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Sanjay Pugalia Analysis: चुनाव हारना कोई राहुल गांधी से सीखे, ट्रोल पॉलिटिक्स नहीं दिलाती जीत
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नई दिल्ली/मुंबई:
महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे कई कारणों से ऐतिहासिक हैं. महाराष्ट्र में बीजेपी एक अरसे से सबसे ताकतवर पार्टी बनना चाहती थी. अब ये हसरत पूरी हो गई है और चुनौतीपूर्ण चुनाव में पुरी हुई है. इस चुनाव में बीजेपी मराठा और गैर मराठा वोटों को साथ लाने का मुश्किल काम करने में सफल रही. अब तक के नतीजों के हिसाब से बीजेपी का स्ट्राइक रेट करीब करीब 85 से 90 पर्सेंट है. वोट प्रतिशत भी करीब 50 फीसदी तक होगा. यह ऐतिहासिक है.
महाराष्ट्र में अपना दबदबा बढ़ाने के लिए शतरंज की जितनी चालें चार-पांच साल में पार्टी ने चलीं, वो कामयाब रही. शिंदे को तोड़कर लाना. अजित पवार को साथ में लाना. शिंदे को अहमियत देना और ऐसे मुद्दे गढ़ना, जिसमें एक तरफ विकास और दूसरी तरफ उससे भी बड़ा महिला वोट बैंक सधे. इसने मिलकर कमाल किया. देखा जाए तो इस तरह की विजय की उम्मीद तो बीजेपी को खुद भी नहीं रही होगी.
शिंदे का क्या
सवाल पूछे जा रहे हैं कि महाराष्ट्र में अकेले बहुमत के पास जा पहुंची बीजेपी अपने दोस्तों को भाव देगी क्या? बीजेपी जब बहुत बढ़िया से जीतकर आती है, तो वह गठबंधन धर्म निभाती रही है. बीजेपी का यह इतिहास रहा है.आने वाले दिनों में बीजेपी अपने साथियों को बहुत अच्छे से साथ रखे, तो इसमें अचरज नहीं होना चाहिए. इन चुनाव नतीजों के बाद अजित पवार और एकनाथ शिंदे के लिए भी यह जरूरी होगा कि बीजेपी के साथ बने रहने और विश्वास का संबंध बनाने के लिए काम करें. भले ही अब गठबंधन में शिंदे की उतनी जरूरत न दिख रही हो, लेकिन बीजेपी लॉन्ग टर्म पॉलिटिक्स करने वाली पार्टी है. अभी तक सुना जाता था कि महाराष्ट्र में सीनियर और जूनियर पार्टनर कौन है, लेकिन अब बीजेपी सीनियर पार्टनर बनकर आई है, इसलिए यह लगता नहीं कि दोस्तों से तालमेल में कोई बदलाव आएगा.आने वाले दिनों में यह बहुत मुमकिन है कि पावर शेयरिंग के लिए कोई अच्छा फॉर्मूला निकलकर आए.
चुनाव के दौरान शिंदे ने कहा कि अभी सीएम तय नहीं है. उन्होंने कहा कि उनके चेहरे पर चुनाव लड़ा गया लेकिन इन बातों को आप दबाव की राजनीति कह सकते हैं. लेकिन ये गठबंधन की राजनीति में सामान्य बात है. बीजेपी की ऐतिहासिक जीत बीजेपी के लिए यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि बीजेपी ने पहली बार राज्य में इतनी सीटें जीती हैं. बीजेपी तीसरी बार 100 के पार पहुंची है. NDA के करीब 50 पर्सेंट के वोट शेयर में अगर 25 पर्सेंट से ज्यादा उसका वोट शेयर है, तो यह ऐतिहासिक नंबर है. जनमत को ईमानदारी से डिकोड किया जाए तो सीएम का पहला हक बीजेपी का बनता है. ऐसे में शिंदे को पीछे आना ही पड़ेगा. और वह खुशी से आते भी दिखाए देंगे. इस पर भी चौंकना नहीं चाहिए.
विपक्ष के लिए सबक
यह चुनाव विपक्ष के नेताओं के लिए सबक है. लोकसभा चुनाव के बाद पूछा जा रहा था कि बीजेपी को दलित, पिछड़े वोट मिलेंगे क्या? दलित वोट जो संविधान के नाम पर चले गए थे, उसका क्या होगा? महाराष्ट्र में वे सब वापस आते हुए दिखाई दे रहे हैं. बीजेपी, पीएम मोदी, अमित शाह, संघ, एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फणडवीस ने किस तरह से रणनीति बनाई, इस चुनाव में धूल चाट रहे नेताओं के लिए यह पीएचडी के रिसर्च का विषय होना चाहिए.
इस चुनाव का सबसे बड़ा सबक कांग्रेस के लिए है. चुनाव कैसे हारें यह राहुल गांधी से सीखना चाहिए. चुनाव प्रचार के दौरान राहुल ने क्या कहा, आज किसी को याद नहीं होगा. महाराष्ट्र की जनता से किया हुआ उनका कोई वादा शायद ही किसी के जेहन में ताजा हो. महाराष्ट्र कभी कांग्रेस मजबूत का गढ़ था. वो गढ़ अब ध्वस्त हो चुका है. इस चुनाव में शरद पवार ही थे, जिनके कारण कांग्रेस किसी तरह चुनाव लड़ पाई, नहीं तो उसकी क्या हैसियत थी, वह सभी जानते हैं.
सड़क पर नहीं, सोशल मीडिया पर सियासत
राहुल ऐसे मुद्दे पर लगे रहे जो जो सोशल मीडिया पर ट्रोल का मुद्दा था. जब नेता विपक्ष खुद को ही ट्रोल बना ले, सिंगल मुद्दा पार्टी बना ले, पूरे मीडिया में सनसनी फैलाने की कोशिश करे और फिर सोचे कि महाराष्ट्र तो निकल जाएगा, तो ऐसा नहीं हो सकता. महाराष्ट्र ने राहुल गांधी और कांग्रेस को ये सबक सिखाया है.
विदर्भ कभी कांग्रेस का गढ़ था. संघ का यहां मुख्यालय है. बीजेपी का कभी भी विदर्भ में ऐसा असर नहीं था, जो आज है. कांग्रेस को हारने की कला इतने शानदार तरीके से आती है कि यह इसका दूसरा उदाहरण है.
झारखंड में इंडिया गठबंधन भले ही सत्ता में वापसी कर रहा हो, लेकिन कांग्रेस वहां खुद कोई बहुत अच्छा नहीं कर पाई. इसलिए कांग्रेस पार्टी को यह सोचना पड़ेगा कि इस हकलाने वाले नेतृत्व के साथ वह कौन सी राजनीति कर रही है.
कांग्रेस से सवाल
आखिर क्या वजह थी कि कांग्रेस को महाराष्ट्र से ज्यादा ताकत वायनाड में झोंकनी पड़ी? वायनाड एक जीता हुआ चुनाव था, लेकिन कांग्रेस का पूरा कैडर अपने नेता को वहां चेहरा दिखाने के लिए जुटा था. यही सारे कारक हैं कि महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी के लिए सबसे बुरी खबर बन गया है. यह कांग्रेस के ध्वस्त होने की खबर है. राहुल गांधी के पूरी तरह फेल होने का संदेश इस जनादेश में छिपा है.
कांग्रेस के पुराने बीट रिपोर्टर के तौर पर मैं कह सकता हूं कि राहुल गांधी जिस सियासी रास्ते पर चल रहे हैं, वह साजिश की पॉलिटिक्स है, ट्रोल की पॉलिटिक्स है, यह पॉलिटिक्स वोट दिलाने वाली नहीं है. दरअसल बीजेपी और संघ का नेतृत्व राहुल गांधी को अपनी पार्टी का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने के लिए शुक्रिया अदा कर रहे होंगे. बीजेपी की चुनाव लड़ने की महारथ से कांग्रेस ऐसे जमींदोज हुई है कि यह चुनाव राहुल गांधी के फेल होने का सबसे बड़े सबूत और मिसाल के तौर पर भी याद किया जाएगा.
उद्धव की विकास विरोधी राजनीति नहीं चली
चुनाव में उद्धव ठाकरे की भी हालत भी देखिए. बाला साहेब ठाकरे की विरासत को उन्होंने कैसे निभाया, यह भी देखने और समझने की जरूरत है. उनकी बातों में भी कर्कशपना था. विकास विरोधी बात कर रहे थे. प्रांतवाद को फैलाने की बातें करते थे. अब कांग्रेस गुजरात में जाकर कैसे वोट मांगेगी, यह भी देखने वाली चीज होगी. बाला साहेब ठाकरे के नाम पर कैसे उद्धव ठाकरे अपनी राजनीति को आगे बढ़ाएंगे, यह भी देखने वाली बात होगी. महाराष्ट्र में राज करने वालीं ये पार्टियां 20-20 सीटों की पार्टियां बनकर रह गई हैं.
लोकतंत्र में विपक्ष को भी मजूबत होकर उभरना चाहिए. लेकिन जब विपक्ष के मुद्दे विकास विरोधी, देश विरोधी, कारोबार विरोधी हो जाएं और जनता के मुद्दे वो उठाना बंद कर दे तो भी यह स्थिति आती ही है. महाराष्ट्र के इस बड़े झटके के बाद कांग्रेस पार्टी अभी भी जागेगी, इसमें संदेह है.क्योंकि जब तक राहुल गांधी का नेतृत्व है, कांग्रेस धराशायी होती रहेगी. कांग्रेस को अगर लगता है कि वह 2029 को भी इस ट्रोल पॉलिटिक्स के सहारे जीत जाएगी, तो उसे भूल जाना चाहिए.
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न्यायाधीशों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि न्यायाधीशों को एक संन्यासी की तरह जीवन जीना चाहिए और घोड़े की तरह काम करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और निर्णयों के बारे में कोई राय व्यक्त नहीं करनी चाहिए. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह मौखिक टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट की यह पीठ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दो महिला न्यायिक अधिकारियों की बर्खास्तगी से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी.
कोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका में दिखावटीपन के लिए कोई जगह नहीं है. पीठ ने कहा, ‘‘न्यायिक अधिकारियों को फेसबुक का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. उन्हें निर्णयों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कल यदि निर्णय का हवाला दिया जाएगा, तो न्यायाधीश पहले ही किसी न किसी रूप में अपनी बात कह चुके होंगे.”
पीठ ने कहा, ‘‘यह एक खुला मंच है…आपको एक संत की तरह जीवन जीना होगा, पूरी मेहनत से काम करना होगा. न्यायिक अधिकारियों को बहुत सारे त्याग करने पड़ते हैं. उन्हें फेसबुक का बिल्कुल प्रयोग नहीं करना चाहिए.”
बर्खास्त महिला न्यायाधीशों में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने पीठ के विचारों को दोहराते हुए कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी या न्यायाधीश को न्यायिक कार्य से संबंधित कोई भी पोस्ट फेसबुक पर नहीं डालनी चाहिए.
यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, जो न्यायमित्र हैं, द्वारा बर्खास्त महिला न्यायाधीश के खिलाफ विभिन्न शिकायतों के बारे में पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद आई. अग्रवाल ने पीठ को बताया कि महिला न्यायाधीश ने फेसबुक पर भी एक पोस्ट डाली थी.
ग्यारह नवंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने कथित असंतोषजनक प्रदर्शन के कारण राज्य सरकार द्वारा छह महिला सिविल न्यायाधीशों की बर्खास्तगी का स्वत: संज्ञान लिया था. हालांकि, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्ण अदालत ने एक अगस्त को अपने पहले के प्रस्तावों पर पुनर्विचार किया और चार अधिकारियों ज्योति वरकड़े, सुश्री सोनाक्षी जोशी, सुश्री प्रिया शर्मा और रचना अतुलकर जोशी को कुछ शर्तों के साथ बहाल करने का फैसला किया, जबकि अन्य दो अदिति कुमार शर्मा और सरिता चौधरी को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया.
शीर्ष अदालत उन न्यायाधीशों के मामलों पर विचार कर रही थी, जो क्रमशः 2018 और 2017 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे.
(इनपुट एजेंसियों से भी)
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अनुकूल नीतियों, कारोबारी सुगमता से बिहार अब निवेश का आकर्षक स्थल
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पटना:
विकास के लिहाज से पिछड़े राज्यों में आने वाले बिहार की तस्वीर अब बदल रही है. राज्य अब अनूकूल नीतियों तथा कारोबारी सुगमता की वजह से निवेश का आकर्षक स्थल बन रहा है. अदाणी समूह से लेकर कोका-कोला तक ने यहां अरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएं की हैं. निवेश के लिए और भी कंपनियां यहां आने वाली हैं.
राज्य के उद्योग और पर्यटन मंत्री नीतीश मिश्रा बिहार को एक ऐसे राज्य में बदल रहे हैं, जो पूर्वी भारत में निवेशकों के लिए प्रवेश द्वार बन सकता है. उनका कहना है, बिहार की औद्योगिक क्षमता असीमित है. बिहार धारणा का शिकार रहा है. लेकिन अब यह बदल रहा है.
मिश्रा ने कहा कि राज्य निवेशकों को ब्याज छूट से लेकर राज्य जीएसटी की वापसी, स्टाम्प शुल्क छूट, निर्यात सब्सिडी और परिवहन, बिजली तथा भूमि शुल्क के लिए रियायतें प्रदान कर रहा है.
साथ ही न केवल अनुमोदन के समय बल्कि प्रोत्साहनों के वितरण में भी एकल खिड़की व्यवस्था के तहत मंजूरी दी जा रही है. उन्होंने कहा, ‘‘किसी को सचिवालय आने की जरूरत नहीं है. किसी को सरकारी कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। हम जो भी वादा कर रहे हैं, उसे पूरा कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि बिहार राज्य भर के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित पूरी तरह से तैयार लगभग 24 लाख वर्ग फुट औद्योगिक ‘शेड’ की पेशकश कर रहा है. उसमें सभी प्रकार का बुनियादी ढांचा उपलब्ध है. यह जगह किसी भी उद्योग के लिए निर्धारित दर पर उपलब्ध है. राज्य ने उद्योग स्थापित करने के लिए 3,000 एकड़ का भूमि बैंक भी बनाया है.
उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था की समस्या का समाधान किया गया है. साथ ही कोलकाता और हल्दिया में बंदरगाहों के साथ-साथ झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों में कच्चे माल के स्रोतों और खनिज भंडार तक पहुंचने के लिए बुनियादी ढांचे के साथ लगभग चौबीसों घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है.
बिहार सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण, आईटी और आईटी-संबद्ध सेवाओं (आईटीईएस), कपड़ा और चमड़ा क्षेत्रों को उच्च प्राथमिकता के रूप में रखा है. उनमें से प्रत्येक में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग नीतियां हैं. इसके अलावा, सरकार एथनॉल और बायोगैस जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर भी बड़ा काम कर रही है.
मिश्रा ने कहा कि बिहार में बदलाव का श्रेय केंद्र और राज्य के मिलकर काम करने को जाता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली प्रगतिशील विचारधारा वाली केंद्र सरकार के साथ, क्षेत्रीय असंतुलन अब बीते दिनों की बात है. अब हर राज्य के पास मौका है.
मिश्रा ने कहा कि बिहार ने पिछले दो दशक में इस अवसर का लाभ उठाया है. एक राज्य जो लगातार कम वृद्धि दर के लिए जाना जाता था, अब राष्ट्रीय औसत से बेहतर वृद्धि दर हासिल कर रहा है.
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी नीति अच्छी है और सौभाग्य से बिहार में हमारा नेतृत्व इतना अच्छा रहा है कि इन 19 साल में हमने बहुत अच्छा बुनियादी ढांचा बनाया है. सही मायने में बिहार निवेशकों के लिए तैयार है.”
बिहार की स्थिति विशिष्ट है. पूर्वी और उत्तरी भारत और नेपाल के विशाल बाजारों से निकटता के कारण बिहार को स्थान-विशेष का लाभ प्राप्त है. मूल रूप से कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले राज्य के पास एक बड़ा कृषि और पशु उत्पादन आधार है. यह कृषि आधारित यानी खाद्य प्रसंस्करण, रेशम और चाय से लेकर चमड़े और गैर-धातु खनिजों तक कई उद्योगों के लिए कच्चे माल की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति करता है.
इसके अलावा, पानी की कोई समस्या नहीं है और पर्याप्त संख्या में सस्ता श्रम उपलब्ध है. मिश्रा ने कहा, ‘‘ये हमारी मुख्य ताकत है और आने वाले दिनों में, बिहार में भारत के पूरे पूर्वी हिस्से के लिए वृद्धि का प्रमुख इंजन बनने की क्षमता है. यह बिहार का समय है.”
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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काल बना स्पीड ब्रेकर, हवा में उछली स्कूटर, सड़क पर घिसट गया शख्स… देखिए हैरान करने वाला VIDEO
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नई दिल्ली:
देहरादून में घंटाघर के सामने बिना चिन्ह वाले स्पीड ब्रेकर से टकराने के बाद एक स्कूटर सवार हवा में उछला और इसके बाद वह सड़क पर गिरा. वह और उसकी स्कूटर कई मीटर तक सड़क पर सरकती हुई आगे गई. गनीमत रही कि स्कूटर सवार को कोई गंभीर चोट नहीं लगी. स्पीड ब्रेकर पर ड्राइवरों को सचेत करने के लिए उनकी मार्किंग नहीं की गई है जिसके कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
NDTV को मिले घटनास्थल के फुटेज में स्कूटर मध्यम गति से स्पीड ब्रेकर की ओर बढ़ती हुई दिख रही है. जैसे ही स्कूटर सवार स्पीड ब्रेकर से टकराता है, स्कूटर अप्रत्याशित रूप से हवा में उछल जाता है. वाहन चालक उछलकर नीचे गिर जाता है. वह कुछ देर रुकने के बाद उठता है और वहां से चला जाता है.
स्पीड ब्रेकर वाहनों की गति को नियंत्रित रखने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन इनकी डिजाइन में दोषों के कारण यही स्पीड ब्रेकर कई दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं. देहरादून के इस स्पीड ब्रेकर की स्पष्ट मार्किंग नहीं की गई है. इसके अलावा यह अत्यधिक ऊंचा भी है. इससे चार पहियों वाले वाहनों के लिए इसे पार करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
उचित संकेतक और मार्किंग की कमी के कारण ड्राइवरों के लिए स्पीड ब्रेकर का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है. इससे यहां हादसे हो रहे हैं.
इस स्पीड ब्रेकर के कारण कथित तौर पर सात दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें तीन साल के एक बच्चे सहित दो लोग घायल हुए हैं.
स्पीड ब्रेकर के कारण हादसे का यह पहला मामला नहीं है. अक्टूबर में गुरुग्राम में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी. तब गोल्फ कोर्स रोड पर एक तेज रफ़्तार BMW कार नए बनाए गए स्पीड ब्रेकर पर से उछल गई थी.
कैमरे में कैद हुई इस घटना में कार जमीन से काफी ऊपर उछलती हुई दिखी थी. कार उस स्थान से करीब 15 फीट दूर जाकर गिरी थी. उसी वीडियो में दो ट्रक भी बिना किसी निशान वाले स्पीड ब्रेकर से टकराकर हवा में उछलते हुए देखे गए थे.
इस घटना को लेकर कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर हुई तीखी प्रतिक्रिया पर अधिकारियों ने कार्रवाई की थी. गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) ने ड्राइवरों को चेतावनी देने के लिए “आगे स्पीड ब्रेकर है” लिखा हुआ एक साइनबोर्ड लगवाया. उन्होंने स्पीड ब्रेकर की थर्मोप्लास्टिक व्हाइट पेंट से मार्किंग भी कराई थी. इस तरह पेंट करने से विशेष रूप से रात में स्पीड ब्रेकर साफ दिखाई देता है.
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