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Adani Group को बदनाम करने की साजिश नाकाम, I.N.D.I.A. के कई नेताओं का मिला साथ, अलग-थलग पड़ी कांग्रेस

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sr7nmnjg_adani-group_640x480_27_November_24 Adani Group को बदनाम करने की साजिश नाकाम, I.N.D.I.A. के कई नेताओं का मिला साथ, अलग-थलग पड़ी कांग्रेस


नई दिल्ली:

अदाणी ग्रुप (Adani Group) पर लगातार झूठे आरोप लगाकार कांग्रेस (Congress) हर तरफ से घिरती जा रही है. अदाणी ग्रुप पर अमेरिका में घूस देने के आरोप लगे थे. लेकिन, ग्रुप ने बयान जारी कर सभी आरोपों को खारिज किया है. अदाणी ग्रुप को इस दौरान मार्केट और निवेशकों का भी भरपूर साथ मिला. बुधवार को अदाणी ग्रुप ने शेयरों से अच्छी-खासी रिकवरी कर ली थी. गुरुवार को भी इस ग्रुप के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया था. ऐसे में अदाणी मामले में कांग्रेस अब अलग-थलग पड़ती दिख रही है, क्योंकि विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A के कुछ नेताओं ने अलग स्टैंड ले लिया है. इसमें केरल में लेफ्ट पार्टी और ममता बनर्जी की पार्टी TMC के नेता शामिल हैं. वहीं, कई देशों ने भी अदाणी ग्रुप का सपोर्ट किया है.

कांग्रेस का हाथ साथियों ने छोड़ा
यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि दूसरे देश अदाणी के समर्थन में खड़े हो रहे हैं, लेकिन यहां अपने ही देश में कांग्रेस अपने ही देश की कंपनी के खिलाफ मुहीम चला रही है. हालांकि, अब उसके साथी उसका साथ छोड़ रहे हैं. I.N.D.I.A. गठबंधन की सहयोगी TMC ने बयान दिया कि वो नहीं चाहती कि अदाणी मुद्दे पर संसद में गतिरोध जारी रहे, जनहित के और मुद्दे भी हैं, जिनपर बात होनी चाहिए. 

केरल की लेफ्ट पार्टी ने किया सपोर्ट
इसी I.N.D.I.A. गठबंधन की लेफ्ट पार्टी की सरकार केरल में है. वहां की सरकार ने अदाणी विड़िन्यम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के साथ विड़िन्यम पोर्ट प्रोजेक्ट को पांच साल बढ़ाने का करार किया. केरल के सीएम पिनराई विजयन ने X पर एक पोस्ट जारी कर कहा कि 10 हजार करोड़ की लागत से इसकी क्षमता बढ़ाई जाएगी. 

जगन मोहन रेड्डी ने अदाणी ग्रुप पर लगे आरोपों को किया खारिज
आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी ने अदाणी ग्रुप से जुड़े लोगों पर घूस के आरोपों को खारिज किया है. आंध्र में प्रोजेक्ट के लिए घूस देने के आरोप अमेरिका में लगे हैं. जगन ने कहा है कि ये करार दो सरकारी एजेंसियों के बीच हुआ और इसमें किसी बाहरी व्यक्ति की कोई भूमिका नहीं थी. इससे साबित होता है कि जब बाहरी व्यक्ति की भूमिका ही नहीं थी तो रिश्वत की बात ही बेमानी है. ये करार आंध्र प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी (APEPDCL) और केंद्रीय एजेंसी सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी SECI के बीच हुआ था. SECI ने देश में 12 गीगावॉट की रिन्यूएबल एनर्जी आपूर्ति के लिए टेंडर निकाला था. 

मानहानि का करेंगे दावा 
अब जगन ने बताया है कि चूंकि अदाणी ग्रुप ने सबसे सस्ती बिजली का प्रस्ताव दिया था, इसलिए ये करार हुआ. बिजली की दर 2.49 रुपये थी . जगन ने जानकारी दी कि वो मीडिया संस्थान आंध्र ज्योति और ईनाडू के खिलाफ गलत खबर छापने के लिए 100 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा करेंगे. जगन ने गौतम अदाणी और उनकी मुलाकात पर उठाए जा रहे सवालों को भी दरकिनार किया और कहा कि उद्योगपतियों और नेताओं के बीच मुलाकात सामान्य बात है. छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर की स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिब्यूशन बोर्ड ने भी बिजली खरीद के कॉन्ट्रैक्ट साइन किए थे. आपको बता दें कि इससे पहले बीजेडी भी रिश्वत के आरोपों को खारिज कर चुकी है.

अदाणी ग्रुप को समर्थन देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी मिल रहा है. इजरायल, तंजानिया समेत कई देशों ने अदाणी ग्रुप का समर्थन किया है.

अदाणी ग्रुप से निवेश चाहता है इजरायल  
आज इजरायल के राजदूत रूवेन अजर ने भी एक तरह से अमेरिका में लगे आरोपों को दरकिनार कर दिया. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं अदाणी ग्रुप इजरायल में निवेश करता रहे. न्यूज एजेंजी ‘रॉयटर्स’ के साथ इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इजरायल को कोई दिक्कत नजर नहीं आती और उम्मीद है कि जो भी मसले हैं, उन्हें अदाणी ग्रुप सुलझा लेगा. इजरायल के हाफिया पोर्ट में अदाणी ग्रुप की 70% हिस्सेदारी है. कई दूसरे इजरायली प्रोजेक्ट में भी अदाणी ग्रुप का निवेश है.

श्रीलंका और तंजानिया कॉन्ट्रैक्ट रखेंगे बरकरार
श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी और तंजानिया सरकार ने अदाणी ग्रुप के साथ अपने समझौतों पर प्रतिबद्धता जताई है. अबू धाबी की IHC ने भी अदाणी ग्रुप में अपना विश्वास बरकरार रखा है. अदाणी ग्रुप श्रीलंका में पोर्ट स्ट्रक्चर के विस्तार में अहम भूमिका निभा रहा है. कोलंबो टर्मिनल में 1 अरब डॉलर के निवेश के साथ यह प्रोजेक्ट श्रीलंका के पोर्ट एरिया में सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश है. 

श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी के चेयरमैन एडमिरल सिरिमेवन रानसिंघे (रिटायर्ड) ने कहा है कि प्रोजेक्ट को रद्द करने पर कोई चर्चा नहीं हुई है. यह प्रोजेक्ट अगले कुछ महीनों में शुरू हो जाएगी. हालांकि, श्रीलंका सरकार के प्रवक्ता नलिंदा जयतिस्सा ने 26 नवंबर को कहा था कि देश ने अदाणी ग्रुप के स्थानीय निवेशों की जांच शुरू कर दी है.

तंजान‍िया ने भी जताया भरोसा
तंजानिया सरकार ने भी अदाणी पोर्ट्स के साथ अपने समझौतों पर प्रतिबद्धता दोहराई है. सरकार का मानना है कि चल रही परियोजनाओं को लेकर कोई चिंता नहीं है. सभी कॉन्ट्रैक्ट तंजानिया के कानून के अनुसार हैं. मई 2024 में तंजानिया और अदाणी पोर्ट्स ने दार एस सलाम बंदरगाह पर कंटेनर टर्मिनल 2 के संचालन के लिए 30 साल का समझौता किया था. इसके अलावा अदाणी पोर्ट्स ने तंजानिया इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल सर्विसेज में 9.5 करोड़ डॉलर में 95 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की थी.

नॉर्वे के राजनयिक ने पूछा- कब रुकेगा अमेरिकी अतिक्रमण
नॉर्वे के राजनयिक और UN एनवायरमेंट प्रोग्राम के फॉर्मल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एरिक सोलहेम ने अदाणी ग्रुप को लेकर अमेरिकी सरकार की रिपोर्ट की आलोचना की है. सोलहेम ने इसे ‘अमेरिकी अतिक्रमण’ कहते हुए रिपोर्ट की ग्लोबल मीडिया कवरेज पर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा – “अमेरिकी अतिक्रमण कब रुकेगा? आरोपों में वास्तविक रिश्वत पेमेंट या अदाणी ग्रुप के लीडर्स की संलिप्तता के सबूत नहीं हैं. न ही इस बात का कोई सबूत है कि अदाणी के अधिकारियों ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी थी. ये आरोप केवल इस दावे पर आधारित है कि रिश्वत का वादा किया गया था या इस पर चर्चा की गई थी. इस अमेरिकी अतिक्रमण के लोगों के जीवन पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं.”

अदाणी ग्रुप के शेयर लगातार दूसरे दिन चढ़े
अदाणी ग्रुप पर इसी चौतरफा भरोसे का तकाजा है कि गुरुवार को अदाणी ग्रुप के शेयर लगातार दूसरे दिन चढ़े. ये ख़ास इसलिए है, क्योंकि ये ऐसे दिन हुआ जब बाकी शेयर बाजार गिरा हुआ था. निफ्टी और सेंसेक्स दोनों करीब डेढ़ फीसदी गिरे, लेकिन आज अदाणी ग्रुप के ज्यादातर शेयर चढ़े. जिस अदाणी ग्रीन को निशाना बनाया गया, वो आज लगातार दूसरे दिन दस फीसदी चढ़ा. ग्लोबल रेटिंग एजेंसी S&P Global ने Corporate Sustainability Assessment में अदाणी पावर को 100 में 67 अंक दिए हैं. जबकि पूरे सेक्टर को मिलने वाला औसत अंक 42 है. ये अंक कंपनियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर दिए जाते हैं.

(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)


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न्यायाधीशों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

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mpojkr1k_court-generic-fourt-files-generic-files-in-court-pixabay_625x300_11_October_22 न्यायाधीशों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट


नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि न्यायाधीशों को एक संन्यासी की तरह जीवन जीना चाहिए और घोड़े की तरह काम करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और निर्णयों के बारे में कोई राय व्यक्त नहीं करनी चाहिए. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह मौखिक टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट की यह पीठ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दो महिला न्यायिक अधिकारियों की बर्खास्तगी से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी.

कोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका में दिखावटीपन के लिए कोई जगह नहीं है. पीठ ने कहा, ‘‘न्यायिक अधिकारियों को फेसबुक का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. उन्हें निर्णयों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कल यदि निर्णय का हवाला दिया जाएगा, तो न्यायाधीश पहले ही किसी न किसी रूप में अपनी बात कह चुके होंगे.”

पीठ ने कहा, ‘‘यह एक खुला मंच है…आपको एक संत की तरह जीवन जीना होगा, पूरी मेहनत से काम करना होगा. न्यायिक अधिकारियों को बहुत सारे त्याग करने पड़ते हैं. उन्हें फेसबुक का बिल्कुल प्रयोग नहीं करना चाहिए.”

बर्खास्त महिला न्यायाधीशों में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने पीठ के विचारों को दोहराते हुए कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी या न्यायाधीश को न्यायिक कार्य से संबंधित कोई भी पोस्ट फेसबुक पर नहीं डालनी चाहिए.

यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, जो न्यायमित्र हैं, द्वारा बर्खास्त महिला न्यायाधीश के खिलाफ विभिन्न शिकायतों के बारे में पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद आई. अग्रवाल ने पीठ को बताया कि महिला न्यायाधीश ने फेसबुक पर भी एक पोस्ट डाली थी.

ग्यारह नवंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने कथित असंतोषजनक प्रदर्शन के कारण राज्य सरकार द्वारा छह महिला सिविल न्यायाधीशों की बर्खास्तगी का स्वत: संज्ञान लिया था. हालांकि, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्ण अदालत ने एक अगस्त को अपने पहले के प्रस्तावों पर पुनर्विचार किया और चार अधिकारियों ज्योति वरकड़े, सुश्री सोनाक्षी जोशी, सुश्री प्रिया शर्मा और रचना अतुलकर जोशी को कुछ शर्तों के साथ बहाल करने का फैसला किया, जबकि अन्य दो अदिति कुमार शर्मा और सरिता चौधरी को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया.

शीर्ष अदालत उन न्यायाधीशों के मामलों पर विचार कर रही थी, जो क्रमशः 2018 और 2017 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे.
(इनपुट एजेंसियों से भी)

यह भी पढ़ें –

इलाहाबाद HC के जज ने ऐसा क्या कहा? उठी महाभियोग की मांग; जानिए पूरा मामला

महाभियोग से कैसे हटाए जाते हैं सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज, अब तक कितने प्रयास हुए हैं सफल 



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अनुकूल नीतियों, कारोबारी सुगमता से बिहार अब निवेश का आकर्षक स्थल

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240lhlho_nitish-kumar_625x300_30_August_24 अनुकूल नीतियों, कारोबारी सुगमता से बिहार अब निवेश का आकर्षक स्थल


पटना:

 विकास के लिहाज से पिछड़े राज्यों में आने वाले बिहार की तस्वीर अब बदल रही है. राज्य अब अनूकूल नीतियों तथा कारोबारी सुगमता की वजह से निवेश का आकर्षक स्थल बन रहा है. अदाणी समूह से लेकर कोका-कोला तक ने यहां अरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएं की हैं. निवेश के लिए और भी कंपनियां यहां आने वाली हैं.

राज्य के उद्योग और पर्यटन मंत्री नीतीश मिश्रा बिहार को एक ऐसे राज्य में बदल रहे हैं, जो पूर्वी भारत में निवेशकों के लिए प्रवेश द्वार बन सकता है. उनका कहना है, बिहार की औद्योगिक क्षमता असीमित है. बिहार धारणा का शिकार रहा है. लेकिन अब यह बदल रहा है.

अदाणी समूह ने राज्य में 8,700 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है, जबकि अंबुजा सीमेंट्स 1,200 करोड़ रुपये की इकाई स्थापित कर रही है. कोका-कोला अपनी बोतलबंद क्षमता का विस्तार कर रही है.

मिश्रा ने कहा कि राज्य निवेशकों को ब्याज छूट से लेकर राज्य जीएसटी की वापसी, स्टाम्प शुल्क छूट, निर्यात सब्सिडी और परिवहन, बिजली तथा भूमि शुल्क के लिए रियायतें प्रदान कर रहा है.

साथ ही न केवल अनुमोदन के समय बल्कि प्रोत्साहनों के वितरण में भी एकल खिड़की व्यवस्था के तहत मंजूरी दी जा रही है. उन्होंने कहा, ‘‘किसी को सचिवालय आने की जरूरत नहीं है. किसी को सरकारी कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। हम जो भी वादा कर रहे हैं, उसे पूरा कर रहे हैं.”

उद्योग मंत्री ने कहा कि राजकोषीय प्रोत्साहनों का वितरण बिना किसी दरवाजे पर दस्तक दिए हर तिमाही में होता है. साथ ही किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए नियमित निगरानी की जाती है.

उन्होंने कहा कि बिहार राज्य भर के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित पूरी तरह से तैयार लगभग 24 लाख वर्ग फुट औद्योगिक ‘शेड’ की पेशकश कर रहा है. उसमें सभी प्रकार का बुनियादी ढांचा उपलब्ध है. यह जगह किसी भी उद्योग के लिए निर्धारित दर पर उपलब्ध है. राज्य ने उद्योग स्थापित करने के लिए 3,000 एकड़ का भूमि बैंक भी बनाया है.

उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था की समस्या का समाधान किया गया है. साथ ही कोलकाता और हल्दिया में बंदरगाहों के साथ-साथ झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों में कच्चे माल के स्रोतों और खनिज भंडार तक पहुंचने के लिए बुनियादी ढांचे के साथ लगभग चौबीसों घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है.

मिश्रा ने कहा कि राज्य में 19-20 दिसंबर को होने वाले ‘बिजनेस कनेक्ट’ 2024 निवेशक शिखर सम्मेलन के दूसरे संस्करण में बिहार की नीतियों और उपलब्धियों का रखा जाएगा. उल्लेखनीय है कि निवेशक सम्मेलन का पहला संस्करण काफी सफल रहा था. उसमें निवेशकों ने 35,000 करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धताएं जताई थीं.

बिहार सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण, आईटी और आईटी-संबद्ध सेवाओं (आईटीईएस), कपड़ा और चमड़ा क्षेत्रों को उच्च प्राथमिकता के रूप में रखा है. उनमें से प्रत्येक में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग नीतियां हैं. इसके अलावा, सरकार एथनॉल और बायोगैस जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर भी बड़ा काम कर रही है.

मिश्रा ने कहा कि बिहार में बदलाव का श्रेय केंद्र और राज्य के मिलकर काम करने को जाता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली प्रगतिशील विचारधारा वाली केंद्र सरकार के साथ, क्षेत्रीय असंतुलन अब बीते दिनों की बात है. अब हर राज्य के पास मौका है.

मिश्रा ने कहा कि बिहार ने पिछले दो दशक में इस अवसर का लाभ उठाया है. एक राज्य जो लगातार कम वृद्धि दर के लिए जाना जाता था, अब राष्ट्रीय औसत से बेहतर वृद्धि दर हासिल कर रहा है.

राज्य ने सड़कों और राजमार्गों से लेकर गोदामों और बड़े फूड पार्क, चमड़ा प्रसंस्करण केंद्र, एकीकृत विनिर्माण संकुल और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क तक बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का निर्माण किया है. यह अब दो विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) का निर्माण कर रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी नीति अच्छी है और सौभाग्य से बिहार में हमारा नेतृत्व इतना अच्छा रहा है कि इन 19 साल में हमने बहुत अच्छा बुनियादी ढांचा बनाया है. सही मायने में बिहार निवेशकों के लिए तैयार है.”

बिहार की स्थिति विशिष्ट है. पूर्वी और उत्तरी भारत और नेपाल के विशाल बाजारों से निकटता के कारण बिहार को स्थान-विशेष का लाभ प्राप्त है. मूल रूप से कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले राज्य के पास एक बड़ा कृषि और पशु उत्पादन आधार है. यह कृषि आधारित यानी खाद्य प्रसंस्करण, रेशम और चाय से लेकर चमड़े और गैर-धातु खनिजों तक कई उद्योगों के लिए कच्चे माल की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति करता है.

इसके अलावा, पानी की कोई समस्या नहीं है और पर्याप्त संख्या में सस्ता श्रम उपलब्ध है. मिश्रा ने कहा, ‘‘ये हमारी मुख्य ताकत है और आने वाले दिनों में, बिहार में भारत के पूरे पूर्वी हिस्से के लिए वृद्धि का प्रमुख इंजन बनने की क्षमता है. यह बिहार का समय है.”

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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काल बना स्पीड ब्रेकर, हवा में उछली स्कूटर, सड़क पर घिसट गया शख्स… देखिए हैरान करने वाला VIDEO

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a7l2srbg_dehradun_625x300_12_December_24 काल बना स्पीड ब्रेकर, हवा में उछली स्कूटर, सड़क पर घिसट गया शख्स... देखिए हैरान करने वाला VIDEO


नई दिल्ली:

देहरादून में घंटाघर के सामने बिना चिन्ह वाले स्पीड ब्रेकर से टकराने के बाद एक स्कूटर सवार हवा में उछला और इसके बाद वह सड़क पर गिरा. वह और उसकी स्कूटर कई मीटर तक सड़क पर सरकती हुई आगे गई. गनीमत रही कि स्कूटर सवार को कोई गंभीर चोट नहीं लगी. स्पीड ब्रेकर पर ड्राइवरों को सचेत करने के लिए उनकी मार्किंग नहीं की गई है जिसके कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

NDTV को मिले घटनास्थल के फुटेज में स्कूटर मध्यम गति से स्पीड ब्रेकर की ओर बढ़ती हुई दिख रही है. जैसे ही स्कूटर सवार स्पीड ब्रेकर से टकराता है, स्कूटर अप्रत्याशित रूप से हवा में उछल जाता है. वाहन चालक उछलकर नीचे गिर जाता है. वह कुछ देर रुकने के बाद उठता है और वहां से चला जाता है.

स्पीड ब्रेकर वाहनों की गति को नियंत्रित रखने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन इनकी डिजाइन में दोषों के कारण यही स्पीड ब्रेकर कई दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं. देहरादून के इस स्पीड ब्रेकर की स्पष्ट मार्किंग नहीं की गई है. इसके अलावा यह अत्यधिक ऊंचा भी है. इससे चार पहियों वाले वाहनों के लिए इसे पार करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

उचित संकेतक और मार्किंग की कमी के कारण ड्राइवरों के लिए स्पीड ब्रेकर का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है. इससे यहां हादसे हो रहे हैं.

इस स्पीड ब्रेकर के कारण कथित तौर पर सात दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें तीन साल के एक बच्चे सहित दो लोग घायल हुए हैं.

स्पीड ब्रेकर के कारण हादसे का यह पहला मामला नहीं है. अक्टूबर में गुरुग्राम में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी. तब गोल्फ कोर्स रोड पर एक तेज रफ़्तार BMW कार नए बनाए गए स्पीड ब्रेकर पर से उछल गई थी.

कैमरे में कैद हुई इस घटना में कार जमीन से काफी ऊपर उछलती हुई दिखी थी. कार उस स्थान से करीब 15 फीट दूर जाकर गिरी थी. उसी वीडियो में दो ट्रक भी बिना किसी निशान वाले स्पीड ब्रेकर से टकराकर हवा में उछलते हुए देखे गए थे.

इस घटना को लेकर कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर हुई तीखी प्रतिक्रिया पर अधिकारियों ने कार्रवाई की थी. गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) ने ड्राइवरों को चेतावनी देने के लिए “आगे स्पीड ब्रेकर है” लिखा हुआ एक साइनबोर्ड लगवाया. उन्होंने स्पीड ब्रेकर की थर्मोप्लास्टिक व्हाइट पेंट से मार्किंग भी कराई थी. इस तरह पेंट करने से विशेष रूप से रात में स्पीड ब्रेकर साफ दिखाई देता है.




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