घायल लोगों को चिकित्सकीय सहायता भी जल्द नहीं पहुंचाई जा सकती है. इसके कारण भी कई लोगों की मौत हो गई. इसके पीछे का कारण और चौंकाने वाला है. 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी में हुई क्षति के कारण सहायता प्रदान करना लगभग असंभव था. इसका कारण यह था कि हिरोशिमा में 90 प्रतिशत चिकित्सक और नर्सें मारे गए थे, जो बचे थे उन्हे खुद मदद की दरकार थी, वे दूसरे की मदद करने की स्थिति में नहीं थे. शहर के 45 में से 42 अस्पताल बेकार हो गए.
अस्पताल क्यों हो गए फेल
इसके बाद शहर के अस्पतालों में ऐसी किसी स्थिति की तैयारी होना ही असंभव है. कारण साफ है कि अस्पतालों में बर्न वार्ड और बेड कम होते हैं और ऐसे हालात में उन्हें अचानक बढ़ाना मुश्किल हो जाता है. हिरोशिमा और नागासाकी में बमबारी के बाद सहायता प्रदान करने के लिए शहरों में प्रवेश करने वालों में से कुछ की तो रेडिएशन से मौत हो गई थी.
पीढ़ियों तक असर
यह तो समझा जा सकता है कि परमाणु विस्फोट से निकली आग के गोले को अपने अधिकतम आकार तक पहुंचने में लगभग 10 सेकंड का समय ही लगता है, लेकिन इसका प्रभाव दशकों तक रहता है और पीढ़ियों तक अपना असर डालता है.
बाद में कौन से बीमारी
हिरोशिमा और नागासाकी में बमबारी के पांच से छह साल बाद, जीवित बचे लोगों में ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुईथी. लगभग एक दशक के बाद, जीवित बचे लोग सामान्य दर से अधिक दर पर थायराइड, स्तन, फेफड़े और अन्य कैंसर से पीड़ित होने लगे थे. बम विस्फोटों के संपर्क में आने वाली गर्भवती महिलाओं में गर्भपात और उनके शिशुओं की मृत्यु की दर काफी ज्यादा बढ़ गई थी. यानी बच्चों के लिए रेडिएशन सीधे असर डालता है. बच्चों में बौद्धिक विकलांगता, बिगड़ा हुआ विकास और कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है. यानी यह समझा जा सकता है कि आने वाले कई दशकों तक इसका असर होता है.
दुनिया में कितना परमाण बम
जानकारी के अनुसार दुनिया में इस समय लगभग 12,100 परमाणु हथियार हैं, जिनमें 9,500 से अधिक सक्रिय सैन्य भंडार हैं. इसमें से सबसे ज्यादा परमाणु हथियार रूस के पास ही हैं. रूस के पास 5,580 परमाणु हथियार हैं. इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका के पास 5,044 परमाणु हथियार हैं. चीन के पास 500 परमाणु हथियार हैं. फ़्रांस के पास 470 परमाणु हथियार है. भारत के पास करीब 172 परमाणु हथियार बताए जाते हैं. पाकिस्तान के पास अनुमानतः 170 परमाणु हथियार हैं. इज़राइल के पास अनुमानतः 90 परमाणु हथियार हैं. यूनाइटेड किंगडम के पास 225 हथियार हैं. अच्छी बात यह है कि 1985 में अपने चरम के बाद से परमाणु हथियारों की संख्या में काफी कमी आई है. 1985 के समय विश्व में अनुमानतः 63,600 परमाणु हथियार थे.
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पायल कपाड़िया ने रचा इतिहास, गोल्डन ग्लोब्स में हासिल किया नामांकन
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नई दिल्ली:
भारत की मशहूर निर्देशन पायल कपाड़िया ने इतिहास रच डाला है. उनकी फिल्म ऑल वी इमेजिन एज लाइट को गोल्डन ग्लोब्स के सर्वश्रेष्ठ निर्देशक में नामांकन मिला है. पायल कपाड़िया के लिए गोल्डन ग्लोब्स में नामांकन हासिल करना दूसरी बड़ी कामयाबी है. इससे पहले उन्होंने फिल्म ऑल वी इमेजिन एज लाइट में इस साल के कान फिल्म महोत्सव बेस्ट डायरेक्टर और फिल्म की एक्ट्रेस अनसूया सेनगुप्ता को बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब हासिल किया था. पायल कपाड़िया को ऑल वी इमेजिन एज लाइट के लिए 77वें कान फिल्म फेस्टिवल में ग्रां प्री जीता था.
मलयालम-हिंदी फीचर फिल्म ऑल वी इमेजिन एज लाइट की कहानी मुंबई की तीन महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सड़क मार्ग से तटीय शहर की एक यात्रा पर जाती हैं. फिल्म में कानी कुश्रुति, दिव्या प्रभा और छाया कदम ने मुख्य भूमिका निभाई है.
2024 गोल्डन ग्लोब्स पुरस्कार के नामांकनों की घोषणा
2024 गोल्डन ग्लोब्स पुरस्कार के लिए नामांकनों की सूची जारी कर दी गई है. इस साल कई शानदार फिल्में और टेलीविजन सीरीज़ इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए दौड़ में हैं.
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – टेलीविजन श्रृंखला (ड्रामा):
– डोनाल्ड ग्लोवर, Mr. and Mrs. Smith
– जैक गिलेनहाल, Presumed Innocent
– गैरी ओल्डमैन, Slow Horses
– एडी रेडमायने, The Day of the Jackal
– हिरोयुकी सनाडा, Shogun
– बिली बॉब थॉर्नटन, Landman
सर्वश्रेष्ठ मूल संगीत – मोशन पिक्चर:
– वोल्कर बर्टलमैन, Conclave
– डैनियल ब्लमबर्ग, The Brutalist
– क्रिस बॉवर्स, The Wild Robot
– क्लेमेंट ड्युकोल, Camille, Emilia Perez
– ट्रेंट रेज़नोर और एटिकस रॉस, Challengers
– हंस ज़िमर, Dune: Part Two
सर्वश्रेष्ठ सीमित श्रृंखला, एंथोलॉजी श्रृंखला या मोशन पिक्चर – टेलीविजन:
– Baby Reindeer
– Disclaimer
– Monsters: The Lyle and Erik Menendez Story
– The Penguin
– Ripley
– True Detective: Night Country
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – टेलीविजन श्रृंखला (कॉमेडी या म्यूजिकल):
– क्रिस्टन बेल, Nobody Wants This
– क्विंटा ब्रुन्सन, Abbott Elementary
– आयो एडेबिरी, The Bear
– सेलेना गोमेज़, Only Murders in the Building
– कैथरीन हान, Agatha All Along
– जीन स्मार्ट, Hacks
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – टेलीविजन श्रृंखला (कॉमेडी या म्यूजिकल):
– एडम ब्रोडी, Nobody Wants This
– टेड डैन्सन, A Man on the Inside
– स्टीव मार्टिन, Only Murders in the Building
– जेसन सीगल, Shrinking
– मार्टिन शॉर्ट, Only Murders in the Building
– जेरेमी एलन व्हाइट, The Bear
सर्वश्रेष्ठ मूल गीत – मोशन पिक्चर:
– Beautiful That Way, The Last Showgirl, संगीत और गीत: माइलि साइरस, लिक्का ली, एंड्रयू वायट
– Compress/Repress, Challengers, संगीत और गीत: ट्रेंट रेज़नोर, एटिकस रॉस और लुका ग्वाडागिनो
– El Mal, Emilia Perez, संगीत और गीत: क्लेमेंट ड्युकोल, कैमेल और जैक्स ऑडियार
– Forbidden Road, Better Man, संगीत और गीत: रॉबी विलियम्स, फ्रेडी वेक्सलर और साचा स्कारबेक
– Kiss The Sky, The Wild Robot, संगीत और गीत: डेलैसी, जॉर्डन जॉनसन, स्टीफन जॉनसन, मारेन मोरिस, माइकल पोलैक और अली टेम्पोसी
– Mi Camino, Emilia Perez, संगीत और गीत: क्लेमेंट ड्युकोल और कैमेल
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – सीमित श्रृंखला, एंथोलॉजी श्रृंखला या मोशन पिक्चर – टेलीविजन:
– केट ब्लैंचेट, Disclaimer
– जोडी फोस्टर, True Detective: Night Country
– क्रिस्टिन मिलियोटी, The Penguin
– सोफिया वर्गारा, Griselda
– नाओमी वॉट्स, Feud: Capote vs. The Swans
– केट विंसलेट, The Regime
सर्वश्रेष्ठ मोशन पिक्चर – एनिमेटेड:
– Flow
– Inside Out 2
– Memoir of a Snail
– Moana 2
– Wallace & Gromit: Vengeance Most Fowl
– The Wild Robot
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – सहायक भूमिका – मोशन पिक्चर:
– एरियाना ग्रांडे, Wicked
– सेलेना गोमेज़, Emilia Perez
– फेलिसिटी जोन्स, The Brutalist
– मार्गरेट क्वॉली, The Substance
– इसाबेला रॉसेलिनी, Conclave
– जोई सैलडाना, Emilia Perez
सर्वश्रेष्ठ निर्देशक – मोशन पिक्चर:
– जैक्स ऑडियार, Emilia Perez
– सीन बेकर, Anora
– एडवर्ड बर्गर, Conclave
– ब्रैडी कॉर्बेट, The Brutalist
– कोराली फार्जात, The Substance
– पायल कपाड़िया, All We Imagine as Light
वहीं बात करें गोल्डन ग्लोब अवार्ड्स की तो 82वें वार्षिक गोल्डन ग्लोब अवार्ड्स का सीधा प्रसारण सीबीएस पर बेवर्ली हिल्टन से और रविवार, 5 जनवरी, 2025 को शाम 5 बजे किया जाएगा. निक्की ग्लेसर 2025 के गोल्डन ग्लोब्स की मेज़बानी करेंगी और एमी विजेता निर्माता ग्लेन वीस और रिकी किर्शनर लगातार दूसरे साल शो रनर के रूप में काम करेंगे. पहले यह घोषणा की गई थी कि वियोला डेविस को सेसिल बी. डेमिले पुरस्कार और टेड डैनसन को कैरल बर्नेट पुरस्कार मिलेगा, जो टीवी उत्कृष्टता को मान्यता देता है.
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IIT कानपुर से इंजीनियरिंग, फाइनेंस और टैक्सेशन के एक्सपर्ट… RBI के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा से मिलिए
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नई दिल्ली:
रेवेन्यू सेक्रेटरी संजय मल्होत्रा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नए गवर्नर अपॉइंट हुए हैं. मल्होत्रा 11 दिसंबर 2024 को RBI के 26वें गवर्नर के तौर पर कार्यभार संभालेंगे. मौजूदा गवर्नर शक्तिकांत दास का कार्यकाल 10 दिसंबर को खत्म हो रहा है. RBI गवर्नर के तौर पर मल्होत्रा का कार्यकाल 3 साल का होगा.
सरकार ने 2022 में रिजर्व बैंक (RBI) के डायरेक्टर के रूप में डिपाटर्मेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) के सचिव संजय मल्होत्रा को नॉमिनेट किया था. सोमवार को मोदी कैबिनेट ने संजय मल्होत्रा के अपॉइंटमेंट को मंजूरी दी. आइए जानते हैं कौन हैं संजय मल्होत्रा, जो देश के सेंट्रल बैंक की सारी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं:-
भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में किसी भी घटना के प्रभाव से निपटने के लिए अच्छी स्थिति में: RBI
राजस्थान कैडर के IAS ऑफिसर
संजय मल्होत्रा राजस्थान कैडर के 1990 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई राजस्थान में ही हुई है. IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस में उन्होंने इंजीनियरिंग की है. इसके बाद अमेरिका के
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर डिग्री की पढ़ाई की है.
33 साल का एक्सपीरिएंस
संजय मल्होत्रा को पास 33 साल का एक्सपीरिएंस हैं. उन्होंने पावर, फाइनेंस, टैक्सेशन, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और माइन्स समेत तमाम क्षेत्रों में काम किया है. मल्होत्रा के पास राज्य और केंद्र सरकार दोनों में फाइनेंस और टैक्सेशन में काम करने का अनुभव भी है.
राजकोषीय घाटा अक्टूबर के अंत में पूरे साल के लक्ष्य का 46.5 प्रतिशत: सरकारी आंकड़े
वित्त मंत्रालय में सेक्रेटरी (रेवेन्यू) के रूप में काम करने से पहले उन्होंने भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग में सचिव का पद संभाला था.
सुधारवादी अफसरों में होती है गिनती
फाइनेंस के मामलों में संजय मल्होत्रा की गिनती सुधारवादी और मजबूत काम करने वाले अफसरों में होती है. उन्हें राजस्थान के करीब सभी विभागों में काम करने का अनुभव है. वो PM मोदी के पसंदीदा अफसरों में भी शामिल हैं.
टैक्स पॉलिसी मेकिंग में अहम भूमिका
संजय मल्होत्रा ने डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स के लिए टैक्स पॉलीसी मेकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
RBI ने लगातार 11वीं बार Repo Rate में नहीं किया बदलाव, 6.50% पर बरकरार, लोन की EMI पर राहत नहीं
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150 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म को अक्षय कुमार ने अपनी गलती से बनाया फ्लॉप ? मेकर्स को लगा इतना चूना
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अक्षय कुमार की इस आदत की वजह से फ्लॉप हुई थी मूवी सम्राट पृथ्वीराज
नई दिल्ली:
साल 2022 में अक्षय कुमार की एक फिल्म आई थी पृथ्वीराज चौहान. जैसा कि नाम से ही जाहिर है ये फिल्म पृथ्वी राज चौहान की लाइफ पर बेस्ड थी. उनके साथ उनके शौर्य के साथ उनकी संयोगिता के प्रति चाहत को भी फिल्म में दिखाया गया था. लेकिन ये फिल्म अक्षय कुमार की दूसरी फिल्मों की तरह कोई कमाल नहीं दिखा सकी थी. इसकी क्या वजह थी. फिल्म क्रिटिक और ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा ने इस बारे में एनडीटीवी से खास बातचीत की और बताया पृथ्वीराज चौहान दर्शकों की कसौटी पर खरी क्यों नहीं उतरी.
क्यों फ्लॉप हुई अक्षय कुमार की मूवी?
एनडीटीवी ने कोमल नाहटा से जानना चाहा कि क्या बॉलीवुड के एक्टर्स साउथ के हीरोज जितनी मेहनत, रोल में उतरने के लिए नहीं करते हैं. इसके जवाब में कोमल नाहटा ने कहा कि ये कहना गलत होगा कि बॉलीवुड के एक्टर्स रोल में ढलने के लिए मेहनत नहीं करते हैं. शाहरुख खान, आमिर खान जैसे स्टार्स भरपूर मेहनत करते हैं. उन्होंने सम्राट पृथ्वीराज मूवी का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी फिल्म बनाना हो तो मेहनत ज्यादा लगती है. जो अक्षय कुमार ने इस फिल्म के लिए नहीं की. इस फिल्म में पृथ्वीराज चौहान के हाव भाव पकड़ने के लिए थोड़ी ज्यादा मेहनत की जानी चाहिए थी. लेकिन रोल में उतरने की कोशिश ही नहीं की गई. जिसका नतीजा ये हुआ कि फिल्म को दर्शकों ने पसंद नहीं किया.
दो साल पहले रिलीज हुई थी फिल्म
अक्षय कुमार की फिल्म सम्राट पृथ्वीराज साल 2022 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म में मिस वर्ल्ड रही मानुषी छिल्लर संयोगिता के रोल में थीं. सोनू सूद, चंदर वरदाई के रोल में थे. आशुतोष राणा ने जय चंद्र का रोल अदा किया था. फिल्म से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स में इसका बजट करीब 200 करोड़ रु. बताया गया. लेकिन फिल्म सौ करोड़ का मार्क भी टच नहीं कर पाई. इस फिल्म को डिजास्टर मूवी माना गया.
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