Blog
NDTV संवाद कार्यक्रम में देश के संविधान के विभिन्न पहलुओं पर हुई गहन चर्चा
[ad_1]

नई दिल्ली:
एनडीटीवी संवाद कार्यक्रम के पहले एपिसोड संविधान @75 में रविवार को 75वीं वर्षगांठ मना रहे देश के संविधान के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा हुई. सुप्रीम कोर्ट के 50वें चीफ जस्टिस रहे डीवाई चंद्रचूड़, 40वें चीफ जस्टिस रहे एके सीकरी, पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू सहित देश की जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं. डीवाई चंद्रचूड़ ने यहां जजों की नियुक्ति वाले कॉलेजियम सिस्टम की पुरजोर वकालत की और कहा कि इसके काम करने को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं. यह संघीय व्यवस्था में बहुत अच्छी व्यवस्था है. वहीं रविशंकर प्रसाद ने कहा कि संविधान की मूल प्रति में जिस तरह से भगवान राम, हनुमान की तस्वीरें लगी हैं, आज अगर संविधान लिखा जाता और इस तरह की तस्वीरें लगतीं तो कहा जाता कि भारत हिंदू राष्ट्र बन गया है. संविधान को बचाने की बात करने वाले संविधान तक को नहीं समझते हैं. किरेन रिजिजू ने कहा कि सन 1976 में संविधान पर सबसे बड़ा हमला किया गया था. संविधान में कही गई बातों का पालन करेंगे तो भारत विकसित होगा.
जजों के राजनीति में जाने पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जज भी एक आम नागरिक हैं और रिटायर होने के बाद वो सब कुछ करने के हकदार हैं, जो एक आम नागरिक कर सकता है. संविधान में जजों के रिटायर होने के बाद किसी काम को करने पर रोक नहीं है. हालांकि, सोसायटी में जजों के लिए हायर स्टैंडर्ड है कि उन्हें कैसे व्यवहार करना चाहिए. तो ये जजों को खुद ही तय करना होगा कि उन्हें क्या करना चाहिए. कॉलेज के दिनों को याद करते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने दिलचस्प किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया कि कॉलेज के दिनों में वह दिल्ली की फेमस मार्केट कनॉट प्लेस में घूमने जाया करते थे. उन दिनों वह डीटीसी की बसों में सफर करते थे और दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस में टाइम पास करने जाते थे.तब हम कहते थे सीपी में टीपी. कई लोग पूछते थे कि ये सीपी में टीपी क्या है? इसका मतलब हमारे लिये था- कनॉट प्लेस में टाइम पास.
कानून मंत्री रहे रविशंकर प्रसाद ने संविधान की मूल प्रति दिखाई और बताया कि इसमें फंडामेंटल राइट्स के ऊपर प्रभु राम की तस्वीर लगी है. इसमें वो लंका विजय के बाद भाई लक्ष्मण और माता सीता के साथ लौट रहे हैं. मूल संविधान में गौतम बुद्ध, महावीर और हनुमान जी की भी तस्वीर लगी है. नटराज की भी तस्वीर लगी है. उन्होंने सभी की तस्वीरें भी दिखाईं और संविधान बनाने वाले सदस्यों के हस्ताक्षर भी दिखाए. इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि संविधान आज बना हुआ होता और अगर इन तस्वीरों को आज लगाया जाता तो क्या कहा जाता कि भारत हिंदू राष्ट्र बन गया है. यही है संविधान को बचाने की बात करने वाले न संविधान को समझते हैं और न संविधान को बनाने वालों की मानसिकता को समझते हैं. मैं साफ बता दूं ये देश लोकतंत्र है. लोकतंत्र से चलेगा. चुनाव से चलेगा. जनता के वोट से चलेगा. इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं विकास भी करेंगे और विरासत को भी बचाएंगे. लाल किले से 15 अगस्त को उन्होंने ये बात कही थी.
कानून मंत्री रहे किरेन रिजिजू ने कहा कि, ”एनडीटीवी ने जो कार्यक्रम रखा है, यह बहुत सही समय पर और बहुत ही उपयोगी कार्यक्रम है. उन्होंने कहा कि सन 1976 में संविधान पर सबसे बड़ा हमला किया गया था. संविधान में कही गई बातों का पालन करेंगे तो भारत विकसित होगा.यह तो सबको मालूम है कि संविधान स्टेटिक नहीं है, संविधान एक जर्नी है. इस सफर में कई बदलाव होते आए हैं और आगे भी होते रहेंगे. लोकतंत्र में कोई भी चीज स्थायी नहीं होती है, लेकिन कुछ मूल चीजें स्थायी होती हैं. उनमें छेड़छाड़ करनी भी नहीं चाहिए. मैंने देश के कानून मंत्री के रूप में भी काम किया है. कई विभागों को हमने देखा है. पूरा ज्ञान हमारे पास नहीं है कि संविधान बनाते समय क्या हुआ था? कुछ छोटी, कुछ बड़ी घटनाएं भी हैं. कई चीजें हैं, जो हमारे सामने उभरकर नहीं आईं हैं. 2010 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी जी ने संविधान यात्रा निकाली. खुद पैदल चले. इससे पहले किसी राजनेता ने ऐसा काम कभी नहीं किया. जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने 2015 में पहली बार संविधान दिवस मनाने की प्रक्रिया शुरू की. जिस पवित्रता के साथ संविधान को अपने जीवन का हिस्सा पीएम मोदी ने बनाया है, मैं बाबा भीमराव आंबेडकर के अलावा किसी और नेता के बारे में सोच भी नहीं सकता, जो संविधान को इतनी इज्जत देते हैं. मगर संविधान के लिए कुछ कर्तव्य भी करना होता है. प्रधानमंत्री मोदी ने आह्वान किया है कि लोगों को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए. आपके अधिकार की रक्षा करना सरकार का दायित्व है.”
देश के 49वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यूयू ललित ने कहा कि संविधान ये नहीं मानता कि सरकार का कोई धर्म हो. हर नागरिक अपना धर्म अपना सकता है. ये उसका अधिकार है. हालांकि, इस देश में धर्म के नाम पर हिंसा और दंगे होते आए हैं. 1947 के दंगे भी धर्म के नाम पर हुए. ये हमारे इतिहास का एक जख्म है. पिछले 75 सालों में हम इससे उबरे हैं, लेकिन जब-तब ये सामने आ जाता है. संविधान तो इसको सपोर्ट नहीं करता. एक राष्ट्र का तो कभी ये उद्देश्य नहीं होता कि हिंसा बढ़े. अभी जो तीन नये आपराधिक कानून आए हैं, उसमें आज तक जो नहीं था, वो सब कुछ है. मॉब लिंचिंग तक पर कानून हैं. जैसे जैसे राष्ट्र आगे बढ़ता जाता है, वैसे वैसे ये कम होता जाना चाहिए.
जस्टिस एके सीकरी ने कहा कि संविधान बने 75 साल हो गए. थॉमस जेफरसन ने 150 साल पहले कहा था कि कोई भी संविधान 17 या 19 साल बाद बदल देना चाहिए. उस समय के दुनिया के संविधान को देखकर उन्होंने कहा था. उस समय अमेरिका का संविधान नया था. आज हमारा संविधान 75 साल हो गए. इस बीच हमारे आसपास और दुनिया के कई देशों का संविधान बदल गया. कइयों के तो 3-4 बार संविधान बदल चुके हैं. हमारे संविधान की खासियत ये है कि मानव अधिकारों का खास ख्याल रखा गया था.
जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा ने कहा कि संविधान के मूल्यों की आधारशिला संविधान बनाने वालों ने रखा. मगर बदलाव प्रकृति का नियम है. इसलिए वो हमेशा एक जैसा नहीं रह सकता. ये अच्छी बात है कि संविधान में अमेंडमेंड की गुंजाइश है. भारत के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विकास सिंह ने कहा कि संविधान में समाज में सभी को साथ लेकर चलने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी. अब यही देखते हुए महिलाओं के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था की गई है. न्यायिक तंत्र में भी इसकी व्यवस्था होनी चाहिए. इसलिए संविधान में बदलाव देश को आगे बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नलिन कोहली ने कहा कि 75 साल में हम काफी आगे बढ़ गए और संविधान भी बदलावों के साथ आगे बढ़ता आया. यही संविधान की खूबसूरती है. पहले कोई मानता नहीं था कि भारत विकसित देश बन सकता है, लेकिन अब सब मानते हैं कि 2047 में न होकर 2040, 2045 तक भी हम विकसित देश बन सकते हैं और इसमें संविधान को भी उस हिसाब से बदलना होगा. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि संविधान बनाने वालों ने इसे बनाते समय सोचा था कि भारत इस हिसाब से विकसित होगा. उन्होंने आगे आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए भी संविधान में बदलाव का रास्ता छोड़ रखा था. इस संविधान को बदलने या दूसरा संविधान को लाने की जरूरत नहीं है.
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि इंडिया से ज्यादा विविधता वाला देश कोई नहीं है. हिंदुस्तान का जो इलेक्शन कमीशन है, उसे संविधान में सबसे पहले जोड़ा गया था और यही इसकी महत्ता बताता है. यूरोप के 50, अफ्रीका के 54 देश हैं उससे बड़ा हमारा देश का चुनाव है. 90 देशों के बराबर भारत का एक चुनाव है. हिलेरी क्लिंटन ने तो कहा था कि ये गोल्ड स्टैंडर्ड है. संविधान के जानकार फैजान मुस्तफा ने कहा कि हमने अपने संविधान में दूसरे देशों से लिया बहुत कुछ है, लेकिन उसमें कुछ जोड़कर या संसोधन करके. संविधान का मूल उद्देश्य शक्ति देना नहीं, बल्कि शक्ति पर नियंत्रण रखना है. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि इंडिया से ज्यादा विविधता वाला देश कोई नहीं है. यही हमारी ईमानदारी है. हिंदुस्तान का जो इलेक्शन कमीशन है, उसका कमीशन सबसे पहले बना था और यही इसकी महत्ता बताता है.
इंटरनेट फ्रीडम के सह-संस्थापक और अधिवक्ता अपार गुप्ता ने कहा कि जिला अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल व्यवस्था लागू हो गई है. सुप्रीम कोर्ट में तो अब ज्यादातर वकील फाइलें कम और आईपैड लिए ज्यादा दिख रहे हैं. अधिवक्ता पल्लवी बरूआ ने कहा कि जब हम लॉ की पढ़ाई कर रहे थे तो किताबों ही पढ़ाई का साधन थीं, मगर वो बहुत महंगी होती थीं. डिजिटल होने के बाद सारी किताबें अब आईपैड में आ गईं हैं. लीगल रिसर्च काफी पहले शुरू हो गया था और अब काफी कुछ इंटरनेट पर उपलब्ध है.अधिवक्ता खुशबू जैन ने कहा कि वकीलों का डिजिटल कोर्ट में उपस्थित होना बहुत जरूरी हो गया है. कई बार वकीलों को सिर्फ हाजिरी के लिए कोर्ट में खुद में आकर उपस्थित होना पड़ता था. सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट आने में वकीलों का काफी समय और पैसा बर्बाद होता था. इससे आरोपियों, गवाहों और केस करने वालों को फायदा हो रहा है.अधिवक्ता हितेश जैन ने बताया कि संविधान में तकनीक का इस्तेमाल कर न्याय आसान हो सकता है. नये तीनों आपराधिक कानूनों में तकनीक का खास ख्याल रखा गया है.जस्टिस चंद्रचूड़ ने बहुत सही कहा है कि न्यायिक तंत्र से जुड़े लोगों को सोशल मीडिया की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए.
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने विपक्ष की और से संविधान के खतरे में होने की बात कहे जाने से जुड़े सवाल पर कहा कि जब हम कहते हैं कि हनन हो रहा है तो बड़ी बात कहते हैं. मूल्यों का हनन हो रहा है.संविधान के मूल तत्वों के साथ कमी की जा रही है. संविधान के मूल्यों वाले कई स्तंभ हैं, धर्म निरपेक्षता, पंथ निरपेक्षता, सौहार्द, संघीय ढांचा वगैरह…इसके अलावा हमारे स्तंभ हैं संसदीय गणतंत्र, सीएजी, ईसी… यदि आप स्तभों को कमजोर करते हैं, तो हनन कर रहे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि संविधान 75 साल में सिर्फ एक ही बार तोड़ा गया था, इमरजेंसी के समय. तब हम 14 महीने जेल में रहे थे, सत्याग्रह करके गए थे. देश में एक लाख 30 हजार लोग बंदी बनाए गए थे. यह देश को पता भी नहीं चला, सेंसरशिप थी. इमरजेंसी क्यों लगाई गई थी, क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा जी को पद से हटाया था. पूर्व राज्यसभा सांसद और पूर्व राजदूत डॉ पवन वर्मा ने कहा कि, ”संविधान महज एक कागज का टुकड़ा है, यदि उसकी आत्मा को जीवित न रखा जाए. इमरजेंसी में संविधान के कुछ मूल सिद्धांतों का हनन हुआ था. वह 1977 की बात है. ऐसा नहीं है कि सरकारें आज की हों या पहले की हों, संविधान की आड़ में संविधान की आत्मा पर प्रहार होता चला आया है.”
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर संतोष कुमार ने ‘NDTV इंडिया संवाद’ कार्यक्रम के बारे में बताया कि यह एक ऐसे सिलसिले की शुरुआत है, जो बड़े मुद्दों और विचारों का मंच बनेगा. उन्होंने बताया कि इस सीरीज में देश और जनता के मुद्दों पर गंभीर और रोचक बातचीत की जाएगी. ‘संविधान @75’ इसकी पहली किस्त है. देश जब संविधान की 75वां वर्षगांठ का जश्न मना रहा है, ऐसे में यह बेहद खास कार्यक्रम इसमें एक नया आयाम जोड़ेगा.
[ad_2]
Source link
Share this content:
Blog
पायल कपाड़िया ने रचा इतिहास, गोल्डन ग्लोब्स में हासिल किया नामांकन
[ad_1]

नई दिल्ली:
भारत की मशहूर निर्देशन पायल कपाड़िया ने इतिहास रच डाला है. उनकी फिल्म ऑल वी इमेजिन एज लाइट को गोल्डन ग्लोब्स के सर्वश्रेष्ठ निर्देशक में नामांकन मिला है. पायल कपाड़िया के लिए गोल्डन ग्लोब्स में नामांकन हासिल करना दूसरी बड़ी कामयाबी है. इससे पहले उन्होंने फिल्म ऑल वी इमेजिन एज लाइट में इस साल के कान फिल्म महोत्सव बेस्ट डायरेक्टर और फिल्म की एक्ट्रेस अनसूया सेनगुप्ता को बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब हासिल किया था. पायल कपाड़िया को ऑल वी इमेजिन एज लाइट के लिए 77वें कान फिल्म फेस्टिवल में ग्रां प्री जीता था.
मलयालम-हिंदी फीचर फिल्म ऑल वी इमेजिन एज लाइट की कहानी मुंबई की तीन महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सड़क मार्ग से तटीय शहर की एक यात्रा पर जाती हैं. फिल्म में कानी कुश्रुति, दिव्या प्रभा और छाया कदम ने मुख्य भूमिका निभाई है.
2024 गोल्डन ग्लोब्स पुरस्कार के नामांकनों की घोषणा
2024 गोल्डन ग्लोब्स पुरस्कार के लिए नामांकनों की सूची जारी कर दी गई है. इस साल कई शानदार फिल्में और टेलीविजन सीरीज़ इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए दौड़ में हैं.
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – टेलीविजन श्रृंखला (ड्रामा):
– डोनाल्ड ग्लोवर, Mr. and Mrs. Smith
– जैक गिलेनहाल, Presumed Innocent
– गैरी ओल्डमैन, Slow Horses
– एडी रेडमायने, The Day of the Jackal
– हिरोयुकी सनाडा, Shogun
– बिली बॉब थॉर्नटन, Landman
सर्वश्रेष्ठ मूल संगीत – मोशन पिक्चर:
– वोल्कर बर्टलमैन, Conclave
– डैनियल ब्लमबर्ग, The Brutalist
– क्रिस बॉवर्स, The Wild Robot
– क्लेमेंट ड्युकोल, Camille, Emilia Perez
– ट्रेंट रेज़नोर और एटिकस रॉस, Challengers
– हंस ज़िमर, Dune: Part Two
सर्वश्रेष्ठ सीमित श्रृंखला, एंथोलॉजी श्रृंखला या मोशन पिक्चर – टेलीविजन:
– Baby Reindeer
– Disclaimer
– Monsters: The Lyle and Erik Menendez Story
– The Penguin
– Ripley
– True Detective: Night Country
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – टेलीविजन श्रृंखला (कॉमेडी या म्यूजिकल):
– क्रिस्टन बेल, Nobody Wants This
– क्विंटा ब्रुन्सन, Abbott Elementary
– आयो एडेबिरी, The Bear
– सेलेना गोमेज़, Only Murders in the Building
– कैथरीन हान, Agatha All Along
– जीन स्मार्ट, Hacks
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – टेलीविजन श्रृंखला (कॉमेडी या म्यूजिकल):
– एडम ब्रोडी, Nobody Wants This
– टेड डैन्सन, A Man on the Inside
– स्टीव मार्टिन, Only Murders in the Building
– जेसन सीगल, Shrinking
– मार्टिन शॉर्ट, Only Murders in the Building
– जेरेमी एलन व्हाइट, The Bear
सर्वश्रेष्ठ मूल गीत – मोशन पिक्चर:
– Beautiful That Way, The Last Showgirl, संगीत और गीत: माइलि साइरस, लिक्का ली, एंड्रयू वायट
– Compress/Repress, Challengers, संगीत और गीत: ट्रेंट रेज़नोर, एटिकस रॉस और लुका ग्वाडागिनो
– El Mal, Emilia Perez, संगीत और गीत: क्लेमेंट ड्युकोल, कैमेल और जैक्स ऑडियार
– Forbidden Road, Better Man, संगीत और गीत: रॉबी विलियम्स, फ्रेडी वेक्सलर और साचा स्कारबेक
– Kiss The Sky, The Wild Robot, संगीत और गीत: डेलैसी, जॉर्डन जॉनसन, स्टीफन जॉनसन, मारेन मोरिस, माइकल पोलैक और अली टेम्पोसी
– Mi Camino, Emilia Perez, संगीत और गीत: क्लेमेंट ड्युकोल और कैमेल
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – सीमित श्रृंखला, एंथोलॉजी श्रृंखला या मोशन पिक्चर – टेलीविजन:
– केट ब्लैंचेट, Disclaimer
– जोडी फोस्टर, True Detective: Night Country
– क्रिस्टिन मिलियोटी, The Penguin
– सोफिया वर्गारा, Griselda
– नाओमी वॉट्स, Feud: Capote vs. The Swans
– केट विंसलेट, The Regime
सर्वश्रेष्ठ मोशन पिक्चर – एनिमेटेड:
– Flow
– Inside Out 2
– Memoir of a Snail
– Moana 2
– Wallace & Gromit: Vengeance Most Fowl
– The Wild Robot
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – सहायक भूमिका – मोशन पिक्चर:
– एरियाना ग्रांडे, Wicked
– सेलेना गोमेज़, Emilia Perez
– फेलिसिटी जोन्स, The Brutalist
– मार्गरेट क्वॉली, The Substance
– इसाबेला रॉसेलिनी, Conclave
– जोई सैलडाना, Emilia Perez
सर्वश्रेष्ठ निर्देशक – मोशन पिक्चर:
– जैक्स ऑडियार, Emilia Perez
– सीन बेकर, Anora
– एडवर्ड बर्गर, Conclave
– ब्रैडी कॉर्बेट, The Brutalist
– कोराली फार्जात, The Substance
– पायल कपाड़िया, All We Imagine as Light
वहीं बात करें गोल्डन ग्लोब अवार्ड्स की तो 82वें वार्षिक गोल्डन ग्लोब अवार्ड्स का सीधा प्रसारण सीबीएस पर बेवर्ली हिल्टन से और रविवार, 5 जनवरी, 2025 को शाम 5 बजे किया जाएगा. निक्की ग्लेसर 2025 के गोल्डन ग्लोब्स की मेज़बानी करेंगी और एमी विजेता निर्माता ग्लेन वीस और रिकी किर्शनर लगातार दूसरे साल शो रनर के रूप में काम करेंगे. पहले यह घोषणा की गई थी कि वियोला डेविस को सेसिल बी. डेमिले पुरस्कार और टेड डैनसन को कैरल बर्नेट पुरस्कार मिलेगा, जो टीवी उत्कृष्टता को मान्यता देता है.
[ad_2]
Source link
Share this content:
Blog
IIT कानपुर से इंजीनियरिंग, फाइनेंस और टैक्सेशन के एक्सपर्ट… RBI के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा से मिलिए
[ad_1]

नई दिल्ली:
रेवेन्यू सेक्रेटरी संजय मल्होत्रा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नए गवर्नर अपॉइंट हुए हैं. मल्होत्रा 11 दिसंबर 2024 को RBI के 26वें गवर्नर के तौर पर कार्यभार संभालेंगे. मौजूदा गवर्नर शक्तिकांत दास का कार्यकाल 10 दिसंबर को खत्म हो रहा है. RBI गवर्नर के तौर पर मल्होत्रा का कार्यकाल 3 साल का होगा.
सरकार ने 2022 में रिजर्व बैंक (RBI) के डायरेक्टर के रूप में डिपाटर्मेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) के सचिव संजय मल्होत्रा को नॉमिनेट किया था. सोमवार को मोदी कैबिनेट ने संजय मल्होत्रा के अपॉइंटमेंट को मंजूरी दी. आइए जानते हैं कौन हैं संजय मल्होत्रा, जो देश के सेंट्रल बैंक की सारी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं:-
भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में किसी भी घटना के प्रभाव से निपटने के लिए अच्छी स्थिति में: RBI
राजस्थान कैडर के IAS ऑफिसर
संजय मल्होत्रा राजस्थान कैडर के 1990 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई राजस्थान में ही हुई है. IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस में उन्होंने इंजीनियरिंग की है. इसके बाद अमेरिका के
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर डिग्री की पढ़ाई की है.
33 साल का एक्सपीरिएंस
संजय मल्होत्रा को पास 33 साल का एक्सपीरिएंस हैं. उन्होंने पावर, फाइनेंस, टैक्सेशन, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और माइन्स समेत तमाम क्षेत्रों में काम किया है. मल्होत्रा के पास राज्य और केंद्र सरकार दोनों में फाइनेंस और टैक्सेशन में काम करने का अनुभव भी है.
राजकोषीय घाटा अक्टूबर के अंत में पूरे साल के लक्ष्य का 46.5 प्रतिशत: सरकारी आंकड़े
वित्त मंत्रालय में सेक्रेटरी (रेवेन्यू) के रूप में काम करने से पहले उन्होंने भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग में सचिव का पद संभाला था.
सुधारवादी अफसरों में होती है गिनती
फाइनेंस के मामलों में संजय मल्होत्रा की गिनती सुधारवादी और मजबूत काम करने वाले अफसरों में होती है. उन्हें राजस्थान के करीब सभी विभागों में काम करने का अनुभव है. वो PM मोदी के पसंदीदा अफसरों में भी शामिल हैं.
टैक्स पॉलिसी मेकिंग में अहम भूमिका
संजय मल्होत्रा ने डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स के लिए टैक्स पॉलीसी मेकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
RBI ने लगातार 11वीं बार Repo Rate में नहीं किया बदलाव, 6.50% पर बरकरार, लोन की EMI पर राहत नहीं
[ad_2]
Source link
Share this content:
Blog
150 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म को अक्षय कुमार ने अपनी गलती से बनाया फ्लॉप ? मेकर्स को लगा इतना चूना
[ad_1]
अक्षय कुमार की इस आदत की वजह से फ्लॉप हुई थी मूवी सम्राट पृथ्वीराज
नई दिल्ली:
साल 2022 में अक्षय कुमार की एक फिल्म आई थी पृथ्वीराज चौहान. जैसा कि नाम से ही जाहिर है ये फिल्म पृथ्वी राज चौहान की लाइफ पर बेस्ड थी. उनके साथ उनके शौर्य के साथ उनकी संयोगिता के प्रति चाहत को भी फिल्म में दिखाया गया था. लेकिन ये फिल्म अक्षय कुमार की दूसरी फिल्मों की तरह कोई कमाल नहीं दिखा सकी थी. इसकी क्या वजह थी. फिल्म क्रिटिक और ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा ने इस बारे में एनडीटीवी से खास बातचीत की और बताया पृथ्वीराज चौहान दर्शकों की कसौटी पर खरी क्यों नहीं उतरी.
क्यों फ्लॉप हुई अक्षय कुमार की मूवी?
एनडीटीवी ने कोमल नाहटा से जानना चाहा कि क्या बॉलीवुड के एक्टर्स साउथ के हीरोज जितनी मेहनत, रोल में उतरने के लिए नहीं करते हैं. इसके जवाब में कोमल नाहटा ने कहा कि ये कहना गलत होगा कि बॉलीवुड के एक्टर्स रोल में ढलने के लिए मेहनत नहीं करते हैं. शाहरुख खान, आमिर खान जैसे स्टार्स भरपूर मेहनत करते हैं. उन्होंने सम्राट पृथ्वीराज मूवी का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी फिल्म बनाना हो तो मेहनत ज्यादा लगती है. जो अक्षय कुमार ने इस फिल्म के लिए नहीं की. इस फिल्म में पृथ्वीराज चौहान के हाव भाव पकड़ने के लिए थोड़ी ज्यादा मेहनत की जानी चाहिए थी. लेकिन रोल में उतरने की कोशिश ही नहीं की गई. जिसका नतीजा ये हुआ कि फिल्म को दर्शकों ने पसंद नहीं किया.
दो साल पहले रिलीज हुई थी फिल्म
अक्षय कुमार की फिल्म सम्राट पृथ्वीराज साल 2022 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म में मिस वर्ल्ड रही मानुषी छिल्लर संयोगिता के रोल में थीं. सोनू सूद, चंदर वरदाई के रोल में थे. आशुतोष राणा ने जय चंद्र का रोल अदा किया था. फिल्म से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स में इसका बजट करीब 200 करोड़ रु. बताया गया. लेकिन फिल्म सौ करोड़ का मार्क भी टच नहीं कर पाई. इस फिल्म को डिजास्टर मूवी माना गया.
[ad_2]
Source link
Share this content:
-
Blog2 years ago
इजरायल-लेबनान में क्या आज होगा सीजफायर का ऐलान? रुक जाएगी 60 दिनों के लिए जंग
-
Blog2 years ago
महाभारत से लेकर चंद्रकांता तक, 90 के दशक के ये 15 सीरियल अब आए ओटीटी पर, देखते ही याद आ जाएगा बचपन
-
Blog2 years ago
कैटरीना कैफ का डांस वीडियो, अक्षय कुमार के साथ टिप-टिप बरसा पानी के साथ डांस, जानें अब क्यों हो रहा है वायरल
-
Blog2 years ago
अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की 49 साल पुरानी फोटो वायरल, जब शोले के सेट पर स्क्रिप्ट पढ़ते हुए आए थे दो सुपरस्टार्स
-
Blog2 years ago
देवेंद्र फडणवीस तीसरी बार बने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, अजित पवार और एकनाथ शिंदे ने ली डिप्टी CM की शपथ
-
Blog2 years ago
सीरिया में बशर के शासन का अंत, देश पर विद्रोहियों का कब्जा; जानिए अब यहां से आगे क्या हैं रास्ते
-
Blog2 years ago
Khan Sir Latest News: पटना में प्रदर्शन के बाद बिगड़ी खान सर की तबीयत, अस्पताल में कराया गया भर्ती | Khan Sir Latest News | Khan Sir health update | khan sir health news
-
Blog2 years ago
अजय देवगन और अभिषेक बच्चन पर भारी पड़े शाहरुख खान, 13 साल पुरानी फिल्म के आगे फेल हुई नाम और आई वांट टू टॉक
