Blog
मशीनों से मोहब्बत का बढ़ा कल्चर, अब AI को बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड बना रहे युवा; इंसानों से दूरी कितना खतरनाक?
[ad_1]
नई दिल्ली:
आज के बदले हुए दौर में मोहब्बत के लिए किसी मैं और तुम की ज़रूरत नहीं रह गई है. इन दिनों युवा चैट बॉक्स में गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड तलाशते नजर आ रहे हैं. अपने देश में भी इसका चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है. कई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियां ऐसे कंपेनियन ऐप्स बना रही हैं, जिनमें आप अपना पार्टनर खोज सकते हैं. ये ऐप आपको बिल्कुल इमोशनल टच के साथ फ्रेंडशिप मुहैया कराते हैं. कैरेक्टर AI ऐसा ही एक ऐप है. इसे इस साल 1.9 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है. पार्टनर खोजने के इस बिजनेस में कैरेक्टर AI, टॉकी AI और रेप्लिका ने मिलाकर 9 करोड़ डॉलर की कमाई कर ली है.
दिलचस्प ये है कि ऐसे ऐप्स में सबसे ज़्यादा दिलचस्पी भारत में दिख रही है. इस साल इस तरफ के ऐप सबसे ज़्यादा करीब 21% भारत में ही डाउनलोड हुए हैं. यानी इन्हें भारत में 46 करोड़ बार डाउनलोड किया गया है. सवाल है कि क्या इमोशनल टॉक्स किसी ऐसी मशीन से की जा सकती है, जिसकी कोई धड़कन नहीं होती. क्या वाकई मशीन के साथ आप अपनी दिल की बाद, हर जज्बात और हम ख्वाहिश शेयर कर सकते हैं? क्या हमारे युवा अकेलेपन के इस कदर शिकार हो रहे हैं, जो मशीनों में मोहब्बत खोजने लगे हैं. AI पार्टनर समाज के लिए कितना बड़ा खतरा हैं?

पहले जान लीजिए क्या है AI?
AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस. यह दो शब्दों ‘आर्टिफिशियल’ और ‘इंटेलिजेंस’ से बना है. इसका अर्थ है- ‘मानव निर्मित सोच शक्ति.’ इसलिए हम ये कह सकते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसका इस्तेमाल करके हम ऐसे बुद्धिमान सिस्टम बना सकते हैं, जो मानव बुद्धिमत्ता को फॉलो कर सके. वहीं, मशीन लर्निंग डेटा से ज्ञान निकालने के बारे में है. इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जो मशीनों को स्पष्ट रूप से प्रोग्राम किए बिना पिछले डेटा या अनुभवों से सीखने में सक्षम बनाता है.
कंपेनियन ऐप्स कैसे करते हैं काम
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपेनियन ऐप्स ऐसे युवाओं को लिए एक पर्सनल असिस्टेंट के रूप में काम करते हैं, जो यूजर्स को उनके डेली लाइफ की मुश्किलों में भी मदद करते हैं.
1. नेचरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP): AI कंपेनियन ऐप्स नेचरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके यूजर्स की बातचीत को समझते हैं. उसके अनुसार रिस्पॉन्स करते हैं.
2. मशीन लर्निंग: AI कंपेनियन ऐप्स मशीन लर्निंग अल्गोरिदम का इस्तेमाल करके यूजर्स की आदतों और पसंदों को सीखते हैं. उसके अनुसार पर्सनल एडवाइस देते हैं.
3. डेटा एनालिटिक्स: AI कंपेनियन ऐप्स यूजर्स के डेटा का एनालिसिस करके उनकी जरूरतों और पसंदों को समझते हैं. उसके अनुसार सर्विस देते हैं.
4. वॉइस असिस्टेंट: AI कंपेनियन ऐप्स वॉइस असिस्टेंट की सुविधा देते हैं, जो यूजर्स को वॉइस कमांड के जरिए अपने काम को कंट्रोल करने की परमिशन देता है.
कितने टाइप के कंपैनियन ऐप्स?
Laura : लौरा AI ऐप्स पर आप वैसे बात कर सकते हैं, जैसे किसी लड़की या गर्लफ्रेंड से करते हैं. ये आपके सवालों का जवाब दे सकती है. लौरा रूसी, स्पेनिश और फ्रेंच समेत कई भाषाओं में बात कर सकती है. आप गूगल पर Laura AI कीवर्ड के साथ इसे सर्च कर सकते हैं.

My Virtual Manga Girl : इस ऐप में आप अपनी गर्लफ्रेंड के बाल, आंखें, कपड़े और बैकग्राउंड को बदल सकते हैं. इसमें मौजूद वर्चुअल वुमन डांस और सिंगिंग भी कर लेती है. 3डी एनिमेशन से इसे घुमाया भी जा सकता है.
Smart Virtual Girlfriend : यह वर्चुअल गर्लफ्रेंड काफी चालाक है. इससे बात करके लगता है कि आप किसी समझदार लड़की से बात कर रहे हैं.
My Virtual Girlfriend Julie : जूली एक वास्तविक लड़की की तरह गुस्से, प्यार समेत कई भावनाओं को जाहिर कर सकती है. इससे लगता है कि कोई असल लड़की से बातचीत हो रही है.
Replika: यह एक AI चैटबॉट है. कई लोगों ने रेप्लिका के साथ प्यार में पड़ने का दावा किया है. आप रेप्लिका से दोस्त, भाई या पार्टनर अपनी पसंद का रिश्ता बना सकते हैं. रेप्लिका को दुनियाभर में लाखों लोगों ने डाउनलोड किया है.
My Virtual Boyfriend Free : यह एक मजेदार और फ्लर्टी वर्चुअल बॉयफ्रेंड ऐप है. इस ऐप में लड़कियां अपनी पसंद का बॉयफ्रेंड बना सकती हैं. आप ऐप में अपने वर्चुअल बॉयफ्रेंड से बात कर सकते हैं. उसे गुस्से में चार बातें भी सुना सकते हैं. उसे सरप्राइज भी कर सकते हैं.
Anima : यह एक AI बॉयफ्रेंड है. इससे बात करने पर लगता है कि इसमें इमोशन हैं.
My Virtual Boyfriend Talk : यह ऐप 2023 के सबसे अच्छे वर्चुअल बॉयफ्रेंड ऐप में से एक रही है. इससे आप अपने वर्चुअल बॉयफ्रेंड की तरह बात कर सकते हैं.
Smart Virtual Boyfriend : यह ऐप आपको इंटेलीजेंट वर्चुअल लड़के के साथ चैट करने की परमिशन देती है. यह वर्चुअल बॉयफ्रेंड ऐप है.
Talky.AI: यह एक ट्रेंडिंग AI प्लेटफ़ॉर्म है, जहां यूजर्स वर्चुअल कैरेक्टर से बात कर सकते हैं. आप इसमें अपना कस्टाइमस बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड भी बना सकते हैं.
कैरेक्टर AI: यह एक चैटबॉट सर्विस है, जिसके ज़रिए आप वास्तविक या काल्पनिक पात्रों से बातचीत कर सकते हैं.
यह एक AI चैटबॉट वेब ऐप है. इसमें आपको मानव जैसी बातचीत करने का अनुभव मिलता है. इस ऐप में आप अपने कैरेक्टर को कोई नाम दे सकते हैं. कोई चेहरा दे सकते हैं. कैरेक्टर AI को पूर्व-Google AI डेवलपर नोम शेज़ीर और डैनियल डी फ़्रीटास ने डेवलप किया था. इसे सितंबर 2022 में लॉन्च किया गया था.
AI कंपेनियन ऐप्स के फायदे
1. व्यक्तिगत सिफारिशें
2. कामों का ऑटोमेशन
3. समय की बचत
4. सुविधा और आराम
Explainer : AI कितना खतरनाक? क्या इंसान की बनाई मशीन उसी पर हो सकती हावी
AI कंपेनियन ऐप्स के नुकसान
AI गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड के समाज पर कई प्रकार के प्रभाव हो सकते हैं, जिनमें से कुछ खतरनाक भी हो सकते हैं. यहां कुछ संभावित खतरे हैं:

1. सामाजिक अलगाव: AI गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड के साथ बातचीत करने से लोग वास्तविक सामाजिक संपर्कों से दूर हो सकते हैं, जिससे सामाजिक अलगाव और अकेलापन बढ़ सकता है.
2. मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: AI गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड के साथ बातचीत करने से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. जैसे-अवसाद, चिंता और आत्म-सम्मान की कमी.
3. वास्तविक संबंधों पर प्रभाव: AI गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड के साथ बातचीत करने से लोगों को वास्तविक संबंधों में समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि संचार की कमी, विश्वास की कमी और भावनात्मक दूरी.
4. नैतिक समस्याएं: AI गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड के साथ बातचीत करने से नैतिक समस्याएं हो सकती हैं.
5. सुरक्षा और गोपनीयता समस्याएं: AI गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड के साथ बातचीत करने से सुरक्षा और गोपनीयता समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि डेटा की चोरी या AI के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग.
G20 Summit: हाथ मिलाया, लगे गले, फ्यूचर की प्लानिंग को लेकर जानें मोदी-मैक्रों के बीच हुई क्या बात
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
सोशियोलॉजिस्ट डॉ. रानी टोकस कहती हैं, “AI के जरिए हमें क्यों पार्टनर की जरूरत पड़ रही है… ये सीधे तौर पर एक सामाजिक बदलाव की तरफ इशारा करती है. ये बदलाव बहुत पहले से हो रहा है. आए दिन हम मीडिया और दूसरे प्लेटफॉर्म पर युवा से जुड़े ऐसे कई मामले सुनते हैं, जिसे लेकर चिंता बढ़ जाती है. चाहे हो यूथ में गेमिंग को लेकर एडिक्शन हो, या पार्टनर से जुड़ाव को लेकर. सवाल उठता है कि आखिर युवाओं को ऐसी कौन सी कमी महसूस हो रही है, जो वो AI में अपना पार्टनर तलाश रहे हैं. जवाब है- अकेलापन और दूसरों पर भरोसे की कमी.”
रानी टोकस बताती हैं, “अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए आईटी लवर युवा टेक्नोलॉजी और AI का सहारा लेते हैं. वो अपने अकेलेपन की दवाई AI ऐप में तलाशते हैं. अगर कोई इमोशनल गैप या ब्रेकडाउन किसी फैमिली में है, तो जाहिर तौर पर वो रिलेशनशिप में दिखेगा ही. इन जटिलताओं से बचने के लिए ऐसे युवा किसी से इमोशनल रिश्ता नहीं बनाते, बल्कि मशीनों पर भरोसा करने लगते हैं. जाहिर तौर पर ये समाज के लिए हमारे सामाजिक स्ट्रक्चर के लिए खतरे की घंटी ही है.”
94% भारतीय फर्म कम से कम एक काम में करती हैं Gen AI का इस्तेमाल : रिपोर्ट
AI के इस्तेमाल में बरतें सावधानियां
-AI कोई इंसान नहीं है. ये एक मशीन है. इसलिए इसके आउटपुट या रिजल्ट पर भरोसा करने से पहले उन्हें खुद भी जांच लें. आप मान लीजिए कि AI गलती कर सकता है.
– AI टूल्स को अपनी निजी जानकारियां जैसे पासवर्ड, बैंक डिटेल्स, प्राइवेट फोटो देने से बचें. सेंसेटिव डेटा लीक होने पर आपको नुकसान पहुंचने की गुंजाइश है.
-AI का इस्तेमाल किसी को नुकसान पहुंचाने या किसी को फ्रॉड करने के लिए न करें.
[ad_2]
Source link
Share this content:
Blog
न्यायाधीशों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
[ad_1]

नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि न्यायाधीशों को एक संन्यासी की तरह जीवन जीना चाहिए और घोड़े की तरह काम करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और निर्णयों के बारे में कोई राय व्यक्त नहीं करनी चाहिए. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह मौखिक टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट की यह पीठ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दो महिला न्यायिक अधिकारियों की बर्खास्तगी से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी.
कोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका में दिखावटीपन के लिए कोई जगह नहीं है. पीठ ने कहा, ‘‘न्यायिक अधिकारियों को फेसबुक का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. उन्हें निर्णयों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कल यदि निर्णय का हवाला दिया जाएगा, तो न्यायाधीश पहले ही किसी न किसी रूप में अपनी बात कह चुके होंगे.”
पीठ ने कहा, ‘‘यह एक खुला मंच है…आपको एक संत की तरह जीवन जीना होगा, पूरी मेहनत से काम करना होगा. न्यायिक अधिकारियों को बहुत सारे त्याग करने पड़ते हैं. उन्हें फेसबुक का बिल्कुल प्रयोग नहीं करना चाहिए.”
बर्खास्त महिला न्यायाधीशों में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने पीठ के विचारों को दोहराते हुए कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी या न्यायाधीश को न्यायिक कार्य से संबंधित कोई भी पोस्ट फेसबुक पर नहीं डालनी चाहिए.
यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, जो न्यायमित्र हैं, द्वारा बर्खास्त महिला न्यायाधीश के खिलाफ विभिन्न शिकायतों के बारे में पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद आई. अग्रवाल ने पीठ को बताया कि महिला न्यायाधीश ने फेसबुक पर भी एक पोस्ट डाली थी.
ग्यारह नवंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने कथित असंतोषजनक प्रदर्शन के कारण राज्य सरकार द्वारा छह महिला सिविल न्यायाधीशों की बर्खास्तगी का स्वत: संज्ञान लिया था. हालांकि, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्ण अदालत ने एक अगस्त को अपने पहले के प्रस्तावों पर पुनर्विचार किया और चार अधिकारियों ज्योति वरकड़े, सुश्री सोनाक्षी जोशी, सुश्री प्रिया शर्मा और रचना अतुलकर जोशी को कुछ शर्तों के साथ बहाल करने का फैसला किया, जबकि अन्य दो अदिति कुमार शर्मा और सरिता चौधरी को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया.
शीर्ष अदालत उन न्यायाधीशों के मामलों पर विचार कर रही थी, जो क्रमशः 2018 और 2017 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे.
(इनपुट एजेंसियों से भी)
यह भी पढ़ें –
इलाहाबाद HC के जज ने ऐसा क्या कहा? उठी महाभियोग की मांग; जानिए पूरा मामला
महाभियोग से कैसे हटाए जाते हैं सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज, अब तक कितने प्रयास हुए हैं सफल
[ad_2]
Source link
Share this content:
Blog
अनुकूल नीतियों, कारोबारी सुगमता से बिहार अब निवेश का आकर्षक स्थल
[ad_1]

पटना:
विकास के लिहाज से पिछड़े राज्यों में आने वाले बिहार की तस्वीर अब बदल रही है. राज्य अब अनूकूल नीतियों तथा कारोबारी सुगमता की वजह से निवेश का आकर्षक स्थल बन रहा है. अदाणी समूह से लेकर कोका-कोला तक ने यहां अरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएं की हैं. निवेश के लिए और भी कंपनियां यहां आने वाली हैं.
राज्य के उद्योग और पर्यटन मंत्री नीतीश मिश्रा बिहार को एक ऐसे राज्य में बदल रहे हैं, जो पूर्वी भारत में निवेशकों के लिए प्रवेश द्वार बन सकता है. उनका कहना है, बिहार की औद्योगिक क्षमता असीमित है. बिहार धारणा का शिकार रहा है. लेकिन अब यह बदल रहा है.
मिश्रा ने कहा कि राज्य निवेशकों को ब्याज छूट से लेकर राज्य जीएसटी की वापसी, स्टाम्प शुल्क छूट, निर्यात सब्सिडी और परिवहन, बिजली तथा भूमि शुल्क के लिए रियायतें प्रदान कर रहा है.
साथ ही न केवल अनुमोदन के समय बल्कि प्रोत्साहनों के वितरण में भी एकल खिड़की व्यवस्था के तहत मंजूरी दी जा रही है. उन्होंने कहा, ‘‘किसी को सचिवालय आने की जरूरत नहीं है. किसी को सरकारी कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। हम जो भी वादा कर रहे हैं, उसे पूरा कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि बिहार राज्य भर के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित पूरी तरह से तैयार लगभग 24 लाख वर्ग फुट औद्योगिक ‘शेड’ की पेशकश कर रहा है. उसमें सभी प्रकार का बुनियादी ढांचा उपलब्ध है. यह जगह किसी भी उद्योग के लिए निर्धारित दर पर उपलब्ध है. राज्य ने उद्योग स्थापित करने के लिए 3,000 एकड़ का भूमि बैंक भी बनाया है.
उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था की समस्या का समाधान किया गया है. साथ ही कोलकाता और हल्दिया में बंदरगाहों के साथ-साथ झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों में कच्चे माल के स्रोतों और खनिज भंडार तक पहुंचने के लिए बुनियादी ढांचे के साथ लगभग चौबीसों घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है.
बिहार सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण, आईटी और आईटी-संबद्ध सेवाओं (आईटीईएस), कपड़ा और चमड़ा क्षेत्रों को उच्च प्राथमिकता के रूप में रखा है. उनमें से प्रत्येक में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग नीतियां हैं. इसके अलावा, सरकार एथनॉल और बायोगैस जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर भी बड़ा काम कर रही है.
मिश्रा ने कहा कि बिहार में बदलाव का श्रेय केंद्र और राज्य के मिलकर काम करने को जाता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली प्रगतिशील विचारधारा वाली केंद्र सरकार के साथ, क्षेत्रीय असंतुलन अब बीते दिनों की बात है. अब हर राज्य के पास मौका है.
मिश्रा ने कहा कि बिहार ने पिछले दो दशक में इस अवसर का लाभ उठाया है. एक राज्य जो लगातार कम वृद्धि दर के लिए जाना जाता था, अब राष्ट्रीय औसत से बेहतर वृद्धि दर हासिल कर रहा है.
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी नीति अच्छी है और सौभाग्य से बिहार में हमारा नेतृत्व इतना अच्छा रहा है कि इन 19 साल में हमने बहुत अच्छा बुनियादी ढांचा बनाया है. सही मायने में बिहार निवेशकों के लिए तैयार है.”
बिहार की स्थिति विशिष्ट है. पूर्वी और उत्तरी भारत और नेपाल के विशाल बाजारों से निकटता के कारण बिहार को स्थान-विशेष का लाभ प्राप्त है. मूल रूप से कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले राज्य के पास एक बड़ा कृषि और पशु उत्पादन आधार है. यह कृषि आधारित यानी खाद्य प्रसंस्करण, रेशम और चाय से लेकर चमड़े और गैर-धातु खनिजों तक कई उद्योगों के लिए कच्चे माल की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति करता है.
इसके अलावा, पानी की कोई समस्या नहीं है और पर्याप्त संख्या में सस्ता श्रम उपलब्ध है. मिश्रा ने कहा, ‘‘ये हमारी मुख्य ताकत है और आने वाले दिनों में, बिहार में भारत के पूरे पूर्वी हिस्से के लिए वृद्धि का प्रमुख इंजन बनने की क्षमता है. यह बिहार का समय है.”
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
[ad_2]
Source link
Share this content:
Blog
काल बना स्पीड ब्रेकर, हवा में उछली स्कूटर, सड़क पर घिसट गया शख्स… देखिए हैरान करने वाला VIDEO
[ad_1]

नई दिल्ली:
देहरादून में घंटाघर के सामने बिना चिन्ह वाले स्पीड ब्रेकर से टकराने के बाद एक स्कूटर सवार हवा में उछला और इसके बाद वह सड़क पर गिरा. वह और उसकी स्कूटर कई मीटर तक सड़क पर सरकती हुई आगे गई. गनीमत रही कि स्कूटर सवार को कोई गंभीर चोट नहीं लगी. स्पीड ब्रेकर पर ड्राइवरों को सचेत करने के लिए उनकी मार्किंग नहीं की गई है जिसके कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
NDTV को मिले घटनास्थल के फुटेज में स्कूटर मध्यम गति से स्पीड ब्रेकर की ओर बढ़ती हुई दिख रही है. जैसे ही स्कूटर सवार स्पीड ब्रेकर से टकराता है, स्कूटर अप्रत्याशित रूप से हवा में उछल जाता है. वाहन चालक उछलकर नीचे गिर जाता है. वह कुछ देर रुकने के बाद उठता है और वहां से चला जाता है.
स्पीड ब्रेकर वाहनों की गति को नियंत्रित रखने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन इनकी डिजाइन में दोषों के कारण यही स्पीड ब्रेकर कई दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं. देहरादून के इस स्पीड ब्रेकर की स्पष्ट मार्किंग नहीं की गई है. इसके अलावा यह अत्यधिक ऊंचा भी है. इससे चार पहियों वाले वाहनों के लिए इसे पार करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
उचित संकेतक और मार्किंग की कमी के कारण ड्राइवरों के लिए स्पीड ब्रेकर का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है. इससे यहां हादसे हो रहे हैं.
इस स्पीड ब्रेकर के कारण कथित तौर पर सात दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें तीन साल के एक बच्चे सहित दो लोग घायल हुए हैं.
स्पीड ब्रेकर के कारण हादसे का यह पहला मामला नहीं है. अक्टूबर में गुरुग्राम में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी. तब गोल्फ कोर्स रोड पर एक तेज रफ़्तार BMW कार नए बनाए गए स्पीड ब्रेकर पर से उछल गई थी.
कैमरे में कैद हुई इस घटना में कार जमीन से काफी ऊपर उछलती हुई दिखी थी. कार उस स्थान से करीब 15 फीट दूर जाकर गिरी थी. उसी वीडियो में दो ट्रक भी बिना किसी निशान वाले स्पीड ब्रेकर से टकराकर हवा में उछलते हुए देखे गए थे.
इस घटना को लेकर कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर हुई तीखी प्रतिक्रिया पर अधिकारियों ने कार्रवाई की थी. गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) ने ड्राइवरों को चेतावनी देने के लिए “आगे स्पीड ब्रेकर है” लिखा हुआ एक साइनबोर्ड लगवाया. उन्होंने स्पीड ब्रेकर की थर्मोप्लास्टिक व्हाइट पेंट से मार्किंग भी कराई थी. इस तरह पेंट करने से विशेष रूप से रात में स्पीड ब्रेकर साफ दिखाई देता है.
[ad_2]
Source link
Share this content:
-
NeurAgency8 months agoChatbot Bonanza: AI-Powered Fun in Customer Land
-
Blog1 year ago
सोमनाथ मंदिर के पास की विवादित जमीन पर रहेगा गुजरात सरकार का कब्जा, SC का अंतरिम आदेश से इनकार
-
Blog1 year ago
Gold Price Today: आज क्या है सोने-चांदी का रेट, खरीदारी से पहले फटाफट चेक कर लें 10 ग्राम सोने का ताजा भाव
-
Blog1 year ago
इजरायल-लेबनान में क्या आज होगा सीजफायर का ऐलान? रुक जाएगी 60 दिनों के लिए जंग
-
Blog1 year ago
सोशल मीडिया युवाओं के लिए हो रहा बेहद घातक, डिप्रेशन, ड्रग्स और आत्महत्या के शिकार हो रहे हैं भारतीय : शोध
-
Blog1 year ago
महाभारत से लेकर चंद्रकांता तक, 90 के दशक के ये 15 सीरियल अब आए ओटीटी पर, देखते ही याद आ जाएगा बचपन
-
Blog1 year ago
अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की 49 साल पुरानी फोटो वायरल, जब शोले के सेट पर स्क्रिप्ट पढ़ते हुए आए थे दो सुपरस्टार्स
-
Blog1 year ago
Khan Sir Latest News: पटना में प्रदर्शन के बाद बिगड़ी खान सर की तबीयत, अस्पताल में कराया गया भर्ती | Khan Sir Latest News | Khan Sir health update | khan sir health news
