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अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली यूं ही नहीं किया अकेले चुनाव लड़ने का फैसला, जरा पूरी पिक्चर समझिए
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नई दिल्ली:
अरविंद केजरीवाल ने रविवार को घोषणा की कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उनकी पार्टी कांग्रेस से गठबंधन नहीं करेगी. केजरीवाल दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं. इससे पहले लोकसभा चुनाव के लिए आप और कांग्रेस ने समझौता किया था. लेकिन यह समझौता बीजेपी को दिल्ली की सभी सात सीटें जीतने से नहीं रोक पाया था.आप दिल्ली में लगातार तीन बार से सरकार चला रही है.वहीं कांग्रेस पिछले दो चुनाव से शून्य पर सिमट गई है. लोगों को उम्मीद थी कि अगर दिल्ली के चुनाव में आप और कांग्रेस एक साथ आ जाएं तो हो सकता है कि कांग्रेस की स्थिति थोड़ी सुधर जाए. आइए यह समझने की कोशिश करते हैं कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का समझौता न होने से किस पर क्या असर पड़ेगा.
दिल्ली की राजनीति
दिल्ली विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं.आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेता लगातार समझौते की संभावना से इनकार कर रहे थे. केजरीवाल ने इस पर मुहर लगा दी है. तीन दिन पहले ही हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद भी दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा था कि उनकी पार्टी सभी 70 सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ेगी. उन्होंने लोकसभा चुनाव में हुए समझौते को गलती बताया था. उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी फिर यह ब्लंडर नहीं करेगी. वहीं आप के प्रवक्ताओं ने कहा था कि उनकी पार्टी अकेले ही बीजेपी और कांग्रेस ने निपटने में सक्षम है.

आम आदमी पार्टी अभी भी विपक्षी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है.
दिल्ली में पिछले तीन बार से आम आदमी पार्टी की सरकार चल रही है. बीजेपी ने लगातार अरविंद केजरीवाल की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. कथित शराब नीति घोटाले में सीएम और डिप्टी सीएम से लेकर आप के सांसद और कई नेताओं तक को जेल जाना पड़ा. वहीं उसके एक और मंत्री को भी भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की हवा खानी पड़ी. उसके कुछ विधायक भी ऐसे ही आरोपों में जेल में हैं. बीजेपी लगातार भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर सड़क पर रही है. इसी का दबाव रहा कि जेल से आने के बाद अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा.वहीं कांग्रेस इन सालों में केजरीवाल सरकार के खिलाफ सड़क पर नहीं आ पाई है. उसके नेता बयानबाजी तक ही सीमित रहे हैं. चुनाव नजदीक आता देख दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाना शुरू किया. इससे पहले उस वक्त कांग्रेस के साथ समझौता कर लिया था, जब अरविंद केजरीवाल की पार्टी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे थे. यह वही आप थी, जिसने भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर कांग्रेस को अर्श से फर्श पर ला दिया था.
दिल्ली में लोकसभा और विधानसभा का चुनाव
वरिष्ठ पत्रकार मनोज मिश्र दिल्ली की राजनीति को पिछले कई दशक से देख-समझ रहे हैं. वो कहते हैं कि दिल्ली का वोटर लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अलग-अलग वोट करता है. इस ट्रेंड को पिछले कई चुनावों से देखा जा रहा है. दिल्ली की जनता पिछले तीन बार से दिल्ली की सभी लोकसभा सीटें बीजेपी को दे रही है.वहीं वह विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को लगातार मजबूत कर रही है.वो कहते हैं कि आप के मजबूत होने से कांग्रेस लगातार कमजोर होती चली गई.

अरविंद केजरीवाल के साथ सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया को भी भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.
साल 2012 में स्थापना के बाद आम आदमी पार्टी ने 2013 का विधानसभा चुनाव लड़ा था. उस समय दिल्ली में शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी. भ्रष्टाचार विरोध के नारे के साथ राजनीति में शामिल हुई आप ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया. जनता ने आप को हाथों हाथ लिया. अपने पहले ही चुनाव में आप ने 29.64 फीसदी वोट के साथ 28 सीटें जीत ली थीं. वहीं दिल्ली में तीन बार से सरकार चला रही कांग्रेस 24.67 फीसदी वोट के साथ केवल आठ सीटों पर सिमट गई थी. ही जीत पाई थी. वहीं बीजेपी ने 34.12 फीसदी वोट के साथ 31 सीटें जीतीं.इस चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला. बाद में कांग्रेस ने बिना शर्त समर्थन देकर आप की सरकार बनवाई. लेकिन यह सरकार बहुत अधिक दिन नहीं चल पाई. साल 2015 में फिर से चुनाव कराना पड़ा.
दिल्ली में आप की प्रचंड आंधी
साल 2015 के चुनाव में आप ने शानदार प्रदर्शन किया. आप ने दिल्ली की 70 में से 67 सीटों पर कब्जा जमाया. वहीं 2013 में 31 सीटों जीतने वाली बीजेपी तीन सीटों पर समझ गई. वहीं आठ सीटें जीतने वाली शून्य पर सिमट गई. इन दोनों दलों को न केवल सीटों बल्कि वोटों का नुकसान उठाना पड़ा. बीजेपी 34.12 फीसदी से घटकार 32.78 पर रह गई. वहीं कांग्रेस 24.67 फीसदी वोटों से घटकर 9.70 फीसदी पर आ गई. वहीं आप के वोटों में झप्पर फाड कर इजाफा हुआ. उसका वोट 2013 की तुलना में 29.64 फीसदी से बढ़कर 54.59 फीसदी हो गया. यह आप का अबतक का सबसे शानदार प्रदर्शन था.

अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने अपने पहले चुनाव में 28 सीटें जीत ली थीं.
वहीं 2020 के चुनाव में भी कोई बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ. बीजेपी ने 2015 की तुलना में अपना वोट बढ़ाते हुए 32.78 फीसदी से 40.57 फीसदी कर लिया. लेकिन करीब आठ फीसदी वोट बढ़ने के बाद उसकी सीटें केवल पांच ही बढ़ीं. बीजेपी ने 2015 में तीन सीटें जीती थीं, उसे 2020 में आठ सीटें मिलीं. वहीं कांग्रेस के वोटों का गिरना जारी रहा. साल 2015 में 9.70 फीसदी वोट लाने वाली कांग्रेस का वोट घटकर 4.63 फीसदी रह गया. वहीं आप का प्रदर्शन थोड़ा खराब तो हुआ. लेकिन ऐसा नहीं था कि जिसे शानदार प्रदर्शन न कहा जाए. आप ने 2015 में 54.59 फीसदी वोटों के साथ 67 सीटें जीतने वाली आप इस चुनाव में 53.57 फीसदी वोटों के साथ 62 सीटें जीतनें में कामयाब रही. उसे पांच सीटों और 1.02 फीसदी वोटों का नुकसान उठाना पड़ा.
दिल्ली में कौन बनाता है सरकार
दिल्ली के चुनावों के इस ट्रेंड पर मनोज मिश्र कहते हैं कि दिल्ली में जो दल वोटों का विभाजन करा पाने में कामयाब होता है, उसे सत्ता मिलती है.इसका उदाहरण देते हुए 1993 के चुनाव का जिक्र करते हैं, जब दिल्ली में अंतिम बार बीजेपी की सरकार बनी थी. उस चुनाव में बीजेपी को 42.82 फीसदी वोट के साथ 49 सीटें मिली थीं.वहीं कांग्रेस को 34.48 फीसदी वोट और 14 सीटें मिली थीं.वह चुनाव जनता दल ने भी लड़ा था. उसे चार सीटें और 12.65 फीसदी वोट मिले थे.वोटों का बंटवारा या त्रिकोणीय मुकाबला होने का फायदा बीजेपी को मिला और वह सरकार बनाने में कामयाब रही.इसी ट्रेंड को हम पिछले तीन विधानसभा चुनाव में भी देख सकते हैं.

दिल्ली में न्याय यात्रा निकालते कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव और अन्य नेता.
मनोज मिश्र कहते हैं कि दिल्ली तीन तरफ से हरियाणा से घिरी हुई है.पिछले दिनों हुए हरियाणा के चुनाव में कांग्रेस वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई, जिसकी उम्मीद की जा रही थी.मिश्र कहते हैं कि इससे आप ने अनुमान लगाया होगा कि अगर कांग्रेस की हरियाणा में सरकार होती तो, उसे उसका फायदा दिल्ली में मिलता. लेकिन ऐसा न होने की वजह से अब कांग्रेस को कोई फायदा मिलने की उम्मीद नहीं है.इससे आप को कांग्रेस से गठबंधन का कोई फायदा नजर नहीं आया होगा. इसलिए उसने अकेले ही चुनाव लड़ने का फैसला किया है.
दिल्ली में कांग्रेस का भविष्य
मिश्र एक और बात की ओर इशारा करते हैं.वो कहते हैं कि अगर कांग्रेस और आप में समझौता हो जाता तो हो सकता है कि कांग्रेस को कुछ सीटें मिल जाती है. इससे कांग्रेस के लिए दिल्ली में स्पेश मिल जाता है, जहां वह शून्य पर है.लेकिन कांग्रेस के मजबूत होने का नुकसान आप को ही उठाना पड़ता.इसलिए भविष्य में होने वाले किसी नुकसान या मिलने वाली चुनौती से बचने के लिए ही आप ने कांग्रेस से समझौता न करने को बेहतर समझा है.

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होते बीजेपी के नेता.
मिश्र कहते हैं कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए 45 फीसद से अधिक वोट लाना जरूरी है. उनकी यह बात पिछले तीन चुनावों में नजर भी आती है. दिल्ली में वोट तीन हिस्सों में बंट जाने की वजह से 2013 के चुनाव में किसी पार्टी को साफ बहुमत नहीं मिला था.आप ने 2015 और 2020 के चुनाव में 50 फीसदी से अधिक वोट लाकर प्रचंड बहुमत से अपनी सरकार बनाई थी.इस बार की संभावना के सवाल पर मिश्र कहते हैं कि बीजेपी अभी भी आप के वोट बैंक में सेंध नहीं लगा पाई है. दिल्ली का मध्य वर्ग,झुग्गी झोपड़ी, पूर्वांचली, मुसलमान जैसे वोट बैंक अभी भी उसके साथ बना हुआ है. वो कहते हैं कि बीजेपी अपना वोट बैंक बढ़ा भी नहीं पाई है. ऐसे में वह 30-35 फीसदी वोट तो जरूर ले लेंगी. लेकिन केवल उतने से सरकार बन जाए, उसमें संदेह है.कांग्रेस के संभावना के सवाल पर मिश्र कहते हैं कि कांग्रेस अभी नेतृ्त्व के संकट से गुजर रही है.उसके पास जमीनी नेताओं की कमी है. उसके कई बड़े नेता पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में जा चुके हैं.ऐसे में इस चुनाव में भी कांग्रेस के लिए बहुत कुछ नजर नहीं आ रहा है.
ये भी पढ़ें: IAS एग्जाम में फेल और मां ने घर से निकाला… जानिए बचपन से AAP तक अवध ओझा सर की पूरी कहानी
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पायल कपाड़िया ने रचा इतिहास, गोल्डन ग्लोब्स में हासिल किया नामांकन
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नई दिल्ली:
भारत की मशहूर निर्देशन पायल कपाड़िया ने इतिहास रच डाला है. उनकी फिल्म ऑल वी इमेजिन एज लाइट को गोल्डन ग्लोब्स के सर्वश्रेष्ठ निर्देशक में नामांकन मिला है. पायल कपाड़िया के लिए गोल्डन ग्लोब्स में नामांकन हासिल करना दूसरी बड़ी कामयाबी है. इससे पहले उन्होंने फिल्म ऑल वी इमेजिन एज लाइट में इस साल के कान फिल्म महोत्सव बेस्ट डायरेक्टर और फिल्म की एक्ट्रेस अनसूया सेनगुप्ता को बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब हासिल किया था. पायल कपाड़िया को ऑल वी इमेजिन एज लाइट के लिए 77वें कान फिल्म फेस्टिवल में ग्रां प्री जीता था.
मलयालम-हिंदी फीचर फिल्म ऑल वी इमेजिन एज लाइट की कहानी मुंबई की तीन महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सड़क मार्ग से तटीय शहर की एक यात्रा पर जाती हैं. फिल्म में कानी कुश्रुति, दिव्या प्रभा और छाया कदम ने मुख्य भूमिका निभाई है.
2024 गोल्डन ग्लोब्स पुरस्कार के नामांकनों की घोषणा
2024 गोल्डन ग्लोब्स पुरस्कार के लिए नामांकनों की सूची जारी कर दी गई है. इस साल कई शानदार फिल्में और टेलीविजन सीरीज़ इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए दौड़ में हैं.
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – टेलीविजन श्रृंखला (ड्रामा):
– डोनाल्ड ग्लोवर, Mr. and Mrs. Smith
– जैक गिलेनहाल, Presumed Innocent
– गैरी ओल्डमैन, Slow Horses
– एडी रेडमायने, The Day of the Jackal
– हिरोयुकी सनाडा, Shogun
– बिली बॉब थॉर्नटन, Landman
सर्वश्रेष्ठ मूल संगीत – मोशन पिक्चर:
– वोल्कर बर्टलमैन, Conclave
– डैनियल ब्लमबर्ग, The Brutalist
– क्रिस बॉवर्स, The Wild Robot
– क्लेमेंट ड्युकोल, Camille, Emilia Perez
– ट्रेंट रेज़नोर और एटिकस रॉस, Challengers
– हंस ज़िमर, Dune: Part Two
सर्वश्रेष्ठ सीमित श्रृंखला, एंथोलॉजी श्रृंखला या मोशन पिक्चर – टेलीविजन:
– Baby Reindeer
– Disclaimer
– Monsters: The Lyle and Erik Menendez Story
– The Penguin
– Ripley
– True Detective: Night Country
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – टेलीविजन श्रृंखला (कॉमेडी या म्यूजिकल):
– क्रिस्टन बेल, Nobody Wants This
– क्विंटा ब्रुन्सन, Abbott Elementary
– आयो एडेबिरी, The Bear
– सेलेना गोमेज़, Only Murders in the Building
– कैथरीन हान, Agatha All Along
– जीन स्मार्ट, Hacks
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – टेलीविजन श्रृंखला (कॉमेडी या म्यूजिकल):
– एडम ब्रोडी, Nobody Wants This
– टेड डैन्सन, A Man on the Inside
– स्टीव मार्टिन, Only Murders in the Building
– जेसन सीगल, Shrinking
– मार्टिन शॉर्ट, Only Murders in the Building
– जेरेमी एलन व्हाइट, The Bear
सर्वश्रेष्ठ मूल गीत – मोशन पिक्चर:
– Beautiful That Way, The Last Showgirl, संगीत और गीत: माइलि साइरस, लिक्का ली, एंड्रयू वायट
– Compress/Repress, Challengers, संगीत और गीत: ट्रेंट रेज़नोर, एटिकस रॉस और लुका ग्वाडागिनो
– El Mal, Emilia Perez, संगीत और गीत: क्लेमेंट ड्युकोल, कैमेल और जैक्स ऑडियार
– Forbidden Road, Better Man, संगीत और गीत: रॉबी विलियम्स, फ्रेडी वेक्सलर और साचा स्कारबेक
– Kiss The Sky, The Wild Robot, संगीत और गीत: डेलैसी, जॉर्डन जॉनसन, स्टीफन जॉनसन, मारेन मोरिस, माइकल पोलैक और अली टेम्पोसी
– Mi Camino, Emilia Perez, संगीत और गीत: क्लेमेंट ड्युकोल और कैमेल
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – सीमित श्रृंखला, एंथोलॉजी श्रृंखला या मोशन पिक्चर – टेलीविजन:
– केट ब्लैंचेट, Disclaimer
– जोडी फोस्टर, True Detective: Night Country
– क्रिस्टिन मिलियोटी, The Penguin
– सोफिया वर्गारा, Griselda
– नाओमी वॉट्स, Feud: Capote vs. The Swans
– केट विंसलेट, The Regime
सर्वश्रेष्ठ मोशन पिक्चर – एनिमेटेड:
– Flow
– Inside Out 2
– Memoir of a Snail
– Moana 2
– Wallace & Gromit: Vengeance Most Fowl
– The Wild Robot
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – सहायक भूमिका – मोशन पिक्चर:
– एरियाना ग्रांडे, Wicked
– सेलेना गोमेज़, Emilia Perez
– फेलिसिटी जोन्स, The Brutalist
– मार्गरेट क्वॉली, The Substance
– इसाबेला रॉसेलिनी, Conclave
– जोई सैलडाना, Emilia Perez
सर्वश्रेष्ठ निर्देशक – मोशन पिक्चर:
– जैक्स ऑडियार, Emilia Perez
– सीन बेकर, Anora
– एडवर्ड बर्गर, Conclave
– ब्रैडी कॉर्बेट, The Brutalist
– कोराली फार्जात, The Substance
– पायल कपाड़िया, All We Imagine as Light
वहीं बात करें गोल्डन ग्लोब अवार्ड्स की तो 82वें वार्षिक गोल्डन ग्लोब अवार्ड्स का सीधा प्रसारण सीबीएस पर बेवर्ली हिल्टन से और रविवार, 5 जनवरी, 2025 को शाम 5 बजे किया जाएगा. निक्की ग्लेसर 2025 के गोल्डन ग्लोब्स की मेज़बानी करेंगी और एमी विजेता निर्माता ग्लेन वीस और रिकी किर्शनर लगातार दूसरे साल शो रनर के रूप में काम करेंगे. पहले यह घोषणा की गई थी कि वियोला डेविस को सेसिल बी. डेमिले पुरस्कार और टेड डैनसन को कैरल बर्नेट पुरस्कार मिलेगा, जो टीवी उत्कृष्टता को मान्यता देता है.
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IIT कानपुर से इंजीनियरिंग, फाइनेंस और टैक्सेशन के एक्सपर्ट… RBI के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा से मिलिए
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नई दिल्ली:
रेवेन्यू सेक्रेटरी संजय मल्होत्रा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नए गवर्नर अपॉइंट हुए हैं. मल्होत्रा 11 दिसंबर 2024 को RBI के 26वें गवर्नर के तौर पर कार्यभार संभालेंगे. मौजूदा गवर्नर शक्तिकांत दास का कार्यकाल 10 दिसंबर को खत्म हो रहा है. RBI गवर्नर के तौर पर मल्होत्रा का कार्यकाल 3 साल का होगा.
सरकार ने 2022 में रिजर्व बैंक (RBI) के डायरेक्टर के रूप में डिपाटर्मेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) के सचिव संजय मल्होत्रा को नॉमिनेट किया था. सोमवार को मोदी कैबिनेट ने संजय मल्होत्रा के अपॉइंटमेंट को मंजूरी दी. आइए जानते हैं कौन हैं संजय मल्होत्रा, जो देश के सेंट्रल बैंक की सारी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं:-
भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में किसी भी घटना के प्रभाव से निपटने के लिए अच्छी स्थिति में: RBI
राजस्थान कैडर के IAS ऑफिसर
संजय मल्होत्रा राजस्थान कैडर के 1990 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई राजस्थान में ही हुई है. IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस में उन्होंने इंजीनियरिंग की है. इसके बाद अमेरिका के
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर डिग्री की पढ़ाई की है.
33 साल का एक्सपीरिएंस
संजय मल्होत्रा को पास 33 साल का एक्सपीरिएंस हैं. उन्होंने पावर, फाइनेंस, टैक्सेशन, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और माइन्स समेत तमाम क्षेत्रों में काम किया है. मल्होत्रा के पास राज्य और केंद्र सरकार दोनों में फाइनेंस और टैक्सेशन में काम करने का अनुभव भी है.
राजकोषीय घाटा अक्टूबर के अंत में पूरे साल के लक्ष्य का 46.5 प्रतिशत: सरकारी आंकड़े
वित्त मंत्रालय में सेक्रेटरी (रेवेन्यू) के रूप में काम करने से पहले उन्होंने भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग में सचिव का पद संभाला था.
सुधारवादी अफसरों में होती है गिनती
फाइनेंस के मामलों में संजय मल्होत्रा की गिनती सुधारवादी और मजबूत काम करने वाले अफसरों में होती है. उन्हें राजस्थान के करीब सभी विभागों में काम करने का अनुभव है. वो PM मोदी के पसंदीदा अफसरों में भी शामिल हैं.
टैक्स पॉलिसी मेकिंग में अहम भूमिका
संजय मल्होत्रा ने डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स के लिए टैक्स पॉलीसी मेकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
RBI ने लगातार 11वीं बार Repo Rate में नहीं किया बदलाव, 6.50% पर बरकरार, लोन की EMI पर राहत नहीं
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150 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म को अक्षय कुमार ने अपनी गलती से बनाया फ्लॉप ? मेकर्स को लगा इतना चूना
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अक्षय कुमार की इस आदत की वजह से फ्लॉप हुई थी मूवी सम्राट पृथ्वीराज
नई दिल्ली:
साल 2022 में अक्षय कुमार की एक फिल्म आई थी पृथ्वीराज चौहान. जैसा कि नाम से ही जाहिर है ये फिल्म पृथ्वी राज चौहान की लाइफ पर बेस्ड थी. उनके साथ उनके शौर्य के साथ उनकी संयोगिता के प्रति चाहत को भी फिल्म में दिखाया गया था. लेकिन ये फिल्म अक्षय कुमार की दूसरी फिल्मों की तरह कोई कमाल नहीं दिखा सकी थी. इसकी क्या वजह थी. फिल्म क्रिटिक और ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा ने इस बारे में एनडीटीवी से खास बातचीत की और बताया पृथ्वीराज चौहान दर्शकों की कसौटी पर खरी क्यों नहीं उतरी.
क्यों फ्लॉप हुई अक्षय कुमार की मूवी?
एनडीटीवी ने कोमल नाहटा से जानना चाहा कि क्या बॉलीवुड के एक्टर्स साउथ के हीरोज जितनी मेहनत, रोल में उतरने के लिए नहीं करते हैं. इसके जवाब में कोमल नाहटा ने कहा कि ये कहना गलत होगा कि बॉलीवुड के एक्टर्स रोल में ढलने के लिए मेहनत नहीं करते हैं. शाहरुख खान, आमिर खान जैसे स्टार्स भरपूर मेहनत करते हैं. उन्होंने सम्राट पृथ्वीराज मूवी का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी फिल्म बनाना हो तो मेहनत ज्यादा लगती है. जो अक्षय कुमार ने इस फिल्म के लिए नहीं की. इस फिल्म में पृथ्वीराज चौहान के हाव भाव पकड़ने के लिए थोड़ी ज्यादा मेहनत की जानी चाहिए थी. लेकिन रोल में उतरने की कोशिश ही नहीं की गई. जिसका नतीजा ये हुआ कि फिल्म को दर्शकों ने पसंद नहीं किया.
दो साल पहले रिलीज हुई थी फिल्म
अक्षय कुमार की फिल्म सम्राट पृथ्वीराज साल 2022 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म में मिस वर्ल्ड रही मानुषी छिल्लर संयोगिता के रोल में थीं. सोनू सूद, चंदर वरदाई के रोल में थे. आशुतोष राणा ने जय चंद्र का रोल अदा किया था. फिल्म से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स में इसका बजट करीब 200 करोड़ रु. बताया गया. लेकिन फिल्म सौ करोड़ का मार्क भी टच नहीं कर पाई. इस फिल्म को डिजास्टर मूवी माना गया.
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