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‘प्रोडक्शन हाउस ऑफ…’: अखिलेश यादव के PDA के नारे की योगी आदित्यनाथ ने गढ़ी नई मीनिंग

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aolallao_yogi-akhilesh_625x300_05_August_24 'प्रोडक्शन हाउस ऑफ...': अखिलेश यादव के PDA के नारे की योगी आदित्यनाथ ने गढ़ी नई मीनिंग


नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश में PDA की लड़ाई अब नए राजनैतिक मोड़ पर आ गई है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस नारे की योगी आदित्यनाथ ने नई परिभाषा गढ़ दी है. उन्होंने कहा कि यह समाजवादी पार्टी का ‘प्रोडक्शन हाउस ऑफ दंगाई एंड अपराधी’ है. अखिलेश यादव बार-बार पीडीए (PDA) की राजनीति करने का दावा करते हैं. इसमें  ‘P’ का मतलब पिछड़ा , ‘D’ का मतलब दलित और ‘A’ का मतलब अल्पसंख्यक है. वे ‘A’ के लिए कभी-कभी आधी आबादी और अगड़ी जाति का भी जिक्र करते रहे हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीडीए की नई परिभाषा देते हुए इसे ‘प्रोडक्शन हाउस ऑफ दंगाई’ कहा है. उन्होंने इसमें ‘P’ के लिए प्रोडक्शन हाउस, ‘D’ के लिए दंगाई और ‘A’के लिए अपराधी शब्द का इस्तेमाल किया है.

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को सपा के ‘पीडीए’ के नारे की नई परिभाषा देते हुए इसे दंगाइयों और अपराधियों का ‘प्रोडक्शन हाउस’ कहा. उन्होंने कहा कि दुर्दांत अपराधी, माफिया और दुष्कर्मी पैदा करने वाले इस ‘प्रोडक्शन हाउस’ के ‘सीईओ’ अखिलेश यादव और ‘ट्रेनर’ शिवपाल यादव हैं.

अखिलेश यादव ने सन 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान पीडीए का नारा दिया था. पार्टी ने पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समूह के लिए इस नारे का इस्तेमाल इस साल लोकसभा चुनाव में भी किया था. लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के लिए यह फार्मूला हिट रहा. सपा ने इस चुनाव में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 37 सीटें जीती थीं. कटेंगे तो बंटेंगे के बाद इस नारे से बीजेपी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण में जुटी है. पार्टी का फोकस मुसलमानों के खिलाफ ओबीसी (OBC) और दलितों को एकजुट कर अपनी चुनावी नैया पार लगाने की है 

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योगी आदित्यनाथ ने अम्बेडकर नगर जिले की कटेहरी विधानसभा सीट पर 20 नवंबर को होने वाले उपचुनाव के सिलसिले में आयोजित एक रैली में कहा, ”सपा पीडीए की बात करती है… लेकिन आपको बता दें कि उनका पीडीए क्या है. यह दंगाइयों और अपराधियों का ‘प्रोडक्शन हाउस’ है. मैं आपको यह नई परिभाषा दे रहा हूं.”

सीईओ अखिलेश यादव और ट्रेनर शिवपाल यादव

योगी ने कहा कि, “यहां (प्रोडक्शन हाउस) हर दुर्दांत अपराधी, हर दुर्दांत माफिया, हर दुर्दांत दुष्कर्मी पैदा होता है. इसके सीईओ (मुख्य अधिशासी) अखिलेश यादव हैं. इनके ‘ट्रेनर’ (प्रशिक्षक) शिवपाल यादव हैं.” उन्होंने कहा, ”किसी भी बड़े अपराधी, माफिया या दंगाई को याद करें… वे सपा के प्रोडक्शन हाउस से निकले हैं.”

मुख्यमंत्री के इस बयान के कुछ घंटों बाद ही अखिलेश यादव ने योगी पर निशाना साधते हुए तंज किया कि किसान कह रहा है कि लगे हाथ डीएपी (डाई अमोनियम फास्फेट खाद) का भी फुल फॉर्म बता दीजिए जिससे शायद यह याद आ जाए कि खाद के लिए प्रदेश में किसानों की कतारें लगी हैं.

अखिलेश यादव ने ‘एक्‍स’ पर एक पोस्ट में कहा,” पीडीए कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा.” सपा प्रमुख ने इस पोस्‍ट में साधन सहकारी समिति पर कतार में लगे किसानों की तस्वीर भी साझा की.

सभी माफिया समाजवादी पार्टी के ‘प्रोडक्शन हाउस’ की उपज

प्रयागराज के फूलपुर विधानसभा क्षेत्र के कोटवा में एक चुनावी रैली में योगी आदित्यनाथ ने कहा, “उत्तर प्रदेश का कोई ऐसा अपराधी नहीं, कोई ऐसा माफिया नहीं जो समाजवादी पार्टी का शागिर्द (शिष्य) ना रहा हो.” उन्होंने आरोप लगाया, “चाहे प्रयागराज का अतीक अहमद रहा हो, गाजीपुर का मुख्तार अंसारी रहा हो, आम्बेडकर नगर का खान मुबारक रहा हो.. ये सभी के सभी समाजवादी पार्टी के ‘प्रोडक्शन हाउस’ की उपज थे. ये सभी अपराध के लिए समाजवादी पार्टी के ‘बिजनेस पार्टनर’ (कारोबारी साझेदार) थे.”

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मुख्यमंत्री ने सपा के समाजवाद पर प्रहार करते हुए कहा, “आजादी के बाद समाजवादी आंदोलन, मूल्यों और आदर्शों के लिए प्रारंभ हुआ था. जय प्रकाश नारायण, डॉक्टर राम मनोहर लोहिया, आचार्य नरेंद्र देव, चंद्रशेखर जी, जनेश्वर मिश्र जी, मोहन सिंह जी जैसे स्वनाम धन्य लोग इस आंदोलन से जुड़े थे.” उन्होंने कहा, “ये आज की समाजवादी पार्टी माफिया और अपराधियों का जमावड़ा भर रह गई है. इसीलिए प्रदेश में एक नारा निकल पड़ा है, देख ‘सपाई, बिटिया घबराई.’ यही अयोध्या में हुआ, यही कन्नौज में हुआ. यही लखनऊ में हुआ और यही हरदोई में इन लोगों (सपा) ने किया.”

उन्होंने कहा, “इसी तरह, राजू पाल की हत्या करने वाला व्यक्ति इसी समाजवादी पार्टी का ‘शागिर्द’ (शिष्य) बनकर प्रयागराज को बदनाम करता था. इसलिए मैं इस पार्टी को ‘प्रोडक्शन हाउस’ कहता हूं जहां दुर्दांत माफिया पैदा होते हैं, यहां से आगे बढ़ते हैं.. पनपते हैं. इन लोगों ने अच्छे-अच्छे ‘ट्रेनर’ वहां रखे हैं.”

वहीं अम्बेडकर नगर में मुख्यमंत्री ने कहा, ”जब ‘डबल इंजन’ की सरकार बनी और उन्होंने उसे अपना असली चेहरा दिखाया, तो उनके राम नाम सत्य में देर नहीं हुई.”

उत्तर प्रदेश की राजनीति में नारों की जंग जारी

यूपी की राजनीति में नारों की जंग जारी है. हर राउंड में योगी आदित्यनाथ कुछ नया लेकर आ जाते हैं. बस अब उनका लक्ष्य अर्जुन की तरह उपचुनाव जीत लेने का है. जो जीता वही सिकंदर. लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव सिकंदर बने थे. उनका पीडीए वाला दांव सुपर हिट रहा था. समाजवादी पार्टी देश में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई. 

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पीडीए के पीछे की राजनीति और उसका गणित क्या है? राजनीति का एक नियम है कि विरोधी के सबसे मजबूत पक्ष को तोड़ा जाए. यही कारण है कि योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ पर हमला बोला है. इसी पीडीए के दांव से समाजवादी पार्टी लोकसभा चुनाव में तीसरे नंबर की पार्टी बन गई. उसके 37 सांसद चुने गए और बीजेपी को यूपी में 29 सीटों का नुकसान हुआ. सीएम योगी ने पीडीए को मुस्लिम परस्त और पिछड़ा, दलित विरोधी बताया है. उन्होंने जानबूझकर बीएसपी विधायक राजू पाल की हत्या का जिक्र किया. 

चुनावी माहौल में एजेंडा योगी आदित्यनाथ सेट कर रहे

राजू पाल की हत्या का आरोप अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ पर लगा था. इसका मतलब मुसलमान बनाम पिछड़ा… योगी आदित्यनाथ इसी लड़ाई से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को कमजोर करना चाहते हैं. इसी कारण उन्होंने शनिवार को अलीगढ़ में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ( AMU) का मुद्दा उठाया था. बीजेपी की कोशिश अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बहाने मुसलमानों के खिलाफ दलितों और पिछड़ों को गोलंबद करने की है. 

इस बार के चुनावी माहौल में एजेंडा योगी आदित्यनाथ सेट कर रहे हैं. चाहे मामला महाराष्ट्र का हो या फिर झारखंड का. उन्होंने शुरुआत ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ से की थी. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव तक सभी विपक्षी नेता अब उसका जवाब ढूंढ रहे हैं. कुल मिलाकर सीएम योगी की कोशिश किसी न किसी बहाने विपक्ष के जाति वाले चक्रव्यूह को हिंदुत्व से तोड़ने की है. 

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न्यायाधीशों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

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mpojkr1k_court-generic-fourt-files-generic-files-in-court-pixabay_625x300_11_October_22 न्यायाधीशों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट


नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि न्यायाधीशों को एक संन्यासी की तरह जीवन जीना चाहिए और घोड़े की तरह काम करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और निर्णयों के बारे में कोई राय व्यक्त नहीं करनी चाहिए. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह मौखिक टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट की यह पीठ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दो महिला न्यायिक अधिकारियों की बर्खास्तगी से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी.

कोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका में दिखावटीपन के लिए कोई जगह नहीं है. पीठ ने कहा, ‘‘न्यायिक अधिकारियों को फेसबुक का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. उन्हें निर्णयों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कल यदि निर्णय का हवाला दिया जाएगा, तो न्यायाधीश पहले ही किसी न किसी रूप में अपनी बात कह चुके होंगे.”

पीठ ने कहा, ‘‘यह एक खुला मंच है…आपको एक संत की तरह जीवन जीना होगा, पूरी मेहनत से काम करना होगा. न्यायिक अधिकारियों को बहुत सारे त्याग करने पड़ते हैं. उन्हें फेसबुक का बिल्कुल प्रयोग नहीं करना चाहिए.”

बर्खास्त महिला न्यायाधीशों में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने पीठ के विचारों को दोहराते हुए कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी या न्यायाधीश को न्यायिक कार्य से संबंधित कोई भी पोस्ट फेसबुक पर नहीं डालनी चाहिए.

यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, जो न्यायमित्र हैं, द्वारा बर्खास्त महिला न्यायाधीश के खिलाफ विभिन्न शिकायतों के बारे में पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद आई. अग्रवाल ने पीठ को बताया कि महिला न्यायाधीश ने फेसबुक पर भी एक पोस्ट डाली थी.

ग्यारह नवंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने कथित असंतोषजनक प्रदर्शन के कारण राज्य सरकार द्वारा छह महिला सिविल न्यायाधीशों की बर्खास्तगी का स्वत: संज्ञान लिया था. हालांकि, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्ण अदालत ने एक अगस्त को अपने पहले के प्रस्तावों पर पुनर्विचार किया और चार अधिकारियों ज्योति वरकड़े, सुश्री सोनाक्षी जोशी, सुश्री प्रिया शर्मा और रचना अतुलकर जोशी को कुछ शर्तों के साथ बहाल करने का फैसला किया, जबकि अन्य दो अदिति कुमार शर्मा और सरिता चौधरी को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया.

शीर्ष अदालत उन न्यायाधीशों के मामलों पर विचार कर रही थी, जो क्रमशः 2018 और 2017 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे.
(इनपुट एजेंसियों से भी)

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अनुकूल नीतियों, कारोबारी सुगमता से बिहार अब निवेश का आकर्षक स्थल

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240lhlho_nitish-kumar_625x300_30_August_24 अनुकूल नीतियों, कारोबारी सुगमता से बिहार अब निवेश का आकर्षक स्थल


पटना:

 विकास के लिहाज से पिछड़े राज्यों में आने वाले बिहार की तस्वीर अब बदल रही है. राज्य अब अनूकूल नीतियों तथा कारोबारी सुगमता की वजह से निवेश का आकर्षक स्थल बन रहा है. अदाणी समूह से लेकर कोका-कोला तक ने यहां अरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएं की हैं. निवेश के लिए और भी कंपनियां यहां आने वाली हैं.

राज्य के उद्योग और पर्यटन मंत्री नीतीश मिश्रा बिहार को एक ऐसे राज्य में बदल रहे हैं, जो पूर्वी भारत में निवेशकों के लिए प्रवेश द्वार बन सकता है. उनका कहना है, बिहार की औद्योगिक क्षमता असीमित है. बिहार धारणा का शिकार रहा है. लेकिन अब यह बदल रहा है.

अदाणी समूह ने राज्य में 8,700 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है, जबकि अंबुजा सीमेंट्स 1,200 करोड़ रुपये की इकाई स्थापित कर रही है. कोका-कोला अपनी बोतलबंद क्षमता का विस्तार कर रही है.

मिश्रा ने कहा कि राज्य निवेशकों को ब्याज छूट से लेकर राज्य जीएसटी की वापसी, स्टाम्प शुल्क छूट, निर्यात सब्सिडी और परिवहन, बिजली तथा भूमि शुल्क के लिए रियायतें प्रदान कर रहा है.

साथ ही न केवल अनुमोदन के समय बल्कि प्रोत्साहनों के वितरण में भी एकल खिड़की व्यवस्था के तहत मंजूरी दी जा रही है. उन्होंने कहा, ‘‘किसी को सचिवालय आने की जरूरत नहीं है. किसी को सरकारी कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। हम जो भी वादा कर रहे हैं, उसे पूरा कर रहे हैं.”

उद्योग मंत्री ने कहा कि राजकोषीय प्रोत्साहनों का वितरण बिना किसी दरवाजे पर दस्तक दिए हर तिमाही में होता है. साथ ही किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए नियमित निगरानी की जाती है.

उन्होंने कहा कि बिहार राज्य भर के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित पूरी तरह से तैयार लगभग 24 लाख वर्ग फुट औद्योगिक ‘शेड’ की पेशकश कर रहा है. उसमें सभी प्रकार का बुनियादी ढांचा उपलब्ध है. यह जगह किसी भी उद्योग के लिए निर्धारित दर पर उपलब्ध है. राज्य ने उद्योग स्थापित करने के लिए 3,000 एकड़ का भूमि बैंक भी बनाया है.

उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था की समस्या का समाधान किया गया है. साथ ही कोलकाता और हल्दिया में बंदरगाहों के साथ-साथ झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों में कच्चे माल के स्रोतों और खनिज भंडार तक पहुंचने के लिए बुनियादी ढांचे के साथ लगभग चौबीसों घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है.

मिश्रा ने कहा कि राज्य में 19-20 दिसंबर को होने वाले ‘बिजनेस कनेक्ट’ 2024 निवेशक शिखर सम्मेलन के दूसरे संस्करण में बिहार की नीतियों और उपलब्धियों का रखा जाएगा. उल्लेखनीय है कि निवेशक सम्मेलन का पहला संस्करण काफी सफल रहा था. उसमें निवेशकों ने 35,000 करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धताएं जताई थीं.

बिहार सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण, आईटी और आईटी-संबद्ध सेवाओं (आईटीईएस), कपड़ा और चमड़ा क्षेत्रों को उच्च प्राथमिकता के रूप में रखा है. उनमें से प्रत्येक में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग नीतियां हैं. इसके अलावा, सरकार एथनॉल और बायोगैस जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर भी बड़ा काम कर रही है.

मिश्रा ने कहा कि बिहार में बदलाव का श्रेय केंद्र और राज्य के मिलकर काम करने को जाता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली प्रगतिशील विचारधारा वाली केंद्र सरकार के साथ, क्षेत्रीय असंतुलन अब बीते दिनों की बात है. अब हर राज्य के पास मौका है.

मिश्रा ने कहा कि बिहार ने पिछले दो दशक में इस अवसर का लाभ उठाया है. एक राज्य जो लगातार कम वृद्धि दर के लिए जाना जाता था, अब राष्ट्रीय औसत से बेहतर वृद्धि दर हासिल कर रहा है.

राज्य ने सड़कों और राजमार्गों से लेकर गोदामों और बड़े फूड पार्क, चमड़ा प्रसंस्करण केंद्र, एकीकृत विनिर्माण संकुल और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क तक बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का निर्माण किया है. यह अब दो विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) का निर्माण कर रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी नीति अच्छी है और सौभाग्य से बिहार में हमारा नेतृत्व इतना अच्छा रहा है कि इन 19 साल में हमने बहुत अच्छा बुनियादी ढांचा बनाया है. सही मायने में बिहार निवेशकों के लिए तैयार है.”

बिहार की स्थिति विशिष्ट है. पूर्वी और उत्तरी भारत और नेपाल के विशाल बाजारों से निकटता के कारण बिहार को स्थान-विशेष का लाभ प्राप्त है. मूल रूप से कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले राज्य के पास एक बड़ा कृषि और पशु उत्पादन आधार है. यह कृषि आधारित यानी खाद्य प्रसंस्करण, रेशम और चाय से लेकर चमड़े और गैर-धातु खनिजों तक कई उद्योगों के लिए कच्चे माल की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति करता है.

इसके अलावा, पानी की कोई समस्या नहीं है और पर्याप्त संख्या में सस्ता श्रम उपलब्ध है. मिश्रा ने कहा, ‘‘ये हमारी मुख्य ताकत है और आने वाले दिनों में, बिहार में भारत के पूरे पूर्वी हिस्से के लिए वृद्धि का प्रमुख इंजन बनने की क्षमता है. यह बिहार का समय है.”

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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काल बना स्पीड ब्रेकर, हवा में उछली स्कूटर, सड़क पर घिसट गया शख्स… देखिए हैरान करने वाला VIDEO

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नई दिल्ली:

देहरादून में घंटाघर के सामने बिना चिन्ह वाले स्पीड ब्रेकर से टकराने के बाद एक स्कूटर सवार हवा में उछला और इसके बाद वह सड़क पर गिरा. वह और उसकी स्कूटर कई मीटर तक सड़क पर सरकती हुई आगे गई. गनीमत रही कि स्कूटर सवार को कोई गंभीर चोट नहीं लगी. स्पीड ब्रेकर पर ड्राइवरों को सचेत करने के लिए उनकी मार्किंग नहीं की गई है जिसके कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

NDTV को मिले घटनास्थल के फुटेज में स्कूटर मध्यम गति से स्पीड ब्रेकर की ओर बढ़ती हुई दिख रही है. जैसे ही स्कूटर सवार स्पीड ब्रेकर से टकराता है, स्कूटर अप्रत्याशित रूप से हवा में उछल जाता है. वाहन चालक उछलकर नीचे गिर जाता है. वह कुछ देर रुकने के बाद उठता है और वहां से चला जाता है.

स्पीड ब्रेकर वाहनों की गति को नियंत्रित रखने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन इनकी डिजाइन में दोषों के कारण यही स्पीड ब्रेकर कई दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं. देहरादून के इस स्पीड ब्रेकर की स्पष्ट मार्किंग नहीं की गई है. इसके अलावा यह अत्यधिक ऊंचा भी है. इससे चार पहियों वाले वाहनों के लिए इसे पार करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

उचित संकेतक और मार्किंग की कमी के कारण ड्राइवरों के लिए स्पीड ब्रेकर का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है. इससे यहां हादसे हो रहे हैं.

इस स्पीड ब्रेकर के कारण कथित तौर पर सात दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें तीन साल के एक बच्चे सहित दो लोग घायल हुए हैं.

स्पीड ब्रेकर के कारण हादसे का यह पहला मामला नहीं है. अक्टूबर में गुरुग्राम में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी. तब गोल्फ कोर्स रोड पर एक तेज रफ़्तार BMW कार नए बनाए गए स्पीड ब्रेकर पर से उछल गई थी.

कैमरे में कैद हुई इस घटना में कार जमीन से काफी ऊपर उछलती हुई दिखी थी. कार उस स्थान से करीब 15 फीट दूर जाकर गिरी थी. उसी वीडियो में दो ट्रक भी बिना किसी निशान वाले स्पीड ब्रेकर से टकराकर हवा में उछलते हुए देखे गए थे.

इस घटना को लेकर कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर हुई तीखी प्रतिक्रिया पर अधिकारियों ने कार्रवाई की थी. गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) ने ड्राइवरों को चेतावनी देने के लिए “आगे स्पीड ब्रेकर है” लिखा हुआ एक साइनबोर्ड लगवाया. उन्होंने स्पीड ब्रेकर की थर्मोप्लास्टिक व्हाइट पेंट से मार्किंग भी कराई थी. इस तरह पेंट करने से विशेष रूप से रात में स्पीड ब्रेकर साफ दिखाई देता है.




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