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NDTV संवाद कार्यक्रम में देश के संविधान के विभिन्न पहलुओं पर हुई गहन चर्चा
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नई दिल्ली:
एनडीटीवी संवाद कार्यक्रम के पहले एपिसोड संविधान @75 में रविवार को 75वीं वर्षगांठ मना रहे देश के संविधान के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा हुई. सुप्रीम कोर्ट के 50वें चीफ जस्टिस रहे डीवाई चंद्रचूड़, 40वें चीफ जस्टिस रहे एके सीकरी, पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू सहित देश की जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं. डीवाई चंद्रचूड़ ने यहां जजों की नियुक्ति वाले कॉलेजियम सिस्टम की पुरजोर वकालत की और कहा कि इसके काम करने को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं. यह संघीय व्यवस्था में बहुत अच्छी व्यवस्था है. वहीं रविशंकर प्रसाद ने कहा कि संविधान की मूल प्रति में जिस तरह से भगवान राम, हनुमान की तस्वीरें लगी हैं, आज अगर संविधान लिखा जाता और इस तरह की तस्वीरें लगतीं तो कहा जाता कि भारत हिंदू राष्ट्र बन गया है. संविधान को बचाने की बात करने वाले संविधान तक को नहीं समझते हैं. किरेन रिजिजू ने कहा कि सन 1976 में संविधान पर सबसे बड़ा हमला किया गया था. संविधान में कही गई बातों का पालन करेंगे तो भारत विकसित होगा.
जजों के राजनीति में जाने पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जज भी एक आम नागरिक हैं और रिटायर होने के बाद वो सब कुछ करने के हकदार हैं, जो एक आम नागरिक कर सकता है. संविधान में जजों के रिटायर होने के बाद किसी काम को करने पर रोक नहीं है. हालांकि, सोसायटी में जजों के लिए हायर स्टैंडर्ड है कि उन्हें कैसे व्यवहार करना चाहिए. तो ये जजों को खुद ही तय करना होगा कि उन्हें क्या करना चाहिए. कॉलेज के दिनों को याद करते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने दिलचस्प किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया कि कॉलेज के दिनों में वह दिल्ली की फेमस मार्केट कनॉट प्लेस में घूमने जाया करते थे. उन दिनों वह डीटीसी की बसों में सफर करते थे और दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस में टाइम पास करने जाते थे.तब हम कहते थे सीपी में टीपी. कई लोग पूछते थे कि ये सीपी में टीपी क्या है? इसका मतलब हमारे लिये था- कनॉट प्लेस में टाइम पास.
कानून मंत्री रहे रविशंकर प्रसाद ने संविधान की मूल प्रति दिखाई और बताया कि इसमें फंडामेंटल राइट्स के ऊपर प्रभु राम की तस्वीर लगी है. इसमें वो लंका विजय के बाद भाई लक्ष्मण और माता सीता के साथ लौट रहे हैं. मूल संविधान में गौतम बुद्ध, महावीर और हनुमान जी की भी तस्वीर लगी है. नटराज की भी तस्वीर लगी है. उन्होंने सभी की तस्वीरें भी दिखाईं और संविधान बनाने वाले सदस्यों के हस्ताक्षर भी दिखाए. इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि संविधान आज बना हुआ होता और अगर इन तस्वीरों को आज लगाया जाता तो क्या कहा जाता कि भारत हिंदू राष्ट्र बन गया है. यही है संविधान को बचाने की बात करने वाले न संविधान को समझते हैं और न संविधान को बनाने वालों की मानसिकता को समझते हैं. मैं साफ बता दूं ये देश लोकतंत्र है. लोकतंत्र से चलेगा. चुनाव से चलेगा. जनता के वोट से चलेगा. इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं विकास भी करेंगे और विरासत को भी बचाएंगे. लाल किले से 15 अगस्त को उन्होंने ये बात कही थी.
कानून मंत्री रहे किरेन रिजिजू ने कहा कि, ”एनडीटीवी ने जो कार्यक्रम रखा है, यह बहुत सही समय पर और बहुत ही उपयोगी कार्यक्रम है. उन्होंने कहा कि सन 1976 में संविधान पर सबसे बड़ा हमला किया गया था. संविधान में कही गई बातों का पालन करेंगे तो भारत विकसित होगा.यह तो सबको मालूम है कि संविधान स्टेटिक नहीं है, संविधान एक जर्नी है. इस सफर में कई बदलाव होते आए हैं और आगे भी होते रहेंगे. लोकतंत्र में कोई भी चीज स्थायी नहीं होती है, लेकिन कुछ मूल चीजें स्थायी होती हैं. उनमें छेड़छाड़ करनी भी नहीं चाहिए. मैंने देश के कानून मंत्री के रूप में भी काम किया है. कई विभागों को हमने देखा है. पूरा ज्ञान हमारे पास नहीं है कि संविधान बनाते समय क्या हुआ था? कुछ छोटी, कुछ बड़ी घटनाएं भी हैं. कई चीजें हैं, जो हमारे सामने उभरकर नहीं आईं हैं. 2010 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी जी ने संविधान यात्रा निकाली. खुद पैदल चले. इससे पहले किसी राजनेता ने ऐसा काम कभी नहीं किया. जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने 2015 में पहली बार संविधान दिवस मनाने की प्रक्रिया शुरू की. जिस पवित्रता के साथ संविधान को अपने जीवन का हिस्सा पीएम मोदी ने बनाया है, मैं बाबा भीमराव आंबेडकर के अलावा किसी और नेता के बारे में सोच भी नहीं सकता, जो संविधान को इतनी इज्जत देते हैं. मगर संविधान के लिए कुछ कर्तव्य भी करना होता है. प्रधानमंत्री मोदी ने आह्वान किया है कि लोगों को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए. आपके अधिकार की रक्षा करना सरकार का दायित्व है.”
देश के 49वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यूयू ललित ने कहा कि संविधान ये नहीं मानता कि सरकार का कोई धर्म हो. हर नागरिक अपना धर्म अपना सकता है. ये उसका अधिकार है. हालांकि, इस देश में धर्म के नाम पर हिंसा और दंगे होते आए हैं. 1947 के दंगे भी धर्म के नाम पर हुए. ये हमारे इतिहास का एक जख्म है. पिछले 75 सालों में हम इससे उबरे हैं, लेकिन जब-तब ये सामने आ जाता है. संविधान तो इसको सपोर्ट नहीं करता. एक राष्ट्र का तो कभी ये उद्देश्य नहीं होता कि हिंसा बढ़े. अभी जो तीन नये आपराधिक कानून आए हैं, उसमें आज तक जो नहीं था, वो सब कुछ है. मॉब लिंचिंग तक पर कानून हैं. जैसे जैसे राष्ट्र आगे बढ़ता जाता है, वैसे वैसे ये कम होता जाना चाहिए.
जस्टिस एके सीकरी ने कहा कि संविधान बने 75 साल हो गए. थॉमस जेफरसन ने 150 साल पहले कहा था कि कोई भी संविधान 17 या 19 साल बाद बदल देना चाहिए. उस समय के दुनिया के संविधान को देखकर उन्होंने कहा था. उस समय अमेरिका का संविधान नया था. आज हमारा संविधान 75 साल हो गए. इस बीच हमारे आसपास और दुनिया के कई देशों का संविधान बदल गया. कइयों के तो 3-4 बार संविधान बदल चुके हैं. हमारे संविधान की खासियत ये है कि मानव अधिकारों का खास ख्याल रखा गया था.
जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा ने कहा कि संविधान के मूल्यों की आधारशिला संविधान बनाने वालों ने रखा. मगर बदलाव प्रकृति का नियम है. इसलिए वो हमेशा एक जैसा नहीं रह सकता. ये अच्छी बात है कि संविधान में अमेंडमेंड की गुंजाइश है. भारत के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विकास सिंह ने कहा कि संविधान में समाज में सभी को साथ लेकर चलने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी. अब यही देखते हुए महिलाओं के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था की गई है. न्यायिक तंत्र में भी इसकी व्यवस्था होनी चाहिए. इसलिए संविधान में बदलाव देश को आगे बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नलिन कोहली ने कहा कि 75 साल में हम काफी आगे बढ़ गए और संविधान भी बदलावों के साथ आगे बढ़ता आया. यही संविधान की खूबसूरती है. पहले कोई मानता नहीं था कि भारत विकसित देश बन सकता है, लेकिन अब सब मानते हैं कि 2047 में न होकर 2040, 2045 तक भी हम विकसित देश बन सकते हैं और इसमें संविधान को भी उस हिसाब से बदलना होगा. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि संविधान बनाने वालों ने इसे बनाते समय सोचा था कि भारत इस हिसाब से विकसित होगा. उन्होंने आगे आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए भी संविधान में बदलाव का रास्ता छोड़ रखा था. इस संविधान को बदलने या दूसरा संविधान को लाने की जरूरत नहीं है.
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि इंडिया से ज्यादा विविधता वाला देश कोई नहीं है. हिंदुस्तान का जो इलेक्शन कमीशन है, उसे संविधान में सबसे पहले जोड़ा गया था और यही इसकी महत्ता बताता है. यूरोप के 50, अफ्रीका के 54 देश हैं उससे बड़ा हमारा देश का चुनाव है. 90 देशों के बराबर भारत का एक चुनाव है. हिलेरी क्लिंटन ने तो कहा था कि ये गोल्ड स्टैंडर्ड है. संविधान के जानकार फैजान मुस्तफा ने कहा कि हमने अपने संविधान में दूसरे देशों से लिया बहुत कुछ है, लेकिन उसमें कुछ जोड़कर या संसोधन करके. संविधान का मूल उद्देश्य शक्ति देना नहीं, बल्कि शक्ति पर नियंत्रण रखना है. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि इंडिया से ज्यादा विविधता वाला देश कोई नहीं है. यही हमारी ईमानदारी है. हिंदुस्तान का जो इलेक्शन कमीशन है, उसका कमीशन सबसे पहले बना था और यही इसकी महत्ता बताता है.
इंटरनेट फ्रीडम के सह-संस्थापक और अधिवक्ता अपार गुप्ता ने कहा कि जिला अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल व्यवस्था लागू हो गई है. सुप्रीम कोर्ट में तो अब ज्यादातर वकील फाइलें कम और आईपैड लिए ज्यादा दिख रहे हैं. अधिवक्ता पल्लवी बरूआ ने कहा कि जब हम लॉ की पढ़ाई कर रहे थे तो किताबों ही पढ़ाई का साधन थीं, मगर वो बहुत महंगी होती थीं. डिजिटल होने के बाद सारी किताबें अब आईपैड में आ गईं हैं. लीगल रिसर्च काफी पहले शुरू हो गया था और अब काफी कुछ इंटरनेट पर उपलब्ध है.अधिवक्ता खुशबू जैन ने कहा कि वकीलों का डिजिटल कोर्ट में उपस्थित होना बहुत जरूरी हो गया है. कई बार वकीलों को सिर्फ हाजिरी के लिए कोर्ट में खुद में आकर उपस्थित होना पड़ता था. सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट आने में वकीलों का काफी समय और पैसा बर्बाद होता था. इससे आरोपियों, गवाहों और केस करने वालों को फायदा हो रहा है.अधिवक्ता हितेश जैन ने बताया कि संविधान में तकनीक का इस्तेमाल कर न्याय आसान हो सकता है. नये तीनों आपराधिक कानूनों में तकनीक का खास ख्याल रखा गया है.जस्टिस चंद्रचूड़ ने बहुत सही कहा है कि न्यायिक तंत्र से जुड़े लोगों को सोशल मीडिया की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए.
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने विपक्ष की और से संविधान के खतरे में होने की बात कहे जाने से जुड़े सवाल पर कहा कि जब हम कहते हैं कि हनन हो रहा है तो बड़ी बात कहते हैं. मूल्यों का हनन हो रहा है.संविधान के मूल तत्वों के साथ कमी की जा रही है. संविधान के मूल्यों वाले कई स्तंभ हैं, धर्म निरपेक्षता, पंथ निरपेक्षता, सौहार्द, संघीय ढांचा वगैरह…इसके अलावा हमारे स्तंभ हैं संसदीय गणतंत्र, सीएजी, ईसी… यदि आप स्तभों को कमजोर करते हैं, तो हनन कर रहे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि संविधान 75 साल में सिर्फ एक ही बार तोड़ा गया था, इमरजेंसी के समय. तब हम 14 महीने जेल में रहे थे, सत्याग्रह करके गए थे. देश में एक लाख 30 हजार लोग बंदी बनाए गए थे. यह देश को पता भी नहीं चला, सेंसरशिप थी. इमरजेंसी क्यों लगाई गई थी, क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा जी को पद से हटाया था. पूर्व राज्यसभा सांसद और पूर्व राजदूत डॉ पवन वर्मा ने कहा कि, ”संविधान महज एक कागज का टुकड़ा है, यदि उसकी आत्मा को जीवित न रखा जाए. इमरजेंसी में संविधान के कुछ मूल सिद्धांतों का हनन हुआ था. वह 1977 की बात है. ऐसा नहीं है कि सरकारें आज की हों या पहले की हों, संविधान की आड़ में संविधान की आत्मा पर प्रहार होता चला आया है.”
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर संतोष कुमार ने ‘NDTV इंडिया संवाद’ कार्यक्रम के बारे में बताया कि यह एक ऐसे सिलसिले की शुरुआत है, जो बड़े मुद्दों और विचारों का मंच बनेगा. उन्होंने बताया कि इस सीरीज में देश और जनता के मुद्दों पर गंभीर और रोचक बातचीत की जाएगी. ‘संविधान @75’ इसकी पहली किस्त है. देश जब संविधान की 75वां वर्षगांठ का जश्न मना रहा है, ऐसे में यह बेहद खास कार्यक्रम इसमें एक नया आयाम जोड़ेगा.
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न्यायाधीशों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि न्यायाधीशों को एक संन्यासी की तरह जीवन जीना चाहिए और घोड़े की तरह काम करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और निर्णयों के बारे में कोई राय व्यक्त नहीं करनी चाहिए. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह मौखिक टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट की यह पीठ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दो महिला न्यायिक अधिकारियों की बर्खास्तगी से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी.
कोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका में दिखावटीपन के लिए कोई जगह नहीं है. पीठ ने कहा, ‘‘न्यायिक अधिकारियों को फेसबुक का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. उन्हें निर्णयों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कल यदि निर्णय का हवाला दिया जाएगा, तो न्यायाधीश पहले ही किसी न किसी रूप में अपनी बात कह चुके होंगे.”
पीठ ने कहा, ‘‘यह एक खुला मंच है…आपको एक संत की तरह जीवन जीना होगा, पूरी मेहनत से काम करना होगा. न्यायिक अधिकारियों को बहुत सारे त्याग करने पड़ते हैं. उन्हें फेसबुक का बिल्कुल प्रयोग नहीं करना चाहिए.”
बर्खास्त महिला न्यायाधीशों में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने पीठ के विचारों को दोहराते हुए कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी या न्यायाधीश को न्यायिक कार्य से संबंधित कोई भी पोस्ट फेसबुक पर नहीं डालनी चाहिए.
यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, जो न्यायमित्र हैं, द्वारा बर्खास्त महिला न्यायाधीश के खिलाफ विभिन्न शिकायतों के बारे में पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद आई. अग्रवाल ने पीठ को बताया कि महिला न्यायाधीश ने फेसबुक पर भी एक पोस्ट डाली थी.
ग्यारह नवंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने कथित असंतोषजनक प्रदर्शन के कारण राज्य सरकार द्वारा छह महिला सिविल न्यायाधीशों की बर्खास्तगी का स्वत: संज्ञान लिया था. हालांकि, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्ण अदालत ने एक अगस्त को अपने पहले के प्रस्तावों पर पुनर्विचार किया और चार अधिकारियों ज्योति वरकड़े, सुश्री सोनाक्षी जोशी, सुश्री प्रिया शर्मा और रचना अतुलकर जोशी को कुछ शर्तों के साथ बहाल करने का फैसला किया, जबकि अन्य दो अदिति कुमार शर्मा और सरिता चौधरी को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया.
शीर्ष अदालत उन न्यायाधीशों के मामलों पर विचार कर रही थी, जो क्रमशः 2018 और 2017 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे.
(इनपुट एजेंसियों से भी)
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अनुकूल नीतियों, कारोबारी सुगमता से बिहार अब निवेश का आकर्षक स्थल
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पटना:
विकास के लिहाज से पिछड़े राज्यों में आने वाले बिहार की तस्वीर अब बदल रही है. राज्य अब अनूकूल नीतियों तथा कारोबारी सुगमता की वजह से निवेश का आकर्षक स्थल बन रहा है. अदाणी समूह से लेकर कोका-कोला तक ने यहां अरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएं की हैं. निवेश के लिए और भी कंपनियां यहां आने वाली हैं.
राज्य के उद्योग और पर्यटन मंत्री नीतीश मिश्रा बिहार को एक ऐसे राज्य में बदल रहे हैं, जो पूर्वी भारत में निवेशकों के लिए प्रवेश द्वार बन सकता है. उनका कहना है, बिहार की औद्योगिक क्षमता असीमित है. बिहार धारणा का शिकार रहा है. लेकिन अब यह बदल रहा है.
मिश्रा ने कहा कि राज्य निवेशकों को ब्याज छूट से लेकर राज्य जीएसटी की वापसी, स्टाम्प शुल्क छूट, निर्यात सब्सिडी और परिवहन, बिजली तथा भूमि शुल्क के लिए रियायतें प्रदान कर रहा है.
साथ ही न केवल अनुमोदन के समय बल्कि प्रोत्साहनों के वितरण में भी एकल खिड़की व्यवस्था के तहत मंजूरी दी जा रही है. उन्होंने कहा, ‘‘किसी को सचिवालय आने की जरूरत नहीं है. किसी को सरकारी कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। हम जो भी वादा कर रहे हैं, उसे पूरा कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि बिहार राज्य भर के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित पूरी तरह से तैयार लगभग 24 लाख वर्ग फुट औद्योगिक ‘शेड’ की पेशकश कर रहा है. उसमें सभी प्रकार का बुनियादी ढांचा उपलब्ध है. यह जगह किसी भी उद्योग के लिए निर्धारित दर पर उपलब्ध है. राज्य ने उद्योग स्थापित करने के लिए 3,000 एकड़ का भूमि बैंक भी बनाया है.
उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था की समस्या का समाधान किया गया है. साथ ही कोलकाता और हल्दिया में बंदरगाहों के साथ-साथ झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों में कच्चे माल के स्रोतों और खनिज भंडार तक पहुंचने के लिए बुनियादी ढांचे के साथ लगभग चौबीसों घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है.
बिहार सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण, आईटी और आईटी-संबद्ध सेवाओं (आईटीईएस), कपड़ा और चमड़ा क्षेत्रों को उच्च प्राथमिकता के रूप में रखा है. उनमें से प्रत्येक में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग नीतियां हैं. इसके अलावा, सरकार एथनॉल और बायोगैस जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर भी बड़ा काम कर रही है.
मिश्रा ने कहा कि बिहार में बदलाव का श्रेय केंद्र और राज्य के मिलकर काम करने को जाता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली प्रगतिशील विचारधारा वाली केंद्र सरकार के साथ, क्षेत्रीय असंतुलन अब बीते दिनों की बात है. अब हर राज्य के पास मौका है.
मिश्रा ने कहा कि बिहार ने पिछले दो दशक में इस अवसर का लाभ उठाया है. एक राज्य जो लगातार कम वृद्धि दर के लिए जाना जाता था, अब राष्ट्रीय औसत से बेहतर वृद्धि दर हासिल कर रहा है.
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी नीति अच्छी है और सौभाग्य से बिहार में हमारा नेतृत्व इतना अच्छा रहा है कि इन 19 साल में हमने बहुत अच्छा बुनियादी ढांचा बनाया है. सही मायने में बिहार निवेशकों के लिए तैयार है.”
बिहार की स्थिति विशिष्ट है. पूर्वी और उत्तरी भारत और नेपाल के विशाल बाजारों से निकटता के कारण बिहार को स्थान-विशेष का लाभ प्राप्त है. मूल रूप से कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले राज्य के पास एक बड़ा कृषि और पशु उत्पादन आधार है. यह कृषि आधारित यानी खाद्य प्रसंस्करण, रेशम और चाय से लेकर चमड़े और गैर-धातु खनिजों तक कई उद्योगों के लिए कच्चे माल की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति करता है.
इसके अलावा, पानी की कोई समस्या नहीं है और पर्याप्त संख्या में सस्ता श्रम उपलब्ध है. मिश्रा ने कहा, ‘‘ये हमारी मुख्य ताकत है और आने वाले दिनों में, बिहार में भारत के पूरे पूर्वी हिस्से के लिए वृद्धि का प्रमुख इंजन बनने की क्षमता है. यह बिहार का समय है.”
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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काल बना स्पीड ब्रेकर, हवा में उछली स्कूटर, सड़क पर घिसट गया शख्स… देखिए हैरान करने वाला VIDEO
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नई दिल्ली:
देहरादून में घंटाघर के सामने बिना चिन्ह वाले स्पीड ब्रेकर से टकराने के बाद एक स्कूटर सवार हवा में उछला और इसके बाद वह सड़क पर गिरा. वह और उसकी स्कूटर कई मीटर तक सड़क पर सरकती हुई आगे गई. गनीमत रही कि स्कूटर सवार को कोई गंभीर चोट नहीं लगी. स्पीड ब्रेकर पर ड्राइवरों को सचेत करने के लिए उनकी मार्किंग नहीं की गई है जिसके कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
NDTV को मिले घटनास्थल के फुटेज में स्कूटर मध्यम गति से स्पीड ब्रेकर की ओर बढ़ती हुई दिख रही है. जैसे ही स्कूटर सवार स्पीड ब्रेकर से टकराता है, स्कूटर अप्रत्याशित रूप से हवा में उछल जाता है. वाहन चालक उछलकर नीचे गिर जाता है. वह कुछ देर रुकने के बाद उठता है और वहां से चला जाता है.
स्पीड ब्रेकर वाहनों की गति को नियंत्रित रखने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन इनकी डिजाइन में दोषों के कारण यही स्पीड ब्रेकर कई दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं. देहरादून के इस स्पीड ब्रेकर की स्पष्ट मार्किंग नहीं की गई है. इसके अलावा यह अत्यधिक ऊंचा भी है. इससे चार पहियों वाले वाहनों के लिए इसे पार करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
उचित संकेतक और मार्किंग की कमी के कारण ड्राइवरों के लिए स्पीड ब्रेकर का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है. इससे यहां हादसे हो रहे हैं.
इस स्पीड ब्रेकर के कारण कथित तौर पर सात दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें तीन साल के एक बच्चे सहित दो लोग घायल हुए हैं.
स्पीड ब्रेकर के कारण हादसे का यह पहला मामला नहीं है. अक्टूबर में गुरुग्राम में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी. तब गोल्फ कोर्स रोड पर एक तेज रफ़्तार BMW कार नए बनाए गए स्पीड ब्रेकर पर से उछल गई थी.
कैमरे में कैद हुई इस घटना में कार जमीन से काफी ऊपर उछलती हुई दिखी थी. कार उस स्थान से करीब 15 फीट दूर जाकर गिरी थी. उसी वीडियो में दो ट्रक भी बिना किसी निशान वाले स्पीड ब्रेकर से टकराकर हवा में उछलते हुए देखे गए थे.
इस घटना को लेकर कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर हुई तीखी प्रतिक्रिया पर अधिकारियों ने कार्रवाई की थी. गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) ने ड्राइवरों को चेतावनी देने के लिए “आगे स्पीड ब्रेकर है” लिखा हुआ एक साइनबोर्ड लगवाया. उन्होंने स्पीड ब्रेकर की थर्मोप्लास्टिक व्हाइट पेंट से मार्किंग भी कराई थी. इस तरह पेंट करने से विशेष रूप से रात में स्पीड ब्रेकर साफ दिखाई देता है.
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