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झारखण्ड विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में CM, स्पीकर समेत कई बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर
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रांची:
झारखंड विधानसभा चुनाव का दूसरा चरण कई मायनों में सत्ता का द्वार खोलने में निर्णायक भूमिका निभाएगा. इस चरण में 20 नवंबर को कुल 38 सीटों पर मतदान होना है. इस चरण में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, पूर्व डिप्टी सीएम सुदेश महतो, स्पीकर रवींद्रनाथ महतो सहित चार कैबिनेट मंत्री इरफान अंसारी, हफीजुल हसन, दीपिका पांडेय सिंह और बेबी देवी की किस्मत का फैसला होगा. इसके अलावा कल्पना सोरेन, सीता सोरेन, लुईस मरांडी और लोबिन हेंब्रम पर भी सभी की नजरें टिकीं होंगी. दूसरे चरण में 11 पूर्व मंत्री भी चुनावी अखाड़े में हैं.
स्टीफन मरांडी, हेमलाल मुर्मू, बसंत सोरेन, लुईस मरांडी, बादल पत्रलेख, रंधीर सिंह, सुरेश पासवान, प्रदीप यादव, जेपी पटेल, मथुरा महतो और जलेश्वर महतो की भी किस्मत का फैसला होगा. बताते चलें कि 38 सीटों के लिए कुल 528 उम्मीदवार मैदान में हैं. इसमें 472 पुरुष और 55 महिला उम्मीदवार हैं. एक जेंडर उम्मीदवार भी चुनावी अखाड़े में है.
राष्ट्रीय दल से 73 प्रत्याशी हैं, जिनमें 60 पुरुष और 13 महिलाएं हैं. मान्यता प्राप्त राज्यस्तरीय झारखंड की पार्टियों के 28 उम्मीदवार भी चुनावी रण में हैं. इसमें 23 पुरुष और पांच महिला उम्मीदवार शामिल हैं. निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या 257 है. इस दूसरे चरण के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार भी खेल बिगाड़ सकते हैं. वहीं इस चरण में जयराम महतो की पार्टी जेएलकेएम की भी अग्निपरीक्षा होगी. जयराम महतो खुद डुमरी और बेरमो से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
वहीं लोकसभा में डेढ़ लाख से अधिक वोट पाने वाले जेएलकेएम उम्मीदवार देंवेंद्रनाथ महतो सिल्ली से आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो के सामने हैं. दूसरे चरण के पांच सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष के आसार हैं. धनवार में बीजेपी उम्मीदवार बाबूलाल मरांडी के सामने जेएमएम के निजामुद्दीन अंसारी और सीपीआई-एमएल के राजकुमार यादव भी मैदान में हैं.
डुमरी में मंत्री बेबी सामने आजसू की यशोदा देवी हैं. लेकिन इस सीट से जयराम महतो भी चुनावी मैदान में हैं. इस सीट पर त्रिकोणीय संघर्ष के आसार बन रहे हैं. गोमिया में जेएलकेएम के अमरेश महतो भी चुनावी गणित को बिगाड़ सकते हैं. वैसे तो इस सीट पर जेएमएम के योगेंद्र प्रसाद और आजसू के लंबोदर महतो आमने-सामने हैं.
बेरमो में मुकाबला दिलचस्प होगा. इस सीट से कांग्रेस के जयमंगल सिंह, बीजेपी के रवींद्र पांडेय और जेएलकेएम के जयराम महतो चुनावी रण में हैं. यहां भी त्रिकोणीय संघर्ष के आसार हैं. सिल्ली में भी त्रिकोणीय संघर्ष के आसार बन रहे हैं. यहां जेएमएम के अमित महतो, आजसू के सुदेश महतो और जेएलकेएम के देवेंद्रनाथ महतो चुनावी अखाड़े में हैं.
बरहेट
- हेमंत सोरेन(जेएमएम)
- गमालियेल हेंब्रंम(बीजेपी)
बोरियो
- धनंजय सोरेन(जेएमएम)
- लोबिन हेंब्रम(बीजेपी)
राजमहल
- एमटी राजा(जेएमएम)
- अनंत ओझा(बीजेपी)
लिट्टीपाड़ा
- हेमलाल मुर्मू(जेएमएम)
- बाबूधन मुर्मू( बीजेपी)
पाकुड़
- निशात आलम(कांग्रेस)
- अजहर इस्लाम(आजसू)
महेशपुर
- स्टीफन मरांडी(जेएमएम)
- नवनीत हेंब्रम( बीजेपी)
शिकारीपाड़ा
- आलोक सोरेन( जेएमएम)
- परितोष सोरेन( बीजेपी)
नाला
- रवींद्रनाथ महतो(जेएमएम)
- माधवचंद्र महतो(बीजेपी)
जामताड़ा
- इरफान अंसारी(कांग्रेस)
- सीता सोरेन(बीजेपी)
दुमका
- बसंत सोरेन(जेएमएम)
- सुनील सोरेन(बीजेपी)
जामा
- लुईस मरांडी(जेएमएम)
- सुरेश मुर्मू( बीजेपी)
जरमुंडी
- बादल पत्रलेख( कांग्रेस)
- देवेंद्र कुंवर( बीजेपी)
मधुपुर
- हफीजुल हसन( जेएमएम)
- गंगानारायण सिंह( बीजेपी)
सारठ
- चुन्ना सिंह( जेएमएम)
- रंधीर सिंह( बीजेपी)
देवघर
- सुरेश पासवान(राजद)
- नारायण दास(बीजेपी)
पोड़ैयाहाट
- प्रदीप यादव(कांग्रेस)
- देवेंद्रनाथ सिंह(बीजेपी)
गोड्डा
- संजय प्रसाद यादव(राजद)
- अमित मंडल(बीजेपी)
महगामा
- दीपिका पांडेय सिंह(कांग्रेस)
- अशोक कुमार भगत( बीजेपी)
रामगढ़
- ममता देवी(कांग्रेस)
- सुनीता चौधरी( आजसू)
मांडू
- जेपी पटेल(कांग्रेस)
- तिवारी महतो(आजसू)
धनवार
- निजामुद्दीन अंसारी(जेएमएम)
- बाबूलाल मरांडी(बीजेपी)
बगोदर
- विनोद सिंह(सीपीआइ-एमएल)
- नागेंद्र महतो(बीजेपी)
जमुआ
- केदार हाजरा( जेएमएम)
- मंजू देवी(बीजेपी)
गांडेय
- कल्पना सोरेन(जेएमएम)
- मुनिया देवी(बीजेपी)
गिरिडीह
- सुदिव्य सोनू(जेएमएम)
- निभर्य शाहाबादी( बीजेपी)
डुमरी
- बेबी देवी(जेएमएम)
- यशोदा देवी(आजसू)
गोमिया
- योगेंद्र प्रसाद(जेएमएम)
- लंबोदर महतो(आजसू)
बेरमो
- जयमंगल सिंह(कांग्रेस)
- रवींद्र पांडेय( बीजेपी)
बोकारो
- श्वेता सिंह(कांग्रेस)
- विरंची नारायण(बीजेपी)
चंदनक्यारी
- उमाकांत रजक(जेएमएम)
- अमर बाउरी( बीजेपी)
सिंदरी
- चंद्रदेव महतो(सीपीआइ-एमएल)
- तारा देवी(बीजेपी)
निरसा
- अरूप चटर्जी( सीपीआइ-एमएल)
- अर्पणा सेनगुप्ता(बीजेपी)
धनबाद
- अजय दूबे(कांग्रेस)
- राज सिन्हा(बीजेपी)
झरिया
- पूर्णिमा नीरज सिंह(कांग्रेस)
- रागिनी सिंह(बीजेपी)
टुंडी
- मथुरा महतो(जेएमएम)
- विकास महतो(बीजेपी)
बाघमारा
- जलेश्वर महतो(कांग्रेस)
- शत्रुधन महतो( बीजेपी)
सिल्ली
- अमित महतो(जेएमएम)
- सुदेश महतो( आजसू)
खिजरी
-
राजेश कच्छप(कांग्रेस)
-
राम कुमार पाहन(बीजेपी)
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न्यायाधीशों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि न्यायाधीशों को एक संन्यासी की तरह जीवन जीना चाहिए और घोड़े की तरह काम करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और निर्णयों के बारे में कोई राय व्यक्त नहीं करनी चाहिए. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह मौखिक टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट की यह पीठ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दो महिला न्यायिक अधिकारियों की बर्खास्तगी से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी.
कोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका में दिखावटीपन के लिए कोई जगह नहीं है. पीठ ने कहा, ‘‘न्यायिक अधिकारियों को फेसबुक का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. उन्हें निर्णयों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कल यदि निर्णय का हवाला दिया जाएगा, तो न्यायाधीश पहले ही किसी न किसी रूप में अपनी बात कह चुके होंगे.”
पीठ ने कहा, ‘‘यह एक खुला मंच है…आपको एक संत की तरह जीवन जीना होगा, पूरी मेहनत से काम करना होगा. न्यायिक अधिकारियों को बहुत सारे त्याग करने पड़ते हैं. उन्हें फेसबुक का बिल्कुल प्रयोग नहीं करना चाहिए.”
बर्खास्त महिला न्यायाधीशों में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने पीठ के विचारों को दोहराते हुए कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी या न्यायाधीश को न्यायिक कार्य से संबंधित कोई भी पोस्ट फेसबुक पर नहीं डालनी चाहिए.
यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, जो न्यायमित्र हैं, द्वारा बर्खास्त महिला न्यायाधीश के खिलाफ विभिन्न शिकायतों के बारे में पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद आई. अग्रवाल ने पीठ को बताया कि महिला न्यायाधीश ने फेसबुक पर भी एक पोस्ट डाली थी.
ग्यारह नवंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने कथित असंतोषजनक प्रदर्शन के कारण राज्य सरकार द्वारा छह महिला सिविल न्यायाधीशों की बर्खास्तगी का स्वत: संज्ञान लिया था. हालांकि, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की पूर्ण अदालत ने एक अगस्त को अपने पहले के प्रस्तावों पर पुनर्विचार किया और चार अधिकारियों ज्योति वरकड़े, सुश्री सोनाक्षी जोशी, सुश्री प्रिया शर्मा और रचना अतुलकर जोशी को कुछ शर्तों के साथ बहाल करने का फैसला किया, जबकि अन्य दो अदिति कुमार शर्मा और सरिता चौधरी को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया.
शीर्ष अदालत उन न्यायाधीशों के मामलों पर विचार कर रही थी, जो क्रमशः 2018 और 2017 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे.
(इनपुट एजेंसियों से भी)
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अनुकूल नीतियों, कारोबारी सुगमता से बिहार अब निवेश का आकर्षक स्थल
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पटना:
विकास के लिहाज से पिछड़े राज्यों में आने वाले बिहार की तस्वीर अब बदल रही है. राज्य अब अनूकूल नीतियों तथा कारोबारी सुगमता की वजह से निवेश का आकर्षक स्थल बन रहा है. अदाणी समूह से लेकर कोका-कोला तक ने यहां अरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएं की हैं. निवेश के लिए और भी कंपनियां यहां आने वाली हैं.
राज्य के उद्योग और पर्यटन मंत्री नीतीश मिश्रा बिहार को एक ऐसे राज्य में बदल रहे हैं, जो पूर्वी भारत में निवेशकों के लिए प्रवेश द्वार बन सकता है. उनका कहना है, बिहार की औद्योगिक क्षमता असीमित है. बिहार धारणा का शिकार रहा है. लेकिन अब यह बदल रहा है.
मिश्रा ने कहा कि राज्य निवेशकों को ब्याज छूट से लेकर राज्य जीएसटी की वापसी, स्टाम्प शुल्क छूट, निर्यात सब्सिडी और परिवहन, बिजली तथा भूमि शुल्क के लिए रियायतें प्रदान कर रहा है.
साथ ही न केवल अनुमोदन के समय बल्कि प्रोत्साहनों के वितरण में भी एकल खिड़की व्यवस्था के तहत मंजूरी दी जा रही है. उन्होंने कहा, ‘‘किसी को सचिवालय आने की जरूरत नहीं है. किसी को सरकारी कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। हम जो भी वादा कर रहे हैं, उसे पूरा कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि बिहार राज्य भर के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित पूरी तरह से तैयार लगभग 24 लाख वर्ग फुट औद्योगिक ‘शेड’ की पेशकश कर रहा है. उसमें सभी प्रकार का बुनियादी ढांचा उपलब्ध है. यह जगह किसी भी उद्योग के लिए निर्धारित दर पर उपलब्ध है. राज्य ने उद्योग स्थापित करने के लिए 3,000 एकड़ का भूमि बैंक भी बनाया है.
उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था की समस्या का समाधान किया गया है. साथ ही कोलकाता और हल्दिया में बंदरगाहों के साथ-साथ झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों में कच्चे माल के स्रोतों और खनिज भंडार तक पहुंचने के लिए बुनियादी ढांचे के साथ लगभग चौबीसों घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है.
बिहार सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण, आईटी और आईटी-संबद्ध सेवाओं (आईटीईएस), कपड़ा और चमड़ा क्षेत्रों को उच्च प्राथमिकता के रूप में रखा है. उनमें से प्रत्येक में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग नीतियां हैं. इसके अलावा, सरकार एथनॉल और बायोगैस जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर भी बड़ा काम कर रही है.
मिश्रा ने कहा कि बिहार में बदलाव का श्रेय केंद्र और राज्य के मिलकर काम करने को जाता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली प्रगतिशील विचारधारा वाली केंद्र सरकार के साथ, क्षेत्रीय असंतुलन अब बीते दिनों की बात है. अब हर राज्य के पास मौका है.
मिश्रा ने कहा कि बिहार ने पिछले दो दशक में इस अवसर का लाभ उठाया है. एक राज्य जो लगातार कम वृद्धि दर के लिए जाना जाता था, अब राष्ट्रीय औसत से बेहतर वृद्धि दर हासिल कर रहा है.
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी नीति अच्छी है और सौभाग्य से बिहार में हमारा नेतृत्व इतना अच्छा रहा है कि इन 19 साल में हमने बहुत अच्छा बुनियादी ढांचा बनाया है. सही मायने में बिहार निवेशकों के लिए तैयार है.”
बिहार की स्थिति विशिष्ट है. पूर्वी और उत्तरी भारत और नेपाल के विशाल बाजारों से निकटता के कारण बिहार को स्थान-विशेष का लाभ प्राप्त है. मूल रूप से कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था वाले राज्य के पास एक बड़ा कृषि और पशु उत्पादन आधार है. यह कृषि आधारित यानी खाद्य प्रसंस्करण, रेशम और चाय से लेकर चमड़े और गैर-धातु खनिजों तक कई उद्योगों के लिए कच्चे माल की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति करता है.
इसके अलावा, पानी की कोई समस्या नहीं है और पर्याप्त संख्या में सस्ता श्रम उपलब्ध है. मिश्रा ने कहा, ‘‘ये हमारी मुख्य ताकत है और आने वाले दिनों में, बिहार में भारत के पूरे पूर्वी हिस्से के लिए वृद्धि का प्रमुख इंजन बनने की क्षमता है. यह बिहार का समय है.”
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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काल बना स्पीड ब्रेकर, हवा में उछली स्कूटर, सड़क पर घिसट गया शख्स… देखिए हैरान करने वाला VIDEO
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नई दिल्ली:
देहरादून में घंटाघर के सामने बिना चिन्ह वाले स्पीड ब्रेकर से टकराने के बाद एक स्कूटर सवार हवा में उछला और इसके बाद वह सड़क पर गिरा. वह और उसकी स्कूटर कई मीटर तक सड़क पर सरकती हुई आगे गई. गनीमत रही कि स्कूटर सवार को कोई गंभीर चोट नहीं लगी. स्पीड ब्रेकर पर ड्राइवरों को सचेत करने के लिए उनकी मार्किंग नहीं की गई है जिसके कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
NDTV को मिले घटनास्थल के फुटेज में स्कूटर मध्यम गति से स्पीड ब्रेकर की ओर बढ़ती हुई दिख रही है. जैसे ही स्कूटर सवार स्पीड ब्रेकर से टकराता है, स्कूटर अप्रत्याशित रूप से हवा में उछल जाता है. वाहन चालक उछलकर नीचे गिर जाता है. वह कुछ देर रुकने के बाद उठता है और वहां से चला जाता है.
स्पीड ब्रेकर वाहनों की गति को नियंत्रित रखने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन इनकी डिजाइन में दोषों के कारण यही स्पीड ब्रेकर कई दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं. देहरादून के इस स्पीड ब्रेकर की स्पष्ट मार्किंग नहीं की गई है. इसके अलावा यह अत्यधिक ऊंचा भी है. इससे चार पहियों वाले वाहनों के लिए इसे पार करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
उचित संकेतक और मार्किंग की कमी के कारण ड्राइवरों के लिए स्पीड ब्रेकर का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है. इससे यहां हादसे हो रहे हैं.
इस स्पीड ब्रेकर के कारण कथित तौर पर सात दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें तीन साल के एक बच्चे सहित दो लोग घायल हुए हैं.
स्पीड ब्रेकर के कारण हादसे का यह पहला मामला नहीं है. अक्टूबर में गुरुग्राम में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी. तब गोल्फ कोर्स रोड पर एक तेज रफ़्तार BMW कार नए बनाए गए स्पीड ब्रेकर पर से उछल गई थी.
कैमरे में कैद हुई इस घटना में कार जमीन से काफी ऊपर उछलती हुई दिखी थी. कार उस स्थान से करीब 15 फीट दूर जाकर गिरी थी. उसी वीडियो में दो ट्रक भी बिना किसी निशान वाले स्पीड ब्रेकर से टकराकर हवा में उछलते हुए देखे गए थे.
इस घटना को लेकर कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर हुई तीखी प्रतिक्रिया पर अधिकारियों ने कार्रवाई की थी. गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) ने ड्राइवरों को चेतावनी देने के लिए “आगे स्पीड ब्रेकर है” लिखा हुआ एक साइनबोर्ड लगवाया. उन्होंने स्पीड ब्रेकर की थर्मोप्लास्टिक व्हाइट पेंट से मार्किंग भी कराई थी. इस तरह पेंट करने से विशेष रूप से रात में स्पीड ब्रेकर साफ दिखाई देता है.
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